LIC आपके प्रीमियम का पैसा कहां लगाती है? सरकार ने बताया कैसे चुने जाते हैं शेयर; खोले निवेश के बड़े राज
लोकसभा में केंद्र सरकार ने बताया कि LIC पॉलिसीधारकों के प्रीमियम का निवेश तय नियमों और विस्तृत मूल्यांकन प्रक्रिया के आधार पर करती है. शेयरों का चयन कंपनी के फंडामेंटल्स, वित्तीय प्रदर्शन, भविष्य की संभावनाओं और ड्यू डिलिजेंस के आधार पर किया जाता है. निवेश प्रक्रिया SEBI, RBI और अन्य नियामकीय प्रावधानों के तहत संचालित होती है.
Highlights
- लोकसभा में सरकार ने बताया कि LIC पॉलिसीधारकों के प्रीमियम का निवेश तय इन्वेस्टमेंट फ्रेमवर्क, फंडामेंटल्स और ड्यू डिलिजेंस के आधार पर करती है.
- सरकार ने कहा कि LIC जिन कंपनियों में निवेश करती है, उनके नाम सार्वजनिक करना व्यावसायिक रूप से उचित नहीं होगा.
- LIC के निवेश पर SEBI, RBI और अन्य नियामकीय प्रावधानों के तहत निगरानी रखी जाती है.
LIC Premium Investment: Life Insurance Corporation (LIC) आपके द्वारा जमा किए गए प्रीमियम का पैसा किन कंपनियों में निवेश करती है और शेयर चुनने के लिए किन मानकों का पालन करती है? यह सवाल लंबे समय से पॉलिसीधारकों और निवेशकों के बीच चर्चा का विषय रहा है. अब केंद्र सरकार ने लोकसभा में इसका जवाब दिया है. हालांकि, सरकार ने यह साफ कर दिया कि LIC किन-किन कंपनियों में निवेश करती है, उनकी पूरी सूची सार्वजनिक नहीं की जाएगी.
लोकसभा में मिली जानकारी
यह जानकारी वित्त राज्य मंत्री पंकज चौधरी ने लोकसभा में सांसद राजीव राय के सवाल के लिखित जवाब में दी. यह खुलासा ऐसे समय में हुआ है, जब LIC OFS को लेकर बाजार में चर्चा तेज है और निवेशक कंपनी की निवेश रणनीति को समझना चाहते हैं.
कैसे चुनती है LIC निवेश के लिए कंपनियां
सरकार के मुताबिक, पिछले पांच वर्षों के दौरान LIC ने सूचीबद्ध कंपनियों में अपनी हिस्सेदारी समय-समय पर बढ़ाई और घटाई है. यह फैसला किसी एक आधार पर नहीं, बल्कि इंडिपेंडेंट इन्वेस्टमेंट असेसमेंट, मंजूर इन्वेस्टमेंट फ्रेमवर्क और संबंधित कंपनी के भविष्य के कारोबार की संभावनाओं को ध्यान में रखकर लिया जाता है.
सरकार ने बताया कि LIC निजी और सरकारी दोनों तरह की कंपनियों के शेयरों में निवेश करने से पहले कई पहलुओं का आकलन करती है. इनमें कंपनी के फंडामेंटल्स, वित्तीय प्रदर्शन, कारोबार की संभावनाएं, ड्यू डिलिजेंस, तय इक्विटी इन्वेस्टमेंट क्राइटेरिया और स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर (SOP) का पालन शामिल है.
कंपनियों के नाम बताने से क्यों किया इनकार
लोकसभा में पूछे गए सवाल के जवाब में सरकार ने कहा कि LIC जिन कंपनियों में निवेश करती है, उनकी पूरी सूची सार्वजनिक करना व्यावसायिक दृष्टि से उचित नहीं होगा. सरकार के अनुसार, यदि निवेश वाली कंपनियों के नाम सार्वजनिक किए जाते हैं, तो इससे LIC के वित्तीय हित प्रभावित हो सकते हैं. यही वजह है कि निवेश की पूरी सूची साझा नहीं की जा सकती.
कई नियमों के तहत होता है निवेश
सरकार ने यह भी स्पष्ट किया कि LIC का निवेश किसी एक नियम के तहत नहीं, बल्कि कई नियामकीय प्रावधानों के अनुरूप होता है. इसमें इंश्योरेंस एक्ट, 1938, LIC एक्ट, 1956, आईआरडीएआई के निवेश नियम, SEBI के दिशा-निर्देश, RBI के नियम और LIC इन्वेस्टमेंट कमेटी तथा बोर्ड से मंजूर आंतरिक निवेश नीतियां शामिल हैं. यानी LIC के निवेश निर्णय तय प्रक्रिया और नियामकीय निगरानी के तहत लिए जाते हैं.
निवेश पर कैसे रखी जाती है नजर
सरकार ने बताया कि LIC केवल निवेश ही नहीं करती, बल्कि अपने पूरे इन्वेस्टमेंट पोर्टफोलियो की नियमित समीक्षा भी करती है. इसके तहत कंपनी अपने निवेश से मिलने वाले रिटर्न की तुलना NSE 200 और NSE 100 जैसे प्रमुख बेंचमार्क इंडाइसेज से करती है. साथ ही एसेट एलोकेशन, सेक्टर एक्सपोजर और पोर्टफोलियो रीबैलेंसिंग की भी समय-समय पर समीक्षा की जाती है. यदि किसी शेयर में बड़ी गिरावट आती है, तो उसके लिए स्टॉप-लॉस मैकेनिज्म भी लागू किया जाता है, ताकि संभावित नुकसान को सीमित रखा जा सके.
कई स्तरों पर होती है निगरानी
सरकार के मुताबिक, LIC की निवेश प्रक्रिया पर कई स्तरों पर निगरानी रखी जाती है. कनकरेंट ऑडिटर्स निवेश से जुड़े नियंत्रण और प्रक्रियाओं की स्वतंत्र जांच करते हैं. इसके अलावा स्टैच्यूटरी ऑडिटर्स, सिस्टम ऑडिटर्स, इंटरनल फाइनेंशियल कंट्रोल (IFC) ऑडिटर्स और इन्फॉर्मेशन सिस्टम्स ऑडिटर्स भी समय-समय पर पूरी व्यवस्था की समीक्षा करते हैं.
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