बाजार में तेजी का संकेत! निफ्टी की गिरावट खत्म? इतिहास दे रहा जोरदार रैली का इशारा, जानें पूरी खबर

पिछले 3 महीने में निफ्टी बुरी तरह टूटा है. इस दौरान निफ्टी करीब 14 फीसदी टूट चुका है. बिकवाली का आलम ऐसा रहा है कि निफ्टी का कोई सेक्टर इससे अछूता नहीं रहा है. मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों ने निवेशकों के पोर्टफोलियो को बुरी तरह से झटका दिया है. विदेशी निवेशकों की बिकवाली ने भी बाजार को तगड़ा झटका दिया है.

निफ्टी आउटलुक Image Credit: Canva

भारतीय शेयर बाजार के लिए एक अहम संकेत सामने आया है. निफ्टी ने मार्च 2026 में लगातार 4 महीने की गिरावट का सिलसिला खत्म कर दिया है. यह एक बेहद दुर्लभ पैटर्न है और इतिहास बताता है कि इसके बाद बाजार में जोरदार तेजी देखने को मिल सकती है. आंकड़ों के मुताबिक, निफ्टी के इतिहास में ऐसा सिर्फ 7 बार हुआ है जब इंडेक्स लगातार 4 महीने या उससे ज्यादा गिरा हो. इन 6 पूरे मामलों में अगले 1 साल में औसतन 40.7 प्रतिशत का रिटर्न मिला है. मीडियन रिटर्न करीब 20.8 प्रतिशत रहा है, जबकि 3 महीने में औसतन 12.2 प्रतिशत और 6 महीने में 22.4 प्रतिशत की बढ़त देखी गई है.

क्यों खास है यह गिरावट?

हाल की गिरावट में निफ्टी करीब 14.8 प्रतिशत टूटा, जिसे बाजार में कैपिटुलेशन यानी घबराहट में बिकवाली का संकेत माना जा रहा है. ऐसे फेज के बाद अक्सर बाजार में मजबूत रिकवरी देखने को मिलती है और यही वजह है कि इसे संभावित बॉटम का संकेत माना जा रहा है.

क्या दिखता है पैटर्न?

डेटा से साफ है कि जितनी लंबी गिरावट होती है, उतनी ही मजबूत रिकवरी देखने को मिलती है. 1 महीने की गिरावट के बाद औसतन 22.4 प्रतिशत रिटर्न मिलता है, जबकि 4 महीने या उससे ज्यादा की गिरावट के बाद यह रिटर्न करीब 40.7 प्रतिशत तक पहुंच जाता है. इतिहास में 1991 के बाद 117.9 प्रतिशत और 1998 के बाद 65.6 प्रतिशत की तेजी जैसे बड़े उदाहरण भी सामने आए हैं.

क्या है जानकारों की राय

बाजार के जानकारों के मुताबिक, भारतीय बाजार में अब कैपिटुलेशन के संकेत दिख रहे हैं, यानी बाजार का सबसे खराब दौर शायद पीछे छूट चुका है. ऐसे समय में वोलैटिलिटी बढ़ती है और निवेशक घबराते हैं, लेकिन यही समय लंबी अवधि के निवेश के लिए अच्छा मौका माना जाता है.

3 महीने में करीब 14 फीसदी टूटा निफ्टी

पिछले 3 महीने में निफ्टी बुरी तरह टूटा है. इस दौरान निफ्टी करीब 14 फीसदी टूट चुका है. बिकवाली का आलम ऐसा रहा है कि निफ्टी का कोई सेक्टर इससे अछूता नहीं रहा है. मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों ने निवेशकों के पोर्टफोलियो को बुरी तरह से झटका दिया है. विदेशी निवेशकों की बिकवाली ने भी बाजार को तगड़ा झटका दिया है.

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