CAS नियम में बदलाव की तैयारी? डेरिवेटिव्स की कीमत के लिए 30 मिनट का VWAP इस्तेमाल की तैयारी! जानें पूरा मामला

SEBI डेरिवटिव्स की सेटलमेंट प्राइस तय करने के लिए Closing Auction Session यानी CAS के नियम में बदलाव कर सकता है. कम से कम एक साल तक CAS की जगह पिछले 30 मिनट के कारोबार का VWAP इस्तेमाल किया जा सकता है. अगस्त में लागू CAS के बाद एक्सपायरी डे पर डेरिवेटिव की कीमतों में तेज उतार-चढ़ाव देखने को मिला था.

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Highlights

  • SEBI डेरिवटिव्स की सेटलमेंट प्राइस तय करने के लिए CAS के नियम में बदलाव कर सकता है.
  • CAS की जगह पिछले 30 मिनट के कारोबार का VWAP इस्तेमाल किया जा सकता है.
  • अगस्त में लागू CAS के बाद एक्सपायरी डे पर डेरिवेटिव की कीमतों में तेज उतार-चढ़ाव देखने को मिला था.

SEBI CAS Rule: भारतीय बाजार नियामक SEBI नए क्लोजिंग ऑक्शन सेशन (CAS) नियम में बदलाव कर सकता है. सेबी कम से कम एक साल तक डेरिवेटिव्स की सेटलमेंट प्राइस तय करने के लिए क्लोजिंग ऑक्शन का इस्तेमाल रोकने की तैयारी में है. इसके बजाय पिछले 30 मिनट के कारोबार के Volume-Weighted Average Price यानी VWAP को डेरिवेटिव्स की प्राइसिंग का आधार बनाया जा सकता है.

अगस्त में लागू हुआ था CAS

SEBI ने अगस्त में उन शेयरों के लिए Closing Auction Session यानी CAS शुरू किया था, जिनसे Futures एंड Options कॉन्ट्रैक्ट जुड़े हुए हैं. इस व्यवस्था के तहत कारोबारी दिन के आखिरी में एक छोटी ऑक्शन प्रक्रिया के जरिए शेयर की क्लोजिंग प्राइस तय की जाती है.

यह व्यवस्था अमेरिका और हांगकांग समेत कई ग्लोबल बाजारों में इस्तेमाल होने वाली प्रक्रिया जैसी है. हालांकि, इसके लागू होने के बाद एक्सपायरी डे पर डेरिवटिव्स की कीमतों में तेज उतार-चढ़ाव देखने को मिला, जिसके बाद SEBI ने इस व्यवस्था की समीक्षा शुरू की.

20,000 सुझाव मिलने के बाद बदलाव

SEBI ने पिछले सप्ताह सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर बताया था कि पिछले महीने जारी Consultation Paper के जवाब में उसे नियमों में बदलाव को लेकर 20,000 सुझाव मिले हैं. मनी कंट्रोल की रिपोर्ट के मुताबिक, अब डेरिवेटिव्स की सेटलमेंट प्राइस तय करने के लिए पिछले 30 मिनट के कारोबार का Volume-Weighted Average Price (VWAP) इस्तेमाल किया जाएगा.

हालांकि, कम लिक्विड कैश मार्केट वाले Underlying Stocks के लिए Closing Auction का इस्तेमाल जारी रहेगा और इससे दिन की क्लोजिंग प्राइस तय की जाएगी.

महीने के अंत तक लागू हो सकता है बदलाव

रिपोर्ट के मुताबिक, SEBI इन बदलावों को इस महीने के आखिरी तक लागू कर सकता है. नए तरीके से भारत की व्यवस्था अमेरिका और यूरोप के बाजारों के और करीब आ सकती है, जहां डेरिवेटिव्स की सेटलमेंट प्राइस तय करने के लिए तय समयावधि के दौरान Volume-Weighted Average Price जैसे अलग प्राइसिंग मैकेनिज्म का इस्तेमाल किया जाता है.

Index की इंडिकेटर वैल्यू पर भी था प्रस्ताव

SEBI ने सितंबर में अपनी समीक्षा योजना के तहत यह भी प्रस्ताव दिया था कि 10 मिनट के CAS Window के दौरान Index की इंडिकेटर वैल्यू प्रकाशित करना बंद कर दिया जाए और सिर्फ अलग-अलग शेयरों की इंडिकेटर प्राइस प्रकाशित की जाएं.

इसके पीछे तर्क था कि इंडेक्स की वैल्यू उस 10 मिनट की अवधि के अंत में ही तय हो रही है. हालांकि, ज्यादातर फीडबैक में कहा गया कि बड़े और अनुभवी Trading Desks इन वैल्यू को खुद तैयार कर सकते हैं. ऐसे में इंडेक्स की Indicative Value हटाने से ट्रांसपेरेंसी कम हो सकती है, जबकि मैनिपुलेशन से जुड़ी चिंताओं का समाधान नहीं होगा.

रिपोर्ट के मुताबिक, SEBI इस बात से सहमत है. हालांकि, वह इन्वेस्टर्स के बीच यह जागरूकता बढ़ाने पर जोर देगा कि Underlying Index Price 10 मिनट की CAS Window खत्म होने के बाद ही तय होती है.

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