जब भी दुनिया में होती है जंग, कितने दिन में उबरते हैं Sensex और Nifty, जानें पिछले 26 साल का रिकॉर्ड
वैश्विक युद्धों और जियो-पॉलिटिकल तनावों का भारतीय शेयर बाजार पर तात्कालिक असर जरूर पड़ता है. 1999 कारगिल युद्ध से लेकर रूस-यूक्रेन और इज़राइल-गाजा संघर्ष तक, हर बार सेंसेक्स में शुरुआती गिरावट आई लेकिन कुछ हफ्तों या महीनों में बाजार ने रिकवरी कर ली.
मिडिल ईस्ट में ईरान, इजराइल और अमेरिका के बीच बढ़ते तनाव ने एक बार फिर वैश्विक वित्तीय बाजारों को चिंतित कर दिया है. मिसाइल हमलों, सैन्य चेतावनियों और संभावित जवाबी कार्रवाई की खबरें आते ही निवेशकों की जोखिम लेने की क्षमता घटने लगती है. भारतीय शेयर बाजार भी ऐसे जियो-पॉलिटिकल संकटों से अछूता नहीं रहा है. इतिहास बताता है कि जब-जब वैश्विक युद्ध या बड़े सैन्य टकराव हुए, तब-तब BSE Sensex और Nifty 50 में शुरुआती गिरावट देखने को मिली लेकिन ज्यादातर मामलों में बाजार ने कुछ समय बाद तेजी से रिकवरी भी की. युद्ध और जियो-पॉलिटिकल संकट बाजारों में अल्पकालिक झटके जरूर देते हैं लेकिन जब स्थिति स्पष्ट होने लगती है तो निवेशकों का भरोसा लौटता है और बाजार धीरे-धीरे स्थिर हो जाता है. आइये पिछले 26 साल का रिकॉर्ड देखते हैं.
करगिल वॉर
1999 का करगिल वॉर इसका पहला बड़ा उदाहरण है. भारत-पाकिस्तान के बीच मई से जुलाई 1999 तक चले इस युद्ध से पहले ही बाजार में घबराहट दिखने लगी थी. अप्रैल 1999 में बढ़ते तनाव की खबरों के बाद निफ्टी में लगभग 16% की गिरावट दर्ज की गई. जब 3 मई 1999 को युद्ध शुरू हुआ उस दिन सेंसेक्स 1.58% गिरकर बंद हुआ. हालांकि जैसे-जैसे युद्ध का परिणाम स्पष्ट होने लगा निवेशकों का भरोसा लौटा और मई से जुलाई के बीच सेंसेक्स व निफ्टी दोनों करीब 34% चढ़ गए.
इराक वॉर
2003 में शुरू हुआ इराक वॉर भी बाजार के लिए एक महत्वपूर्ण घटना रही. 20 मार्च 2003 को युद्ध शुरू होने के दिन सेंसेक्स 2.30% चढ़कर बंद हुआ. हालांकि अगले कुछ हफ्तों में अनिश्चितता बढ़ने से अप्रैल 2003 के दौरान बाजार में करीब 10% की गिरावट आई. इसके बावजूद जून 2003 तक सेंसेक्स फिर से युद्ध से पहले के स्तर पर लौट आया.
रूस-यूक्रेन वॉर
2022 में रूस-यूक्रेन वॉर के दौरान वैश्विक बाजारों में भारी उथल-पुथल देखने को मिली. 24 फरवरी 2022 को युद्ध शुरू होने के दिन सेंसेक्स लगभग 4.7% गिरकर बंद हुआ. इसके बाद भी बाजार में उतार-चढ़ाव जारी रहा और मार्च के शुरुआती दिनों में करीब 7% की अतिरिक्त गिरावट आई. हालांकि मार्च के अंत तक बाजार फिर से युद्ध से पहले के स्तर पर पहुंच गया, जबकि अगस्त 2022 तक पूरी तरह स्थिरता लौट आई.
इजरायल-गाजा वॉर
इसी तरह अक्टूबर 2023 में शुरू हुआ इजरायल-गाजा वॉर भी भारतीय बाजार को प्रभावित करने वाला बड़ा जियो-पॉलिटिकल संकट रहा. 9 अक्टूबर 2023 को बाजार खुलने पर सेंसेक्स लगभग 0.73% गिरा लेकिन दो ट्रेडिंग सेशन के भीतर ही बाजार में रिकवरी शुरू हो गई. हालांकि बाद में इंडेक्स करीब 5% तक फिसले लेकिन नवंबर 2023 के अंत तक दोनों प्रमुख इंडेक्स फिर से पुराने स्तर पर पहुंच गए.
भारत-पाक वॉर
2025 में भारत-पाकिस्तान के बीच ऑपरेशन सिंदूर के दौरान भी बाजार में शुरुआती घबराहट दिखी. प्री-मार्केट ट्रेड में सेंसेक्स करीब 700 अंक गिर गया था लेकिन ट्रेडिंग के दौरान स्थिति संभल गई और इंडेक्स मामूली बढ़त के साथ बंद हुआ. इसके बाद दो सत्रों में करीब 2% की गिरावट आई, मगर 14 मई 2025 तक बाजार फिर से सामान्य स्तर पर लौट आया.
हालिया USA-ईरान वॉर
हालिया अमेरिका-ईरान तनाव के बीच 2 मार्च को भारतीय बाजारों में तेज गिरावट दर्ज की गई. सेंसेक्स 1,048 अंक गिरकर 80,238 पर बंद हुआ, जबकि निफ्टी 312 अंक फिसलकर 24,865 पर आ गया. शुरुआती कारोबार में सेंसेक्स 2,700 अंकों से ज्यादा गिर गया था जिससे निवेशकों की संपत्ति में कुछ ही मिनटों में लगभग 8 लाख करोड़ रुपये की कमी आ गई. ऑटो, कंज्यूमर ड्यूरेबल्स और ऑयल-गैस सेक्टर के शेयरों में लगभग 2% की गिरावट आई जबकि मिडकैप और स्मॉलकैप इंडेक्स भी करीब 1.5% टूटे.
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डिस्क्लेमर: Money9live किसी स्टॉक, म्यूचुअल फंड, आईपीओ में निवेश की सलाह नहीं देता है. यहां पर केवल स्टॉक्स की जानकारी दी गई है. निवेश से पहले अपने वित्तीय सलाहकार की राय जरूर लें.
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