20 जनवरी नहीं, इस दिन शेयर बाजार में आई थी सबसे बड़ी तबाही, रोकनी पड़ी थी ट्रेडिंग; ये हैं अब तक के 3 बड़े क्रैश

जनवरी की शुरुआत ही शेयर बाजार के लिए भारी साबित हुई है. निफ्टी और सेंसेक्स लगातार दबाव में हैं और सिर्फ दो ट्रेडिंग सेशन (19 जनवरी और 20 जनवरी) में निवेशकों की करीब 13 लाख करोड़ रुपये की संपत्ति मिट चुकी है. ऐसे माहौल में 1992 का हर्षद मेहता स्कैम, 2008 का ग्लोबल फाइनेंशियल क्राइसिस और 2020 का कोविड क्रैश याद दिलाते हैं कि भारतीय बाजार पहले भी कई बार ऐसे तूफान झेल चुका है.

शेयर बाजार और गिरावट Image Credit: @Canva/Money9live

Share Market Biggest Crash: पिछले कुछ ट्रेडिंग सेशन्स शेयर बाजार में निवेश करने वालों के लिए किसी बुरे सपने जैसे रहे होंगे. आज यानी मंगलवार, 20 जनवरी का दिन भी गिरावट के लाल रंग में डूबा हुआ नजर आया. पूरे कारोबार दिन के दौरान शेयर बाजार के प्रमुख इंडेक्स Nifty 50 353 अंक टूटकर 25.232 पर पहुंच गया. वहीं, सेंसेक्स 1065.78 अंक गिरकर 82,180 अंक पर आ गया. लेकिन इससे इतर, क्या आपको मालूम है कि भारतीय शेयर बाजार इससे पहले भी कई बार बुरी तरह टूट चुका है. एक बार तो ऐसा भी हुआ है जब गिरावट को देखते हुए ट्रेडिंग को रोकनी तक पड़ गई थी.

हालांकि, हर बार वजह अलग रही- कभी घोटाले, कभी ग्लोबल संकट तो कभी अचानक लिए गए बड़े फैसले. लेकिन नतीजा एक जैसा रहा, निवेशकों की भारी कमाई कुछ ही दिनों या घंटों में स्वाहा. मौजूदा समय की बात करें तो पिछले दो सेशन (19 जनवरी- 20 जनवरी) में ही करीब 13 लाख करोड़ रुपये की दौलत मिट चुकी है. एक दिन में यानी केवल आज की बात करें तो बाजार से तकरीबन 9 लाख करोड़ रुपये स्वाहा हो गए.

आज की गिरावट

मंगलवार, 20 जनवरी को सभी सेक्टर्स में बिकवाली देखी गई और निफ्टी पूरे डे लो के आधार पर 25,200 से नीचे रहा. सेंसेक्स 1065.78 अंक या 1.28 फीसदी पर बंद हुआ. वहीं, निफ्टी 353 अंक या 1.38 फीसदी लुढ़ककर 25,232.50 पर बंद हुआ. इससे इतर, BSE पर लिस्टेड सभी कंपनियों का मार्केट कैप 9.46 लाख करोड़ रुपये घटकर 455.7 लाख करोड़ रुपये हो गए. वहीं, दो सेशन में 30 शेयरों वाला सेंसेक्स 1400 अंक से ज्यादा यानी 2 फीसदी तक गिरा.

क्यों टूटा बाजार?

ब्लूमबर्ग की एक रिपोर्ट के मुताबिक, इस गिरावट के पीछे कई कारण हैं. सबसे पहला और बड़ा कारण ट्रेड वॉर का बढ़ता डर. तेजी से बदलते ट्रंप के टैरिफ बोल और बढ़ती जियो पॉलिटिकल टेंशन ने निवेशकों को सबसे ज्यादा चिंतित किया है. इससे इतर, Q3 के मिले-जुले नतीजों ने भी निवेशकों के बीच चिंता बढ़ाई है. इसके पीछे के सबसे बड़े कारणों में से एक लेबर कोड का असर भी है. विदेशी निवेशकों की ओर से हो रही भारी बिकवाली ने भी बाजार के लाल रंग को गाढ़ा किया है.

जनवरी से अब तक, विदेशी निवेशकों ने 29000 करोड़ रुपये से ज्यादा के स्टॉक बेच दिए. इससे इतर, सेफ हेवन एसेट्स में पैसों के बढ़ते फ्लो ने भी बाजार में बिकवाली लाई है. इन सबने मिलकर बाजार का मूड पूरी तरह बिगाड़ दिया है. रियल्टी, ऑटो, IT, फार्मा जैसे लगभग सभी सेक्टर दबाव में हैं. लेकिन क्या आपको पता है कि इससे पहले भी बड़े स्तर पर शेयर बाजार क्रैश हुआ जब लाखों करोड़ों रुपये स्वाहा हो गए हैं.

1992 का हर्षद मेहता स्कैम

क्लीयरटैक्स की एक रिपोर्ट के मुताबिक, भारतीय शेयर बाजार का पहला बड़ा झटका साल 1992 में लगा. उस दौर में हर्षद मेहता को “बिग बुल” कहा जाता था. उसने बैंकिंग सिस्टम की खामियों का फायदा उठाकर हजारों करोड़ रुपये शेयर बाजार में झोंक दिए और शेयरों के दाम आसमान पर पहुंचा दिए. लेकिन अप्रैल 1992 में जब यह घोटाला सामने आया, तो बाजार ताश के पत्तों की तरह बिखर गया.

एक ही दिन में सेंसेक्स करीब 13 फीसदी टूट गया. हजारों छोटे निवेशकों की जिंदगी भर की कमाई डूब गई. 29 अप्रैल को बाजार से तकरीबन 4000 करोड़ रुपये डूब गए. इस क्रैश ने यह सिखाया कि बिना नियम-कायदों और निगरानी के बाजार सिर्फ जुए का मैदान बन जाता है. इसी घटना के बाद SEBI को मजबूत रेगुलेटर के रूप में खड़ा किया गया.

2008 का ग्लोबल फाइनेंशियल क्राइसिस

साल 2008 में आई वैश्विक मंदी ने भारतीय बाजार को भी नहीं छोड़ा. अमेरिका की बड़ी इन्वेस्टमेंट बैंक Lehman Brothers के डूबने से दुनिया भर के निवेशक घबरा गए. विदेशी निवेशकों ने भारत समेत उभरते बाजारों से तेजी से पैसा निकालना शुरू कर दिया. नतीजा यह हुआ कि जनवरी 2008 से मार्च 2009 के बीच सेंसेक्स करीब 60 फीसदी से ज्यादा टूट गया.

उसमें भी सबसे ज्यादा गिरावट वाला दिन 21 जनवरी, 2008 था. उस दिन 1400 अंक यानी 7.4 फीसदी तक टूटा. इसमें करोड़ों निवेशकों की संपत्ति साफ हो गई. हालांकि भारत का बैंकिंग सिस्टम मजबूत रहा, इसी वजह से बाजार ने धीरे-धीरे वापसी भी की. इस क्रैश ने दिखा दिया कि भारत का बाजार अब दुनिया से कटा हुआ नहीं है. ग्लोबल हलचल का असर सीधे भारतीय शेयरों पर पड़ता है.

2020 का कोविड क्रैश

23 मार्च 2020, यह तारीख भारतीय शेयर बाजार के इतिहास में हमेशा याद रखी जाएगी. कोरोना महामारी और देशव्यापी लॉकडाउन के डर से बाजार में ऐसी भगदड़ मची कि सेंसेक्स एक ही दिन में करीब 4,000 अंक (13 फीसदी से ज्यादा) टूट गया. कुछ ही दिनों में लाखों करोड़ रुपये की वैल्यू खत्म हो गई. चारों तरफ डर का माहौल था- कंपनियां बंद, नौकरियां खतरे में और भविष्य अनिश्चित.

23 मार्च, 2020 के दिन निफ्टी 3935 अंक यानी 13 फीसदी तक टूटा. बाजार के 13.88 लाख करोड़ रुपये स्वाहा हो गए. लेकिन यहीं से बाजार ने इतिहास की सबसे तेज रिकवरी भी दिखाई. अगले डेढ़ साल में निफ्टी और सेंसेक्स ने नई ऊंचाइयां छू ली. इस क्रैश ने सिखाया कि सबसे बुरे वक्त के बाद ही सबसे अच्छी रिकवरी आती है.

23 मार्च, 2020 क्यों बंद करनी पड़ी थी ट्रेडिंग?

कोरोना के बढ़ते मामलों को देखते हुए देशभर में लॉकडाउन का ऐलान कर दिया गया. इस घोषणा का ही असर था कि शेयरों में चौतरफा बिकवाली देखने को मिली.बाजार खुलते ही घबराहट इतनी ज्यादा थी कि शुरुआती कारोबार में ही सेंसेक्स 10 फीसदी के लोअर सर्किट तक टूट गया. इसी देखते हुए ट्रेडिंग को 45 मिनट के लिए रोकना पड़ा गया. ट्रेडिंग दोबारा शुरू होने के बाद भी बिकवाली का सिलसिला थमा नहीं.

दिनभर के कारोबार के अंत में बीएसई सेंसेक्स 3,935 अंक यानी 13 फीसदी से ज्यादा टूटकर 25,981 के स्तर पर बंद हुआ. सेंसेक्स के सभी 30 शेयर लाल निशान में रहे. वहीं एनएसई पर निफ्टी भी 1,135 अंक या करीब 13 फीसदी की भारी गिरावट के साथ 7,610 पर बंद हुआ. इस एक दिन की गिरावट में ही निवेशकों की संपत्ति को करीब 13.88 लाख करोड़ रुपये का झटका लगा था.

2025 की गिरावट: इतिहास खुद को दोहरा रहा है?

अब बात करते हैं मौजूदा हालात की. 20 जनवरी 2025 को लगातार दूसरे दिन बाजार लाल निशान में बंद हुआ. सेंसेक्स 1,065 अंक गिरकर 82,180 पर और निफ्टी 353 अंक टूटकर 25,232 पर बंद हुआ. सिर्फ दो ट्रेडिंग सेशन में निवेशकों को करीब 13 लाख करोड़ रुपये का नुकसान हो चुका है. बीएसई में लिस्टेड कंपनियों का कुल मार्केट कैप 468 लाख करोड़ से घटकर 455 लाख करोड़ रुपये रह गया है. पिछले 1 हफ्ते में निफ्टी 50 672 अंक यानी 2.59 फीसदी तक टूटा है.

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