ईरान ने बंद कर दिया होर्मुज स्ट्रेट, खाड़ी देशों के पास अब केवल 25 दिन; तेल की कीमतों का टूट जाएगा 17 साल का रिकॉर्ड!
ईरान ने होर्मुज जलडमरूमध्य बंद करने की चेतावनी दी है जिससे वैश्विक तेल आपूर्ति पर बड़ा संकट पैदा हो सकता है. JPMorgan के अनुसार आपूर्ति बाधित रहने पर ब्रेंट क्रूड 120 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच सकता है. इस मार्ग से गुजरने वाला तेल भारत के कुल आयात का लगभग आधा हिस्सा है.
ईरान और अमेरिका-इजरायल के बीच जारी महायुद्ध अब वैश्विक आर्थिक संकट की ओर बढ़ गया है क्योंकि ईरान ने आधिकारिक तौर पर दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण तेल मार्ग होर्मुज जलडमरूमध्य (होर्मुज स्ट्रेट) को बंद करने का ऐलान कर दिया है. ईरानी रिवोल्यूशनरी गार्ड्स (IRGC) ने स्पष्ट चेतावनी जारी की है कि अगर किसी भी जहाज ने इस रास्ते से गुजरने की कोशिश की, तो उसे हमला कर तबाह कर दिया जाएगा. रिपोर्ट के अनुसार इस जलडमरूमध्य के दोनों ओर करीब 706 गैर-ईरानी टैंकर फंसे हुए हैं. मध्य-पूर्व में बढ़ते सैन्य तनाव के बीच वैश्विक तेल बाजार में भारी उतार-चढ़ाव देखने को मिल रहा है. अमेरिकी निवेश बैंक JPMorgan Chase ने चेतावनी दी है कि अगर क्षेत्र में पूर्ण युद्ध छिड़ जाता है और Strait of Hormuz से तेल आपूर्ति लंबे समय तक बाधित होती है तो Brent Crude की कीमतें बढ़कर 120 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच सकती हैं.
कितने दिन उत्पादन रह सकता है जारी
जेपी मॉर्गन के अनुसार यदि होर्मुज जलडमरूमध्य पूरी तरह बंद हो जाता है, तो खाड़ी क्षेत्र के तेल उत्पादक देश सामान्य उत्पादन को अधिकतम करीब 25 दिनों तक ही जारी रख पाएंगे. इसके बाद स्टोरेज क्षमता भर जाने के कारण क्षेत्रीय तेल उत्पादन को पूरी तरह रोकना पड़ सकता है.
क्रूड ऑयल की कीमतें
सोमवार को तेल कीमतों में तेज उछाल देखा गया. अप्रैल डिलीवरी वाला ब्रेंट क्रूड करीब 8.7% बढ़कर 79.28 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया जबकि अमेरिकी क्रूड बेंचमार्क West Texas Intermediate (WTI) लगभग 7.8% बढ़कर 72.16 डॉलर प्रति बैरल पर कारोबार करता दिखा. गौरतलब है कि साल 2008 में अप्रैल से सितंबर के बीच क्रूड ऑयल की कीमतें 110 से 139 डॉलर के बीच पहुंच गईं थीं.
इस मार्ग से रोजना कितनी सप्लाई
रिपोर्ट के मुताबिक, Strait of Hormuz दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री तेल मार्गों में से एक है. इस रास्ते से हर दिन लगभग 2 से 2.1 करोड़ बैरल कच्चा तेल और पेट्रोलियम उत्पाद गुजरते हैं जो वैश्विक दैनिक तेल खपत का करीब 20% और समुद्री तेल व्यापार का लगभग 30% हिस्सा है.
भारत की तेल निर्भरता
- भारत के कच्चे तेल के आयात का लगभग 2.5 से 2.7 मिलियन बैरल प्रतिदिन हिस्सा Strait of Hormuz के रास्ते आता है.
- यह भारत के कुल तेल आयात का लगभग आधा हिस्सा है जो मुख्य रूप से इराक, सऊदी अरब, यूएई और कुवैत से आता है.
- भारत दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा कच्चा तेल उपभोक्ता है और अपनी कुल तेल जरूरत का 88% से अधिक आयात करता है.
- इसके अलावा भारत की प्राकृतिक गैस खपत का भी बड़ा हिस्सा पश्चिम एशिया से आयात के जरिए आता है जो Strait of Hormuz के रास्ते देश तक पहुंचता है.
तेल भंडार कितने दिन चलेंगे
- सरकार के अनुसार भारत के पास रणनीतिक भंडार, रिफाइनरी स्टॉक, बंदरगाह और समुद्री स्टोरेज मिलाकर करीब 74 दिनों की तेल मांग पूरी करने की क्षमता है.
- रणनीतिक कच्चे तेल भंडार लगभग 17-18 दिन, रिफाइंड ईंधन भंडार 20-21 दिन और एलएनजी स्टोरेज 10-12 दिन की जरूरत पूरी कर सकता है.
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