नितिन कामथ का बड़ा खुलासा, Zerodha ने 9 साल में छोड़ी ₹25620 करोड़ की कमाई; ग्राहकों के लिए लिया बड़ा फैसला!
Zerodha के संस्थापक नितिन कामथ ने खुलासा किया है कि कंपनी ने पिछले 9 वर्षों में करीब 25,620 करोड़ रुपये की संभावित कमाई छोड़ दी. Zerodha ने ग्राहकों से अतिरिक्त शुल्क लेने के बजाय जीरो ब्रोकरेज मॉडल को प्राथमिकता दी. कंपनी आज भी इक्विटी डिलीवरी ट्रेड्स पर जीरो ब्रोकरेज देने वाली चुनिंदा ब्रोकर्स में शामिल है. कामथ के मुताबिक, कस्टमर ट्रस्ट और पारदर्शिता कंपनी की सबसे बड़ी ताकत है.

Zerodha Zero Brokerage: भारत के ऑनलाइन ब्रोकिंग सेक्टर में बड़ा नाम बन चुकी Zerodha एक बार फिर चर्चा में है. इस बार वजह कंपनी की कमाई नहीं, बल्कि ग्राहकों के हित में लिया गया ऐसा फैसला है, जिसने कंपनी को पिछले नौ वर्षों में करीब ₹25,620 करोड़ के संभावित राजस्व से दूर रखा है. Nithin Kamath ने बताया कि Zerodha ने ग्राहकों से अतिरिक्त शुल्क वसूलने के आसान रास्ते को छोड़कर भरोसे और पारदर्शिता का कठिन रास्ता चुना. इसी वजह से कंपनी आज भी इक्विटी डिलीवरी ट्रेड्स पर जीरो ब्रोकरेज देने वाली चुनिंदा ब्रोकर्स में शामिल है.
सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर दी जानकारी
नितिन कामथ ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर कहा कि अगर कंपनी हर इक्विटी डिलीवरी ट्रेड पर सिर्फ 0.3 फीसदी ब्रोकरेज फी भी लेती, तो पिछले नौ सालों में हजारों करोड़ रुपये की अतिरिक्त कमाई हो सकती थी. वर्तमान में कई फुल-सर्विस ब्रोकर्स इक्विटी डिलीवरी ट्रेड पर 0.3 फीसदी से 0.5 फीसदी तक शुल्क लेते हैं. इसके बावजूद Zerodha ने अपनी शुरुआती नीति नहीं बदली और ग्राहकों को कम लागत पर निवेश की सुविधा दी.
क्यों नहीं लिया अतिरिक्त शुल्क?
नितिन कामथ के मुताबिक, कंपनी की शुरुआत से ही एक स्पष्ट सोच रही है- ग्राहकों के साथ वही व्यवहार करो, जो आप अपने लिए चाहते हैं. इसी वजह से Zerodha ने कभी भी ग्राहकों को ज्यादा ट्रेडिंग के लिए उकसाने, अनावश्यक फाइनेंशियल प्रोडक्ट्स बेचने, क्रॉस-सेलिंग करने या प्लेटफॉर्म पर एडवरटाइजिंग से कमाई बढ़ाने जैसे रास्ते नहीं अपनाए. उन्होंने कहा कि ब्रोकिंग बिजनेस खुद काफी चुनौतीपूर्ण है, क्योंकि इसकी आय शेयर बाजार के प्रदर्शन और रेगुलेटरी बदलावों पर निर्भर करती है. इसके बावजूद कंपनी ने ग्राहकों से अतिरिक्त कमाई के मौके छोड़ दिए.
ग्राहक भरोसा बना सबसे बड़ी ताकत
नितिन कामथ ने बताया कि Zerodha की 25 फीसदी से 30 फीसदी नई अकाउंट्स आज भी रेफरल्स के जरिए आते हैं. यानी मौजूदा ग्राहक प्लेटफॉर्म से संतुष्ट हैं और अपने दोस्तों व परिवार को इसकी सलाह देते हैं. उनके मुताबिक, यह किसी भी फाइनेंशियल मैट्रिक से ज्यादा महत्वपूर्ण है. उन्होंने कहा कि छोटी-छोटी बदलावों के जरिए ज्यादा कमाई करना आसान था, लेकिन कंपनी ने हमेशा कस्टमर फर्स्ट अप्रोच को प्राथमिकता दी. यही वजह है कि आज Zerodha को भरोसेमंद ब्रांड माना जाता है.
जीरो ब्रोकरेज मॉडल कैसे कायम रखा?
नितिन कामथ ने माना कि Zerodha के बूटस्ट्रैप्ड होने से कंपनी को यह रास्ता चुनने में मदद मिली. कंपनी पर किसी बाहरी निवेशक का दबाव नहीं था, न ही रेवेन्यू टारगेट्स पूरा करने का तनाव. इसी आजादी की वजह से Zerodha ग्राहकों को स्पैम नहीं करती, उनके व्यवहार को ट्रैक नहीं करती और अलग-अलग ग्राहकों से अलग प्राइसिंग नहीं लेती. उन्होंने कहा कि अगर कंपनी एडवरटाइजिंग और इंसेंटिव्स पर भारी खर्च करती, तो फिर उसकी भरपाई ग्राहकों से ही करनी पड़ती. ऐसे में समझौते शुरू हो जाते.
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