बाजार में तेजी के बीच क्यों टूटा BSE का शेयर? इस साल 36 फीसदी उछल चुका है स्टॉक
BSE के शेयर में आई 3 फीसदी की गिरावट ने बाजार का ध्यान अपनी ओर खींचा है. सेक्टोरल दबाव और प्रॉफिट बुकिंग को इसकी मुख्य वजह माना जा रहा है. हालांकि, इस साल स्टॉक करीब 36 फीसदी का रिटर्न दे चुका है. कंपनी IPO Book Building, Offer for Sale, New Bond Platform और डेरिवेटिव कारोबार के विस्तार की रणनीति पर काम कर रही है.
BSE Share Price: भारतीय शेयर बाजार में शुक्रवार को शानदार तेजी देखने को मिली. मजबूत पहली तिमाही के नतीजों, आईटी शेयरों में खरीदारी और पॉजिटिव सेंटिमेंट के चलते BSE Sensex और NSE Nifty करीब 1 फीसदी तक चढ़ गए. शुक्रवार को Sensex 964 अंक की बढ़त के साथ 78,151 और Nifty 261 अंक की तेजी के साथ 24,334 के स्तर पर बंद हुआ. हालांकि, बाजार में इस तेजी के बीच BSE Ltd. का शेयर निवेशकों का ध्यान अपनी ओर खींचता नजर आया. कंपनी का शेयर करीब 3 फीसदी टूट गया, जिसके बाद निवेशकों के बीच यह सवाल उठने लगा कि आखिर इस गिरावट की वजह क्या है.
सेक्टोरल कमजोरी बनी बड़ी वजह
विश्लेषकों के मुताबिक, BSE के शेयर में आई कमजोरी के पीछे सबसे बड़ा कारण सेक्टोरल दबाव रहा. कारोबार के दौरान Nifty Midcap 100 और Nifty Midcap 50 इंडेक्स करीब 0.4 फीसदी तक फिसल गए. चूंकि BSE इन इंडेक्स का हिस्सा है, इसलिए सेक्टर में आई व्यापक बिकवाली का असर कंपनी के शेयर पर भी देखने को मिला. ऐसे में गिरावट किसी कंपनी-विशेष की नकारात्मक खबर की बजाय पूरे सेक्टर में बनी कमजोरी का परिणाम मानी जा रही है.
प्रॉफिट बुकिंग ने भी बढ़ाया दबाव
मार्केट एक्सपर्ट्स का मानना है कि प्रॉफिट बुकिंग भी इस गिरावट की एक अहम वजह हो सकती है. BSE का शेयर इस साल अब तक करीब 36 फीसदी का रिटर्न दे चुका है. ऐसे में हालिया तेजी के बाद कई निवेशकों ने मुनाफावसूली करना उचित समझा. यही वजह रही कि बाजार में तेजी के बावजूद इस शेयर पर बिकवाली का दबाव देखने को मिला.
विशेषज्ञों का कहना है कि जब किसी शेयर में कम समय में तेज तेजी आती है, तो निवेशक अक्सर अपने मुनाफे को सुरक्षित करने के लिए शेयर बेचते हैं. इसे सामान्य बाजार व्यवहार माना जाता है और इसका मतलब यह नहीं होता कि कंपनी के कारोबार में कोई मूलभूत कमजोरी आ गई है.
आगे क्या है कंपनी की योजना
भविष्य की रणनीति को लेकर BSE कई नए क्षेत्रों पर फोकस कर रही है. कंपनी अपने e-Platform कारोबार को मजबूत बनाने की दिशा में काम कर रही है. इसके तहत IPO Book Building, Offer to Buy, Offer for Sale और New Bond Platform जैसी सर्विस का विस्तार किया जाएगा.
इसके अलावा, कंपनी सप्ताह के अलग-अलग दिनों में ट्रेडिंग वॉल्यूम को अधिक संतुलित बनाने और विशेष रूप से Bank Index में मासिक डेरिवेटिव कॉन्ट्रैक्ट्स को बढ़ावा देने की योजना पर काम कर रही है. कंपनी का उद्देश्य बाजार में अधिक भागीदारी बढ़ाना और लिक्विडिटी को मजबूत करना है.
FPI और बड़े संस्थागत निवेशकों पर रहेगा फोकस
कंपनी का Management आने वाले समय में Foreign Portfolio Investors (FPIs) और बड़े संस्थागत निवेशकों की भागीदारी बढ़ाने पर विशेष जोर दे रहा है. खासकर लंबे समय वाले डेरिवेटिव कॉन्ट्रैक्ट्स में ट्रेडिंग वॉल्यूम बढ़ाने की रणनीति तैयार की जा रही है. कंपनी का मानना है कि इससे भविष्य में कारोबार का दायरा और मजबूत होगा.
हालिया प्रदर्शन कैसा रहा
अगर शेयर के प्रदर्शन पर नजर डालें, तो पिछले पांच कारोबारी सत्रों में BSE का शेयर करीब 6 फीसदी तक टूट चुका है. हालांकि, लंबी अवधि में इसकी तस्वीर अभी भी मजबूत बनी हुई है. पिछले एक साल में इस शेयर ने करीब 46 फीसदी का रिटर्न दिया है.
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डिस्क्लेमर: Money9live किसी स्टॉक, म्यूचुअल फंड, आईपीओ में निवेश की सलाह नहीं देता है. यहां पर केवल स्टॉक्स की जानकारी दी गई है. निवेश से पहले अपने वित्तीय सलाहकार की राय जरूर लें.
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