Mukul Agarwal vs Ashish Kacholia: भारत के न्यूक्लियर सेक्टर में बड़ा दांव, कौन बनेगा 2 लाख करोड़ के मौके का किंग

सरकार का लक्ष्य 2047 तक 100 गीगावाट न्यूक्लियर पावर हासिल करना है. इसके लिए भारी निवेश, आधुनिक तकनीक और बड़ी कंपनियों की जरूरत होगी. माना जा रहा है कि यह पूरा सेक्टर करीब 2 लाख करोड़ रुपये का बड़ा मौका बन सकता है. ऐसे में शेयर बाजार के बड़े निवेशक भी इस सेक्टर पर नजर बनाए हुए हैं.

mukul agrawal and kacholia stake in vasa denticity share Image Credit: money9 live

Mukul Agrawal vs Ashish Kacholia: भारत में न्यूक्लियर सेक्टर में अब बड़ा बदलाव देखने को मिल रहा है. कई सालों तक यह सेक्टर पूरी तरह सरकार के कंट्रोल में था और इसमें निजी कंपनियों की एंट्री नहीं थी. लेकिन साल 2025 के आखिर में सरकार ने SHANTI बिल लाकर इस सेक्टर के दरवाजे खोल दिए. अब निजी कंपनियां भी न्यूक्लियर प्रोजेक्ट्स में हिस्सा ले सकेंगी. सरकार का लक्ष्य 2047 तक 100 गीगावाट न्यूक्लियर पावर हासिल करना है. इसके लिए भारी निवेश, आधुनिक तकनीक और बड़ी कंपनियों की जरूरत होगी.

माना जा रहा है कि यह पूरा सेक्टर करीब 2 लाख करोड़ रुपये का बड़ा मौका बन सकता है. ऐसे में शेयर बाजार के बड़े निवेशक भी इस सेक्टर पर नजर बनाए हुए हैं. खासकर दो नाम सबसे ज्यादा चर्चा में हैं, मुकुल अग्रवाल और आशीष कचोलिया. दोनों की निवेश रणनीति अलग है, लेकिन दोनों इस नए मौके का फायदा उठाने की कोशिश कर रहे हैं.

न्यूक्लियर सेक्टर में बड़ा बदलाव

SHANTI बिल के आने के बाद न्यूक्लियर सेक्टर में निजी कंपनियों की एंट्री आसान हो गई है. इससे निवेश बढ़ेगा और नए प्रोजेक्ट्स तेजी से शुरू होंगे. भारत को 30 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बनने के लिए लगातार बिजली की जरूरत होगी. सोलर और विंड एनर्जी के साथ न्यूक्लियर पावर भी जरूरी होगी क्योंकि यह लगातार बिजली दे सकती है.

मुकुल अग्रवाल की रणनीति

मुकुल अग्रवाल बड़े प्रोजेक्ट्स और इंफ्रास्ट्रक्चर कंपनियों में निवेश के लिए जाने जाते हैं. उनका फोकस उन कंपनियों पर है जो न्यूक्लियर प्लांट बनाने में अहम भूमिका निभाती हैं. उन्होंने Hindustan Construction Company में करीब 1.7 प्रतिशत हिस्सेदारी खरीदी है. यह कंपनी पहले से ही भारत के कई न्यूक्लियर प्रोजेक्ट्स में काम कर चुकी है. इसके अलावा PTC Industries, WPIL और KRN Heat Exchanger जैसी कंपनियां भी उनके पोर्टफोलियो में हैं, जो न्यूक्लियर प्लांट के लिए जरूरी मशीन और तकनीक बनाती हैं.

कंपनी का नामहोल्डिंग (%)कंपनी क्या करती है
Hindustan Construction Company (HCC)1.7%न्यूक्लियर, हाइड्रो, इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट बनाती है.
PTC Industries1.07%हाई-प्रिसिजन मेटल और सुपरअलॉय पार्ट्स बनाती है.
WPIL Ltd1.54%न्यूक्लियर प्लांट के लिए कूलिंग पंप बनाती है.
KRN Heat Exchanger1.61%हीट ट्रांसफर और कूलिंग सिस्टम बनाती है.

आशीष कचोलिया की रणनीति

आशीष कचोलिया का तरीका थोड़ा अलग है. वह छोटी लेकिन खास तकनीक वाली कंपनियों में निवेश करते हैं. उनका फोकस उन कंपनियों पर है जो न्यूक्लियर सेक्टर के लिए जरूरी पार्ट्स और सेवाएं देती हैं. उनके पोर्टफोलियो में Balu Forge, Aeroflex Industries, TechEra Engineering और Knowledge Marine जैसी कंपनियां शामिल हैं.

ये कंपनियां न्यूक्लियर प्लांट के छोटे लेकिन जरूरी हिस्से बनाती हैं. इसके अलावा Walchandnagar Industries भी उनके पोर्टफोलियो में है, जो न्यूक्लियर रिएक्टर के बड़े हिस्से बनाती है. कंपनी के वित्तीय आंकड़े कमजोर रहे हैं, लेकिन हाल में सुधार के संकेत मिले हैं और ऑर्डर बुक मजबूत हो रही है.

कंपनी का नामहोल्डिंग (%)कंपनी क्या करती है
Balu Forge Industries2.87%टर्बाइन और हाई-प्रिसिजन पार्ट्स बनाती है.
Aeroflex Industries2.01%स्टील होज और फ्लेक्सिबल पाइप बनाती है.
TechEra Engineering4.83%न्यूक्लियर ग्रेड टूल्स और मशीनिंग.
Knowledge Marine2.89%मरीन और ड्रेजिंग सर्विस (कोस्टल प्लांट सपोर्ट).
Walchandnagar Industries2%न्यूक्लियर रिएक्टर और भारी उपकरण बनाती है.

किसकी रणनीति बेहतर

मुकुल अग्रवाल बड़े प्रोजेक्ट्स और इंफ्रास्ट्रक्चर पर दांव लगा रहे हैं. अगर देश में बड़े स्तर पर न्यूक्लियर प्लांट बनते हैं, तो उन्हें फायदा मिल सकता है. वहीं आशीष कचोलिया छोटी और तकनीकी कंपनियों पर भरोसा कर रहे हैं. इन कंपनियों को लंबे समय तक लगातार काम मिल सकता है, जिससे स्थिर कमाई हो सकती है.

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डिस्क्लेमर: Money9live किसी स्टॉक, म्यूचुअल फंड, आईपीओ में निवेश की सलाह नहीं देता है. यहां पर केवल स्टॉक्स की जानकारी दी गई है. निवेश से पहले अपने वित्तीय सलाहकार की राय जरूर लें.

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