100 रुपये का शेयर पहुंचा 240 रुपये के पार, फिर भी मुकुल अग्रवाल ने घटाई हिस्सेदारी; जानें क्या है वजह
दिग्गज निवेशक Mukul Agrawal ने Surya Roshni Ltd. में अपनी हिस्सेदारी लगातार घटाई है. जून 2026 के शेयरहोल्डिंग पैटर्न में पहली बार उनकी हिस्सेदारी 1 फीसदी से नीचे आ गई है. हालांकि, करीब 100 रुपये के स्तर पर किया गया उनका निवेश अब लगभग 2.5 गुना रिटर्न दे चुका है.
Mukul Agrawal: शेयर बाजार के दिग्गज निवेशकों के पोर्टफोलियो पर निवेशकों की हमेशा नजर रहती है. इसकी वजह यह है कि उनके निवेश और निकासी के फैसले अक्सर किसी कंपनी के भविष्य को लेकर अहम संकेत देते हैं. इसी कड़ी में दिग्गज निवेशक मुकुल अग्रवाल ने Surya Roshni Ltd. में पिछले कई तिमाहियों से लगातार अपनी हिस्सेदारी घटाई है. जून 2026 तिमाही के शेयरहोल्डिंग पैटर्न में पहली बार उनकी हिस्सेदारी 1 फीसदी से नीचे चली गई है.
क्या करती है कंपनी
करीब 5,405 करोड़ रुपये के मार्केट कैपिटलाइजेशन वाली Surya Roshni Ltd. के शेयर शुक्रवार को 246.65 रुपये पर बंद हुए. कंपनी स्टील पाइप्स, स्टील स्ट्रिप्स, लाइटिंग प्रोडक्ट्स और कंज्यूमर ड्यूरेबल्स के कारोबार में सक्रिय है. कंपनी जीरो डेट है और उसके पास नेट कैश सरप्लस भी है. इसके अलावा, कंपनी भारत के साथ-साथ नॉर्थ अमेरिका सहित कई अंतरराष्ट्रीय बाजारों में भी कारोबार करती है.
2022 में शुरू किया था निवेश
मुकुल अग्रवाल ने पहली बार सितंबर 2022 में Surya Roshni Ltd. में निवेश किया था. उस समय उनके पास कंपनी के 7.06 लाख शेयर थे, जो कुल हिस्सेदारी का 1.30 फीसदी था. उस समय शेयर का भाव करीब 100 रुपये था. इसके बाद उन्होंने लगातार अपनी हिस्सेदारी बढ़ाई. दिसंबर 2022 तक उनकी हिस्सेदारी बढ़कर 1.71 फीसदी हो गई और मार्च 2023 में यह 2.02 फीसदी तक पहुंच गई.
फिर शुरू हुई लगातार प्रॉफिट बुकिंग
Trade Brains की रिपोर्ट के मुताबिक, मार्च 2023 के बाद तस्वीर बदलनी शुरू हुई. जून 2023 में उनकी हिस्सेदारी घटकर 1.84 फीसदी रह गई, जबकि सितंबर 2023 तक यह 1.47 फीसदी पर आ गई. इसके बाद भी उन्होंने धीरे-धीरे हिस्सेदारी कम करना जारी रखा.
सितंबर 2024 तक उनकी हिस्सेदारी 1.01 फीसदी रह गई. इसके बाद मार्च 2026 तक उन्होंने इस स्तर को बनाए रखा, लेकिन जून 2026 के शेयरहोल्डिंग पैटर्न में उनका नाम सार्वजनिक शेयरधारकों की सूची में नहीं दिखा. इसका मतलब है कि उनकी हिस्सेदारी अब 1 फीसदी से कम हो चुकी है.
हालांकि, हिस्सेदारी घटाने के बावजूद उनका निवेश बेहद सफल रहा. उन्होंने करीब 100 रुपये के स्तर पर निवेश किया था और अब शेयर करीब 250 रुपये के आसपास कारोबार कर रहा है. यानी उनके निवेश पर लगभग 2.5 गुना रिटर्न मिल चुका है.
क्या प्रॉफिट बुकिंग रही सबसे बड़ी वजह?
विशेषज्ञों का मानना है कि मुकुल अग्रवाल द्वारा हिस्सेदारी घटाने की सबसे बड़ी वजह प्रॉफिट बुकिंग हो सकती है. किसी शेयर में कई वर्षों तक शानदार रिटर्न मिलने के बाद दिग्गज निवेशक अक्सर धीरे-धीरे अपनी हिस्सेदारी कम करते हैं, ताकि मुनाफा सुरक्षित किया जा सके. Surya Roshni Ltd. में भी उन्होंने एक साथ बड़ी बिक्री करने के बजाय कई तिमाहियों में धीरे-धीरे हिस्सेदारी घटाई, जो इसी रणनीति की ओर इशारा करता है.
कारोबार में भी दिखीं चुनौतियां
प्रॉफिट बुकिंग के अलावा कंपनी के हालिया प्रदर्शन ने भी निवेशकों की चिंता बढ़ाई है. कंपनी के स्टील पाइप्स और स्टील स्ट्रिप्स कारोबार, जो उसके कुल रेवेन्यू का बड़ा हिस्सा है, इसमें दबाव देखने को मिला है. Q4 FY26 में इस सेगमेंट का रेवेन्यू 1,662 करोड़ रुपये रहा, जबकि एक साल पहले यह 1,688 करोड़ रुपये था. वहीं, EBITDA प्रति टन 6,708 रुपये से घटकर 5,121 रुपये रह गया. पूरे वित्त वर्ष FY26 में भी EBITDA प्रति टन 5,392 रुपये से घटकर 4,553 रुपये पर आ गया.
मिडिल ईस्ट संकट का भी पड़ा असर
कंपनी के मुताबिक, फरवरी 2026 में शुरू हुए मिडिल ईस्ट क्राइसिस का उसके एक्सपोर्ट बिजनेस पर बड़ा असर पड़ा. संकट के कारण एक्सपोर्ट सप्लाई लगभग ठप हो गई और करीब 12,000 टन तैयार माल भेजा नहीं जा सका. इसके अलावा, रॉ मैटेरियल की उपलब्धता प्रभावित होने से कंपनी के वॉल्यूम और मार्जिन दोनों पर दबाव बना है.
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डिस्क्लेमर: Money9live किसी स्टॉक, म्यूचुअल फंड, आईपीओ में निवेश की सलाह नहीं देता है. यहां पर केवल स्टॉक्स की जानकारी दी गई है. निवेश से पहले अपने वित्तीय सलाहकार की राय जरूर लें.
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