Gold और सिल्वर को ट्र्रैक करने वाले ETF के दामों में फर्क कैसे? जानें कौन से फैक्टर तय करते हैं प्राइस

कई निवेशक गूगल या MCX पर गोल्ड और सिल्वर की स्पॉट कीमत देखते हैं और उम्मीद करते हैं कि ETF भी बिल्कुल उसी तरह चले. हकीकत में ETF एक रेफरेंस बेंचमार्क को ट्रैक करते हैं, जो स्पॉट प्राइस से थोड़ा अलग हो सकता है. सिल्वर ETF आमतौर पर ग्लोबल सिल्वर प्राइस को डॉलर से रुपये में बदलकर ट्रैक करते हैं.

भारत में गोल्ड और सिल्वर में निवेश के लिए ETF तेजी से पॉपुलर हो रहे हैं. वजह साफ है, शेयर बाजार के जरिए आसानी से ट्रेडिंग और कीमती धातुओं में एक्सपोजर दोनों एक साथ मिल जाता है. लेकिन निवेशकों के मन में एक सवाल अक्सर आता है कि एक ही मेटल को ट्रैक करने वाले अलग- अलग ETF के दाम इतने अलग क्यों होते हैं. जैसे सिल्वर में Nippon India Silver ETF करीब 292.73 रुपये पर ट्रेड कर रहा है, ICICI Prudential Silver ETF करीब 306.55 रुपये पर और Zerodha Silver ETF करीब 31.23 रुपये प्रति यूनिट पर है. वहीं गोल्ड में SBI Gold ETF करीब 131.51 रुपये, HDFC Gold ETF करीब 131.88 रुपये और ICICI Prudential Gold ETF करीब 132.42 रुपये पर ट्रेड कर रहे हैं. देखने में लगता है कि एक ही मेटल को ट्रैक करने के बावजूद कीमतों में इतना फर्क क्यों है.

ETF यूनिट प्राइस मेटल की कीमत नहीं होती

डिमांड और सप्लाई का भी असर पड़ता है

ETF भले ही गोल्ड और सिल्वर को ट्रैक करते हों, लेकिन एक्सचेंज पर इनकी कीमत डिमांड और सप्लाई से भी प्रभावित होती है. जब किसी ETF में ज्यादा खरीदारी होती है, तो उसका मार्केट प्राइस NAV से थोड़ा ऊपर चला जाता है, जिसे प्रीमियम कहा जाता है. वहीं जब बिकवाली ज्यादा होती है, तो भाव NAV से नीचे आ सकता है, जिसे डिस्काउंट कहते हैं. यह इसलिए होता है क्योंकि ETF की यूनिट बनाना और रिडीम करना तुरंत नहीं होता. अधिकृत पार्टिसिपेंट्स के जरिए यह प्रोसेस होता है, जिसमें थोड़ा समय लग सकता है.

मान लीजिए किसी दिन Nippon India Silver ETF में अचानक भारी खरीदारी आ जाती है और नई यूनिट तुरंत नहीं बन पाती, तो उसका भाव NAV से ऊपर जा सकता है. इसी तरह अगर बिकवाली ज्यादा हो जाए या लिक्विडिटी कम हो, तो भाव नीचे भी आ सकता है. गोल्ड ETF में आमतौर पर लिक्विडिटी ज्यादा होती है, इसलिए प्रीमियम और डिस्काउंट का फर्क कम रहता है. लेकिन छोटे या कम ट्रेड होने वाले ETF में यह गैप थोड़ा ज्यादा दिख सकता है.

ट्रैकिंग और खर्च का फर्क ज्यादा अहम है

ETF चुनते वक्त यूनिट प्राइस देखने से ज्यादा जरूरी है कि वह अपने बेंचमार्क को कितनी अच्छी तरह ट्रैक करता है और उसका खर्च कितना है. सिल्वर ETF आमतौर पर ग्लोबल सिल्वर प्राइस को रुपये में कन्वर्ट करके ट्रैक करते हैं, वहीं गोल्ड ETF इंटरनेशनल गोल्ड प्राइस को फॉलो करते हैं. हर फंड की एक्सपेंस रेशियो अलग होती है. जैसे ICICI Prudential Silver ETF की एक्सपेंस रेशियो करीब 0.40 फीसदी है, जबकि Nippon India Silver ETF की करीब 0.56 फीसदी है. यह छोटा सा फर्क लंबी अवधि में रिटर्न पर असर डाल सकता है. इसी तरह गोल्ड ETF में HDFC Gold ETF की एक्सपेंस रेशियो करीब 0.59 फीसदी है, जबकि SBI Gold ETF की करीब 0.7 फीसदी है. लंबे समय में यही लागत का फर्क ज्यादा मायने रखता है, न कि यूनिट का दाम.

ट्रैकिंग एरर क्या होता है

ट्रैकिंग एरर यह बताता है कि कोई ETF अपने अंडरलाइंग मेटल की कीमत को कितनी सटीकता से फॉलो कर रहा है. खर्च, टाइमिंग, करेंसी मूवमेंट और ऑपरेशनल कारणों से ETF का रिटर्न बेंचमार्क से थोड़ा अलग हो सकता है. उदाहरण के तौर पर ICICI Prudential Silver ETF का ट्रैकिंग एरर करीब 0.50 फीसदी है, जबकि Nippon India Silver ETF का करीब 0.58 फीसदी है. इसका मतलब ICICI वाला ETF सिल्वर की कीमत को थोड़ा ज्यादा सटीकता से फॉलो कर रहा है. गोल्ड ETF में SBI Gold ETF का ट्रैकिंग एरर करीब 0.23 फीसदी और HDFC Gold ETF का करीब 0.28 फीसदी है. यह छोटे फर्क लंबे समय में असर दिखा सकते हैं. इसलिए ETF चुनते वक्त ट्रैकिंग एरर देखना भी जरूरी है.

स्पॉट प्राइस और ETF प्राइस में फर्क क्यों दिखता है

कई निवेशक गूगल या MCX पर गोल्ड और सिल्वर की स्पॉट कीमत देखते हैं और उम्मीद करते हैं कि ETF भी बिल्कुल उसी तरह चले. हकीकत में ETF एक रेफरेंस बेंचमार्क को ट्रैक करते हैं, जो स्पॉट प्राइस से थोड़ा अलग हो सकता है. सिल्वर ETF आमतौर पर ग्लोबल सिल्वर प्राइस को डॉलर से रुपये में बदलकर ट्रैक करते हैं. ऐसे में अगर इंटरनेशनल मार्केट में सिल्वर 1 फीसदी बढ़ता है, तो एक ETF 0.98 फीसदी और दूसरा 1.02 फीसदी बढ़ सकता है. यह फर्क टाइमिंग, करेंसी और ट्रैकिंग एरर की वजह से होता है. गोल्ड ETF में भी यही स्थिति रहती है. इंटरनेशनल गोल्ड प्राइस, करेंसी रेट और एक्सचेंज पर लिक्विडिटी के कारण ETF की चाल में हल्का फर्क दिख सकता है. यह सामान्य बात है और इसे मिसप्राइसिंग नहीं माना जाता.

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डिस्क्लेमर: Money9live किसी स्टॉक, म्यूचुअल फंड, आईपीओ में निवेश की सलाह नहीं देता है. यहां पर केवल स्टॉक्स की जानकारी दी गई है. निवेश से पहले अपने वित्तीय सलाहकार की राय जरूर लें.