India-EU FTA: भारतीय शेयर बाजार के लिए ‘मदर ऑफ ऑल डील्स’ का क्या है मतलब? कौन बनेगा विनर, किस पर पड़ेगा दबाव?

भारत और यूरोपीय संघ के बीच 27 जनवरी को हुए फ्री ट्रेड एग्रीमेंट से शेयर बाजार में सेक्टर-आधारित हलचल देखने को मिली. टेक्सटाइल, मरीन, फार्मा और केमिकल शेयरों में तेजी आई जबकि ऑटो और शराब सेक्टर पर दबाव दिखा. यह डील लंबी अवधि में भारतीय निर्यात के लिए स्ट्रक्चरल पॉजिटिव मानी जा रही है.

भारत-EU एफटीए Image Credit: canva

भारत और यूरोपीय संघ (EU) के बीच हुए बहुप्रतीक्षित फ्री ट्रेड एग्रीमेंट (FTA) को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ‘मदर ऑफ ऑल डील्स’ बताया है. इस ऐतिहासिक समझौते के बाद शेयर बाजार में सेक्टर-आधारित तेज हलचल देखने को मिली. टेक्सटाइल और सीफूड से जुड़े शेयरों में जहां जोरदार तेजी दर्ज की गई. वहीं ऑटो और शराब सेक्टर के शेयरों पर दबाव दिखा. करीब दो दशक की बातचीत के बाद हुए इस समझौते से करीब 2 अरब लोगों का एक साझा बाजार तैयार होगा. इसके तहत EU भारतीय सामानों पर 90% तक टैरिफ खत्म करेगा जिससे करीब 33 अरब डॉलर के भारतीय निर्यात पर ड्यूटी शून्य हो जाएगी. वहीं, भारत भी यूरोपीय इंडस्ट्रियल प्रोडक्ट्स पर टैरिफ में बड़ी कटौती करेगा जिससे घरेलू कंपनियों को कड़ी कंपटीशन का सामना करना पड़ेगा. आइए जानते हैं कि इससे भारतीय शेयर बाजार पर क्या असर पड़ेगा.

शेयर बाजार पर असर

इस डील के ऐलान के बाद टेक्सटाइल शेयरों में तेज उछाल देखने को मिला. अगर टेक्सटाइल शेयरों की बात करें तो Kitex Garments करीब 9 फीसदी, Go Fashion 7.3 फीसदी, KPR Mills 6.07 फीसदी और Indo Count Industries में करीब 6 फीसदी की तेजी पर बंद हुए. वहीं, झींगा निर्यात से जुड़ी कंपनियों में भी तेजी दिखी जहां Apex Frozen Foods के शेयर करीब 12 फीसदी की तेजी रही और Avanti Feeds के शेयर भी करीब 3% की मजबूती के साथ बंद हुए.

इसके उलट ऑटो शेयरों में कमजोरी दिखी. M&M के शेयर 4% से ज्यादा टूटे, Hyundai Motor करीब 3.6% फिसला, जबकि Maruti Suzuki और Tata Motors PV में भी 1% से ज्यादा की गिरावट रही. शराब सेक्टर में भी दबाव रहा, जहां Sula Vineyards में 3.4% की गिरावट आई और Radico Khaitan व United Spirits 1-2% तक टूटे.

किन सेक्टर के शेयरों को मिल सकता है बड़ा फायदा

इस समझौते के तहत EU अगले सात साल में 99.5% गुड्स पर टैरिफ घटाएगा जिससे सी प्रोडक्ट्स, टेक्सटाइल, लेदर, केमिकल्स, रबर, बेस मेटल्स और जेम्स-ज्वेलरी जैसे सेक्टरों के शेयरों को बड़ा फायदा मिल सकता है. EU का औसत टैरिफ 3.8% से घटकर 0.1% रह जाएगा जिससे भारतीय एक्सपोर्टर्स की रीच काफी बढ़ेगी.

ऑटो और शराब सेक्टर पर दबाव

कारों पर भारत की इंपोर्ट ड्यूटी 110% से घटकर 10% की जाएगी. हालांकि यह कोटा सिस्टम के तहत होगा. इससे Volkswagen, BMW और Mercedes-Benz जैसी कंपनियों को फायदा होगा लेकिन घरेलू ऑटो कंपनियों पर कंपटीशन का दबाव बढ़ सकता है. वहीं, वाइन और स्पिरिट्स पर टैरिफ में बड़ी कटौती से शराब सेक्टर की घरेलू कंपनियों पर भी असर पड़ सकता है.

असली असर 2027 से दिखेगा

यह डील स्ट्रक्चरल लॉन्ग टर्म पॉजिटिव है. टेक्सटाइल, फार्मा, केमिकल और मरीन एक्सपोर्ट से जुड़ी कंपनियों में लॉन्ग टर्म निवेश के मौके बन सकते हैं. वहीं, ऑटो और शराब जैसे सेक्टरों में निकट भविष्य में उतार-चढ़ाव और दबाव बना रह सकता है. असली असर 2027 से दिखेगा जब यह डील पूरी तरह लागू होगी.

डिस्क्लेमर: Money9live किसी स्टॉक, म्यूचुअल फंड, आईपीओ में निवेश की सलाह नहीं देता है. यहां पर केवल स्टॉक्स की जानकारी दी गई है. निवेश से पहले अपने वित्तीय सलाहकार की राय जरूर लें.