चिप फैक्ट्री नहीं, ये 3 केमिकल कंपनियां बन सकती हैं असली गेमचेंजर! सेमीकंडक्टर मिशन से मिल सकता है बड़ा फायदा; रखें नजर

भारत का सेमीकंडक्टर मिशन अब तेजी से जमीन पर उतर रहा है, जिससे सप्लाई चेन से जुड़ी केमिकल कंपनियों के लिए बड़े अवसर बन रहे हैं. Linde India, Navin Fluorine International और Gujarat Fluorochemicals जैसी कंपनियां इंडस्ट्रियल गैस, स्पेशियलिटी केमिकल्स और फ्लोरोपॉलिमर के जरिए इस ग्रोथ का फायदा उठाने की तैयारी में हैं.

सेमीकंडक्टर स्टॉक्स Image Credit: canva/money9live

Semiconductor Stocks: भारत का सेमीकंडक्टर मिशन अब केवल सरकारी घोषणाओं तक सीमित नहीं है, बल्कि धीरे-धीरे जमीन पर भी आकार ले रहा है. देश में सेमीकंडक्टर मैन्युफैक्चरिंग इकोसिस्टम तैयार करने के लिए फैब्रिकेशन प्लांट्स के साथ-साथ स्पेशियलिटी केमिकल्स, इंडस्ट्रियल गैस, फ्लोरोकेमिकल्स और हाई-परफॉर्मेंस मटेरियल्स की भी भारी जरूरत होगी. यही वजह है कि इस पूरी वैल्यू चेन में काम करने वाली कुछ केमिकल कंपनियां निवेशकों की नजर में आ रही हैं.

Linde India को मिल सकता है सबसे बड़ा फायदा

Linde India को भारत की सेमीकंडक्टर सप्लाई चेन में सबसे मजबूत दावेदार माना जा रहा है. कंपनी गुजरात के धोलेरा स्पेशल इन्वेस्टमेंट रीजन में सेमीकंडक्टर इंडस्ट्री के लिए समर्पित गैस प्रोडक्शन फैसिलिटी तैयार कर रही है. सेमीकंडक्टर मैन्युफैक्चरिंग में अल्ट्रा हाई-प्योरिटी नाइट्रोजन, ऑक्सीजन, आर्गन, हाइड्रोजन और अन्य स्पेशियलिटी प्रोसेस गैसों की लगातार जरूरत होती है.

इन्हीं गैसों का इस्तेमाल वेफर एचिंग, डिपोजिशन, डोपिंग और एडवांस्ड चिप प्रोसेसिंग में किया जाता है. कंपनी की रणनीति मांग बढ़ने से पहले ही इन्फ्रास्ट्रक्चर तैयार करने की है, ताकि वर्ष 2026 के आखिर तक बड़े स्तर पर शुरू होने वाले सेमीकंडक्टर उत्पादन का तुरंत फायदा उठाया जा सके. अगर शेयर की बात करें, तो गुरुवार को कंपनी का शेयर 1.68 फीसदी की गिरावट के साथ 7021 रुपये पर बंद हुआ.

Navin Fluorine International की कमाई को मिलेगा सपोर्ट

Navin Fluorine International उन चुनिंदा कंपनियों में शामिल है, जो पहले से ही स्पेशियलिटी केमिकल्स के जरिए सेमीकंडक्टर इंडस्ट्री से जुड़ी मांग का फायदा उठा रही हैं. वित्त वर्ष 2026 में कंपनी का प्रदर्शन बेहद मजबूत रहा. इस दौरान कंपनी का नेट प्रॉफिट सालाना आधार पर 130 फीसदी बढ़कर 663.56 करोड़ रुपये पहुंच गया. वहीं, रेवेन्यू 41 फीसदी बढ़कर 3313.90 करोड़ रुपये रहा. Tradebrains की रिपोर्ट के मुताबिक, कंपनी के कुल रेवेन्यू में स्पेशियलिटी केमिकल्स की हिस्सेदारी 38 फीसदी और हाई-परफॉर्मेंस प्रोडक्ट्स की हिस्सेदारी 42 फीसदी है.

इसके अलावा ऑपरेटिंग EBITDA मार्जिन बढ़कर 32.6 फीसदी पर पहुंच गया, जो इस सेक्टर की सबसे मजबूत मार्जिन प्रोफाइल में से एक माना जाता है. मैनेजमेंट ने अगले तीन वर्षों के लिए मजबूत ऑर्डर पाइपलाइन की जानकारी दी है. साथ ही कंपनी ने वित्त वर्ष 2026 की चौथी तिमाही में सेमीकंडक्टर ग्रेड AHF (Anhydrous Hydrogen Fluoride) की कमर्शियल सप्लाई भी शुरू कर दी है. गुरुवार को कंपनी का शेयर 1.16 फीसदी की गिरावट के साथ 7609 रुपये पर बंद हुआ.

Gujarat Fluorochemicals का फोकस हाई-वैल्यू प्रोडक्ट्स पर

Gujarat Fluorochemicals का सेमीकंडक्टर सेक्टर में मौजूदा एक्सपोजर भले ही सीमित हो, लेकिन कंपनी इस क्षेत्र में भविष्य की मांग को देखते हुए बड़े निवेश की तैयारी कर रही है. कंपनी का फ्लोरोपॉलिमर बिजनेस, जिसमें PTFE, PVDF और अन्य स्पेशियलिटी फ्लोरोपॉलिमर्स शामिल हैं, सेमीकंडक्टर मैन्युफैक्चरिंग में इस्तेमाल होने वाले महत्वपूर्ण मटेरियल्स की सप्लाई करता है. फिलहाल कंपनी के कुल रेवेन्यू में फ्लोरोपॉलिमर बिजनेस की हिस्सेदारी करीब 62 फीसदी है.

वित्त वर्ष 2026 की चौथी तिमाही में इस डिवीजन ने 19 फीसदी की सालाना ग्रोथ दर्ज की. मैनेजमेंट ने सेमीकंडक्टर, इलेक्ट्रिक व्हीकल और क्लीन एनर्जी सेक्टर को भविष्य की सबसे बड़े ग्रोथ ड्राइवर के रूप में बताया है. कंपनी ने वित्त वर्ष 2027 के लिए 3130 करोड़ रुपये का कैपेक्स प्लान तैयार किया है. इसमें से करीब 850 करोड़ रुपये हाई-वैल्यू स्पेशियलिटी फ्लोरोपॉलिमर प्रोडक्शन क्षमता बढ़ाने पर खर्च किए जाएंगे. गुरुवार को कंपनी का शेयर 0.01 फीसदी की मामूली बढ़त के साथ 3909.20 रुपये पर बंद हुआ.

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