हाई फ्रीक्वेंसी ट्रेडर्स के लिए खुशखबरी! NSE ला रहा है नैनोसेकंड सिस्टम, 1000 गुना बढ़ जाएगी स्पीड

बाजार में लगातार बढ़ रही ट्रेडिंग एक्टिविटी को देखते हुए यह अपग्रेड काफी अहम माना जा रहा है. ज्यादा स्पीड और कम लेटेंसी का मतलब है कि बड़े वॉल्यूम के बीच भी ऑर्डर तेजी से प्रोसेस होंगे. खासकर हाई फ्रीक्वेंसी और इंस्टीट्यूशनल ट्रेडर्स को इसका सीधा फायदा मिल सकता है.

NSE Image Credit: TV9 Bharatvarsh

नेशनल स्टॉक एक्सचेंज यानी NSE 11 अप्रैल से अपने सिस्टम की स्पीड को नई ऊंचाई पर ले जाने जा रहा है. NSE के मैनेजिंग डायरेक्टर और सीईओ आशीष कुमार चौहान ने बताया कि एक्सचेंज का रिस्पांस टाइम अब माइक्रोसेकंड से घटाकर नैनोसेकंड कर दिया जाएगा. इससे एक्सचेंज करीब 10 करोड़ ट्रांजेक्शन प्रति सेकेंड संभाल सकेगा. एक ही सेकेंड में लगभग 10 करोड़ खरीद-फरोख्त के ऑर्डर प्रोसेस किए जा सकेंगे. फिलहाल NSE का रिस्पांस टाइम करीब 100 माइक्रोसेकंड है. इस स्पीड पर एक्सचेंज लगभग 50 से 60 लाख ट्रांजेक्शन प्रति सेकेंड प्रोसेस कर पाता है. चौहान के मुताबिक, नैनोसेकंड रिस्पांस के बाद स्पीड लगभग 1000 गुना तक बढ़ जाएगी. उन्होंने कहा कि अब बाजार को रियल टाइम फाइनेंस का असली अनुभव मिलेगा.

ट्रेडिंग पर क्या होगा असर

बाजार में लगातार बढ़ रही ट्रेडिंग एक्टिविटी को देखते हुए यह अपग्रेड काफी अहम माना जा रहा है. ज्यादा स्पीड और कम लेटेंसी का मतलब है कि बड़े वॉल्यूम के बीच भी ऑर्डर तेजी से प्रोसेस होंगे. खासकर हाई फ्रीक्वेंसी और इंस्टीट्यूशनल ट्रेडर्स को इसका सीधा फायदा मिल सकता है. हालांकि चौहान ने यह भी चेतावनी दी कि स्पीड जितनी बढ़ती है, साइबर रिस्क भी उतना ही बढ़ता है. अगर साइबर सिक्योरिटी मजबूत नहीं हुई तो पूरा सिस्टम रुक सकता है.

इन्फ्रास्ट्रक्चर भी होगा मजबूत

बढ़ती मांग को देखते हुए NSE अपना कोलोकेशन इन्फ्रास्ट्रक्चर भी बढ़ा रहा है. अभी एक्सचेंज के पास 2000 से ज्यादा कोलो रैक हैं, जिन्हें बढ़ाकर करीब 4500 रैक तक ले जाया जा सकता है. कोलोकेशन सर्विस में ट्रेडिंग मेंबर अपने सर्वर एक्सचेंज के डाटा सेंटर के अंदर ही लगाते हैं. इससे नेटवर्क लेटेंसी कम होती है और मार्केट डाटा व ऑर्डर एग्जीक्यूशन बेहद तेज हो जाता है. इसका सबसे ज्यादा इस्तेमाल हाई फ्रीक्वेंसी और बड़े संस्थागत निवेशक करते हैं.

नए प्रोडक्ट्स पर भी फोकस

NSE नए एसेट क्लास में भी एंट्री बढ़ा रहा है. बिजली वायदा और गोल्ड वायदा जैसे प्रोडक्ट्स पर काम चल रहा है. 10 ग्राम गोल्ड फ्यूचर्स को मार्केट रेगुलेटर से मंजूरी मिल चुकी है और जल्द ही यह ट्रेडिंग के लिए उपलब्ध होगा. इसके अलावा कॉन्ट्रैक्ट फॉर डिफरेंस यानी सीएफडी पर भी काम जारी है. चौहान का कहना है कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के इस्तेमाल से वेंडर्स कम लागत में ज्यादा असरदार समाधान दे पाएंगे.