न हथियार बनाता है, न रॉकेट बेचता है… फिर भी है डिफेंस सेक्टर की असली ताकत, 1 महीने में दिया 16% का रिटर्न
MTAR Technologies एक प्रिसिजन इंजीनियरिंग कंपनी है. यह ISRO के लिए क्रायोजेनिक फ्यूल सिस्टम बनाती है. डिफेंस प्लेटफॉर्म के लिए खास एक्ट्यूएटर तैयार करती है. न्यूक्लियर पावर कॉरपोरेशन के लिए बेहद संवेदनशील पुर्जे बनाती है.
MTAR Technologies: शेयर बाजार में कई कंपनियां ऐसी होती हैं जो बड़े-बड़े विज्ञापन नहीं करती न ही उनके नाम रोजाना सुर्खियों में आते हैं. लेकिन देश की सबसे अहम प्रोजेक्ट में वही कंपनियां रीढ़ की हड्डी बनकर खड़ी होती हैं. MTAR Technologies ऐसी ही एक कंपनी है. यह न तो हथियार बेचती है, न रॉकेट लॉन्च करती है. फिर भी अगर इसके बनाए पुर्जों में जरा सी भी गलती हो जाए, तो पूरा मिशन रुक सकता है.
MTAR उन हिस्सों का निर्माण करती है जहां गलती को माफ नहीं किया जाता. यहां काम माइक्रॉन के स्तर पर होता है. यानी इंसानी बाल से भी कई गुना बारीक माप में. यही वजह है कि यह कंपनी आज भारत के स्पेस, डिफेंस, न्यूक्लियर और ग्रीन एनर्जी प्रोग्राम का अहम हिस्सा बन चुकी है. असली सवाल यह है कि क्या यह कंपनी लंबे समय तक अपनी मजबूती बनाए रख पाएगी.
MTAR क्या करती है
MTAR Technologies एक प्रिसिजन इंजीनियरिंग कंपनी है. यह ISRO के लिए क्रायोजेनिक फ्यूल सिस्टम बनाती है. डिफेंस प्लेटफॉर्म के लिए खास एक्ट्यूएटर तैयार करती है. न्यूक्लियर पावर कॉरपोरेशन के लिए बेहद संवेदनशील पुर्जे बनाती है. इसके अलावा यह Bloom Energy जैसी ग्लोबल ग्रीन एनर्जी कंपनियों के लिए भी हाई क्वालिटी कंपोनेंट सप्लाई करती है. ये सभी काम एक दिन में नहीं मिले हैं. इन प्रोजेक्ट्स के पीछे सालों का अनुभव, जांच और भरोसा है.
माइक्रॉन का किला
MTAR की सबसे बड़ी ताकत इसकी सटीकता है. यहां काम सामान्य मशीनों से नहीं होता. कई बार महीनों की मेहनत के बाद एक सही पुर्जा तैयार होता है. कुछ हिस्सों की माप माइक्रॉन में होती है. यही कठिनाई MTAR की सबसे बड़ी दीवार है. बीते कुछ वर्षों में कंपनी की आय करीब 28 प्रतिशत की दर से बढ़ी है. शेयर की कीमत भी करीब 18 प्रतिशत की दर से बढ़ी है. ऑपरेटिंग मार्जिन 15 से 20 प्रतिशत के बीच बना हुआ है. कर्ज भी बहुत कम है.
डिफेंस की ओर बढ़ता कदम
पहले MTAR की कमाई का बड़ा हिस्सा स्पेस और न्यूक्लियर प्रोग्राम से आता था. लेकिन अब धीरे-धीरे डिफेंस सेक्टर की हिस्सेदारी बढ़ रही है. यह बदलाव किसी बड़े ऐलान से नहीं, बल्कि लगातार मिलने वाले छोटे लेकिन लंबे समय वाले ऑर्डर से हो रहा है. डिफेंस सेक्टर में एक बार सप्लायर चुन लिया जाए, तो उसे बदला नहीं जाता. समय के साथ ऑर्डर बढ़ते हैं और काम गहराता है. यही MTAR के लिए बड़ी बात है.
Bloom Energy का असर
एक समय ऐसा था जब Bloom Energy से आने वाली कमाई MTAR पर बहुत ज्यादा निर्भर थी. इससे निवेशकों को डर भी लगता था. लेकिन Bloom के साथ काम करने से MTAR ने इंटरनेशनल क्वालिटी और नियमों का अनुभव हासिल किया. इसका फायदा स्पेस, डिफेंस और न्यूक्लियर सभी क्षेत्रों में मिला. अब कंपनी की कमाई धीरे-धीरे और क्षेत्रों में भी बंट रही है.
डीपटेक की असली ताकत
MTAR की असली तकनीक कागजों में नहीं, बल्कि लोगों के अनुभव और प्रक्रियाओं में छुपी है. कंपनी खास धातुओं जैसे टाइटेनियम और सुपर अलॉय पर काम करती है. यहां हर प्रक्रिया अपने आप में ज्ञान है. अब कंपनी सिर्फ पुर्जे नहीं, बल्कि पूरे सब सिस्टम देने की ओर बढ़ रही है. इससे काम की कीमत और जिम्मेदारी दोनों बढ़ती हैं.
आगे की राह
हाल के तिमाही नतीजों में कुछ देरी जरूर दिखी है. लेकिन कंपनी का ऑर्डर बुक मजबूत है. आने वाले समय में निवेश भी बढ़ाया जा रहा है. MTAR कोई तेज रफ्तार वाली कहानी नहीं है. यह एक धैर्य की कहानी है. यहां भरोसा धीरे-धीरे बनता है. ऐसे सेक्टर में टिके रहना ही सबसे बड़ी जीत होती है. शोर से दूर रहने वाली ऐसी कंपनियां समय के साथ अपनी असली कीमत दिखाती हैं. यही MTAR Technologies की असली पहचान है.
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