शेयर बाजार, एफडी से भी ज्‍यादा रिटर्न देते हैं ग्रोथ फंड्स, लंबी अवधि में मिलता है ज्‍यादा मुनाफा

शेयर बाजार में उतार-चढ़ाव के बीच मिडकैप म्यूचुअल फंड निवेशकों को आकर्षित कर रहे हैं. निप्पॉन इंडिया, HDFC और कोटक मिडकैप फंड ने सात साल में शानदार रिटर्न दिया है. हालांकि, निवेश से पहले जोखिम समझना जरूरी है.

ग्रोथ फंड्स

Highlights

  • निप्पॉन इंडिया ग्रोथ मिडकैप फंड में ₹10,000 का निवेश करीब ₹4.3 करोड़ हुआ
  • सात साल में निप्पॉन इंडिया मिडकैप फंड ने 22.39% रिटर्न दिया
  • मिडकैप फंड में निवेश से पहले जोखिम और निवेश अवधि जरूर समझें

शेयर बाजार में इन दिनों उतार-चढ़ाव जारी है. कभी बाजार में तेजी आती है, तो कभी गिरावट निवेशकों की चिंता बढ़ा देती है. हालांकि, इस माहौल में भी मिडकैप म्यूचुअल फंड निवेशकों को आकर्षित कर रहे हैं. बाजार में आई गिरावट के बाद इन फंडों में निवेश के मौके तलाशे जा रहे हैं. बीते वर्षों में इन फंडों ने लंबी अवधि में शानदार रिटर्न दिया है. एक उदाहरण निप्पॉन इंडिया ग्रोथ मिडकैप फंड का है, जिसमें लॉन्च के समय लगाए गए 10,000 रुपये की वैल्यू बढ़कर करीब 4.3 करोड़ रुपये हो गई.

सितंबर में मिडकैप फंड में आया 6,940 करोड़ रुपये का निवेश

एसोसिएशन ऑफ म्यूचुअल फंड्स इन इंडिया (AMFI) के आंकड़ों के मुताबिक, सितंबर में मिडकैप म्यूचुअल फंड कैटेगरी में 6,940 करोड़ रुपये का निवेश आया. यह पिछले साल सितंबर के मुकाबले करीब 37 फीसदी ज्यादा है. मिडकैप शेयरों में हालिया गिरावट को निवेशकों की बढ़ती दिलचस्पी की एक वजह माना जा रहा है. हालांकि, शेयरों की कीमत गिरने का मतलब यह नहीं है कि वे हर स्थिति में सस्ते या बेहतर निवेश विकल्प बन गए हैं.

₹10,000 का निवेश कैसे बना ₹4.3 करोड़?

निप्पॉन इंडिया ग्रोथ मिडकैप फंड की शुरुआत साल 1995 में हुई थी. दिए गए आंकड़ों के मुताबिक, अगर किसी निवेशक ने फंड के लॉन्च के समय 10,000 रुपये का एकमुश्त निवेश किया होता, तो उसकी वैल्यू बढ़कर करीब 4.3 करोड़ रुपये हो सकती थी. इस दौरान फंड ने लगभग 22 फीसदी सालाना चक्रवृद्धि दर (CAGR) से रिटर्न दिया.

यह उदाहरण दिखाता है कि लंबी अवधि तक निवेश बनाए रखने से कंपाउंडिंग का फायदा मिल सकता है. हालांकि, यह बीते प्रदर्शन का उदाहरण है. इससे भविष्य में भी इसी तरह के रिटर्न की गारंटी नहीं मिलती.

ये आंकड़े संबंधित अवधि के रिटर्न को दर्शाते हैं. निवेश से पहले रिटर्न की गणना की अवधि, फंड की योजना और अन्य शर्तों की पुष्टि करना जरूरी है.

मिडकैप फंड में क्यों दिखती है ग्रोथ की संभावना?

मिडकैप फंड ऐसी कंपनियों में निवेश करते हैं, जो बाजार पूंजीकरण के लिहाज से बड़ी कंपनियों से नीचे और छोटी कंपनियों से ऊपर होती हैं. भारतीय शेयर बाजार में आम तौर पर 101वीं से 250वीं रैंक वाली कंपनियों को मिडकैप श्रेणी में रखा जाता है.

इन कंपनियों के पास कारोबार बढ़ाने और नए बाजारों में अपनी हिस्सेदारी मजबूत करने का मौका हो सकता है. मैन्युफैक्चरिंग, हेल्थकेयर, टेक्नोलॉजी और कंज्यूमर सेक्टर की कई कंपनियां इस श्रेणी में आती हैं. हालांकि, इनकी कमाई और शेयर की कीमतों में उतार-चढ़ाव भी ज्यादा हो सकता है.

5 साल में भी मिला 20% से ज्यादा रिटर्न

दिए गए आंकड़ों के मुताबिक, पांच साल की अवधि में निप्पॉन इंडिया ग्रोथ मिडकैप फंड ने 22.62 फीसदी रिटर्न दिया. वहीं, एडलवाइस मिडकैप फंड और HDFC मिडकैप फंड का रिटर्न क्रमशः 21.30 फीसदी और 21.12 फीसदी रहा.

मिडकैप कंपनियों को बढ़ते कारोबार और कमाई में सुधार का फायदा मिल सकता है. कुछ कंपनियां तेजी से विस्तार कर बड़ी कंपनियों की श्रेणी में पहुंच सकती हैं. यही संभावना निवेशकों और फंड मैनेजरों को आकर्षित करती है.

निवेश से पहले जोखिम समझना जरूरी

मिडकैप फंड लंबी अवधि में संपत्ति बनाने का विकल्प हो सकते हैं, लेकिन इनमें जोखिम भी अधिक रहता है. बाजार में गिरावट के दौरान इनकी वैल्यू तेजी से घट सकती है. इसलिए निवेश का फैसला केवल पुराने रिटर्न देखकर नहीं करना चाहिए. निवेश की अवधि, जोखिम उठाने की क्षमता, फंड के खर्च और पोर्टफोलियो को ध्यान में रखना जरूरी है. बीते वर्षों में मिला अच्छा रिटर्न भविष्य में भी मिलने की गारंटी नहीं है.

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