सरकार का मेगा मर्जर प्लान बढ़ा आगे… PFC में होगा REC का विलय, शेयरधारकों की बढ़ी नजर
पावर सेक्टर की दो बड़ी कंपनियां Power Finance Corporation और REC Limited अब एक होने की दिशा में आगे बढ़ गई हैं. दोनों कंपनियों के बोर्ड ने मर्जर प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है. अब इस योजना को आगे बढ़ाने के लिए राष्ट्रपति की मंजूरी मांगी जाएगी.
PFC and REC merger: सरकारी पावर सेक्टर की दो बड़ी कंपनियां Power Finance Corporation और REC Limited अब एक होने की दिशा में आगे बढ़ गई हैं. दोनों कंपनियों के बोर्ड ने मर्जर प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है. अब इस योजना को आगे बढ़ाने के लिए राष्ट्रपति की मंजूरी मांगी जाएगी.
सरकार पहले ही बजट में इन दोनों कंपनियों के मर्जर का ऐलान कर चुकी थी. अब बोर्ड की मंजूरी मिलने के बाद इस प्रक्रिया ने एक बड़ा कदम आगे बढ़ा लिया है. अगर यह मर्जर पूरा होता है, तो देश में पावर सेक्टर फाइनेंसिंग की एक बहुत बड़ी सरकारी कंपनी तैयार होगी.
REC का PFC में होगा विलय
स्टॉक एक्सचेंज फाइलिंग के मुताबिक REC Limited का विलय Power Finance Corporation में किया जाएगा. मर्जर पूरा होने के बाद REC अलग कंपनी के तौर पर मौजूद नहीं रहेगी. उसकी सभी संपत्तियां और देनदारियां PFC के पास चली जाएंगी. यह मर्जर Companies Act 2013 की धारा 230 से 232 के तहत किया जाएगा.
अभी तय नहीं हुआ शेयर एक्सचेंज रेशियो
- कंपनियों ने बताया कि अभी शेयर एक्सचेंज रेशियो तय नहीं हुआ है.
- इसके लिए वैल्यूएशन एक्सपर्ट नियुक्त किए जाएंगे, जो यह तय करेंगे कि REC के शेयरधारकों को PFC के कितने शेयर मिलेंगे.
- फिलहाल कंपनियों ने मर्जर पूरा होने की कोई निश्चित तारीख नहीं बताई है.
- हालांकि अधिकारियों के मुताबिक इस मर्जर को 1 अप्रैल 2027 से लागू करने का लक्ष्य रखा गया है.
सरकार की कितनी हिस्सेदारी
सरकार की Power Finance Corporation में करीब 56 फीसदी हिस्सेदारी है. वहीं REC Limited में सरकार की हिस्सेदारी करीब 52.6 फीसदी है. बाकी हिस्सेदारी आम निवेशकों और संस्थागत निवेशकों के पास है. PFC ने अपनी फाइलिंग में कहा है कि जरूरत पड़ने पर सरकार पूंजी निवेश कर सकती है या नए सिक्योरिटीज जारी किए जा सकते हैं. इसका मकसद यह सुनिश्चित करना होगा कि मर्जर के बाद भी कंपनी सरकारी कंपनी का दर्जा बनाए रखे.
निवेशकों के लिए क्या है मतलब
- विशेषज्ञों का मानना है कि इस मर्जर से पावर सेक्टर फाइनेंसिंग में कंपनी की ताकत और बढ़ सकती है.
- दोनों कंपनियों के संसाधन और नेटवर्क एक साथ आने से बड़े प्रोजेक्ट्स को फाइनेंस करने में मदद मिल सकती है.
- हालांकि निवेशकों की नजर अब शेयर एक्सचेंज रेशियो, मर्जर की टाइमलाइन और नई मैनेजमेंट संरचना पर बनी रहेगी.
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डिस्क्लेमर: Money9live किसी स्टॉक, म्यूचुअल फंड, आईपीओ में निवेश की सलाह नहीं देता है. यहां पर केवल स्टॉक्स की जानकारी दी गई है. निवेश से पहले अपने वित्तीय सलाहकार की राय जरूर लें.
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