सेमीकंडक्टर मिशन से इन 2 शेयरों पर रखें नजर! एक ने दिया 131% तक रिटर्न, दूसरा बना रहा CCL प्लांट
भारत का 1.27 लाख करोड़ रुपये का सेमीकंडक्टर मिशन सिर्फ चिप बनाने तक सीमित नहीं है. चिप बनाने में इस्तेमाल होने वाले सामान और पुर्जों की मांग भी बढ़ सकती है. Ratnaveer Precision गुजरात में CCL प्लांट लगा रही है, जबकि INDO-MIM सेमीकंडक्टर और इलेक्ट्रॉनिक सामान के लिए जरूरी पुर्जे बनाती है. दोनों कंपनियां इस बढ़ते कारोबार से जुड़ी हुई हैं.
Highlights
- भारत की करीब 5000 करोड़ रुपये की CCL मांग में 90% से ज्यादा हिस्सा अभी आयात से पूरा होता है.
- Ratnaveer Precision नवंबर 2026 में CCL प्लांट में उत्पादन शुरू करने का लक्ष्य लेकर चल रही है.
- INDO-MIM के सेमीकंडक्टर और इलेक्ट्रॉनिक सामान के लिए बनाए जाने वाले पुर्जों की मांग बढ़ते घरेलू उत्पादन के साथ बढ़ सकती है.
भारत में सेमीकंडक्टर बनाने की तैयारी अब सिर्फ चिप तैयार करने तक सीमित नहीं है. सरकार का फोकस उन चीजों पर भी है, जिनकी जरूरत चिप और इलेक्ट्रॉनिक सामान बनाने में पड़ती है. इसके लिए सरकार ने 1.27 लाख करोड़ रुपये के सेमीकंडक्टर मिशन के दूसरे चरण में चिप डिजाइन, चिप की पैकेजिंग, मशीनों, जरूरी सामान और केमिकल जैसे क्षेत्रों पर जोर दिया है. यही वजह है कि सेमीकंडक्टर का कारोबार बढ़ने के साथ उन कंपनियों के लिए भी मौका बन रहा है, जो चिप खुद नहीं बनातीं, लेकिन चिप बनाने में इस्तेमाल होने वाले जरूरी सामान और पुर्जे तैयार करती हैं. भारत में अभी कई ऐसे सामान विदेशों से मंगाए जाते हैं. इनमें कॉपर-क्लैड लैमिनेट भी शामिल है, जिसकी देश में करीब 5000 करोड़ रुपये की मांग है और 90% से ज्यादा जरूरत आयात से पूरी होती है.
ऐसे में Ratnaveer Precision Engineering और INDO-MIM जैसी कंपनियों पर नजर जा रही है. पहली कंपनी कॉपर-क्लैड लैमिनेट बनाने की तैयारी कर रही है, जबकि दूसरी सेमीकंडक्टर और इलेक्ट्रॉनिक सामान के लिए जरूरी बारीकी से तैयार किए जाने वाले पुर्जे बनाती है.
सेमीकंडक्टर मिशन का दायरा क्यों बढ़ रहा है?
सरकार के 76000 करोड़ रुपये के India Semiconductor Mission यानी ISM 1.0 ने देश में सेमीकंडक्टर कारोबार खड़ा करने की शुरुआत की. अब 1.27 लाख करोड़ रुपये के ISM 2.0 में चिप बनाने के साथ-साथ चिप डिजाइन, पैकेजिंग, मशीनों, जरूरी सामान, केमिकल और दूसरी चीजों पर भी ध्यान दिया जा रहा है.
इसकी जरूरत इसलिए है क्योंकि भारत की निर्भरता सिर्फ चिप के लिए ही विदेशों पर नहीं है. चिप और इलेक्ट्रॉनिक सामान बनाने में इस्तेमाल होने वाली कई जरूरी चीजें और पुर्जे भी दूसरे देशों से मंगाए जाते हैं यानी अगर भारत में सेमीकंडक्टर और इलेक्ट्रॉनिक सामान का उत्पादन बढ़ता है, तो इन चीजों की जरूरत भी बढ़ेगी. ऐसे में इन्हें देश में बनाने वाली कंपनियों के लिए कारोबार का नया मौका बन सकता है.
पहली कंपनी है Ratnaveer Precision Engineering
Ratnaveer Precision Engineering यानी RPEL स्टेनलेस स्टील से बने इंजीनियरिंग सामान तैयार करती है. कंपनी भारत में स्टेनलेस स्टील वॉशर की सबसे बड़ी निर्यातक है. इसके पास वॉशर के 3300 से ज्यादा अलग-अलग प्रकार हैं और कंपनी हर साल 180 करोड़ से ज्यादा यूनिट बनाती है. कंपनी नट, बोल्ट और सोलर पैनल लगाने में इस्तेमाल होने वाले खास हुक भी बनाती है. इसके अलावा स्टेनलेस स्टील की ट्यूब, पाइप, शीट और जरूरत के हिसाब से तैयार किए जाने वाले दूसरे सामान भी इसके कारोबार का हिस्सा हैं. कंपनी स्टेनलेस स्टील के स्क्रैप से लेकर तैयार सामान तक का काफी काम खुद करती है. इसके पास पिघलाने और रोलिंग की अपनी व्यवस्था है, जिससे वह स्टील को कॉइल, शीट और तार में बदलकर आगे के सामान तैयार करती है.
पहली तिमाही में मुनाफा 22% बढ़ा
वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही यानी Q1FY27 में कंपनी का कारोबार सालाना आधार पर 18.9% बढ़कर 314.6 करोड़ रुपये हो गया. इस दौरान कंपनी का EBITDA 31.7% बढ़कर 35.9 करोड़ रुपये रहा और मार्जिन 11.4% रहा. वहीं कंपनी का नेट प्रॉफिट 22% बढ़कर 18.2 करोड़ रुपये हो गया. कंपनी के बनाए सामान का इस्तेमाल रेलवे, रक्षा, विमानन, दवा और केमिकल जैसे कई बड़े उद्योगों में होता है.
कंपनी के शेयर का हाल?
Ratnaveer Precision Engineering Ltd का शेयर 25 सितंबर को 334 रुपये के भाव पर बंद हुआ. इस दौरान शेयर में 3.09% की तेजी दर्ज की गई. फिलहाल कंपनी का मार्केट कैप 2803 करोड़ रुपये है, जबकि शेयर का 52 हफ्तों का हाई और लो लेवल 360 और 129 रुपये रहा है. कंपनी का P/E 41.5, बुक वैल्यू 83.8 रुपये है.
कंपनी के शेयर ने सिर्फ 3 महीने में 72 फीसदी का रिटर्न दिया है. अगर एक साल की बात करें तो शेयर ने 87 फीसदी का रिटर्न दिया है, वहीं 5 साल में कंपनी के शेयर ने 131 फीसदी तक का रिटर्न दिया है.
दूसरी कंपनी है INDO-MIM
INDO-MIM बारीकी से तैयार किए जाने वाले इंजीनियरिंग पुर्जे बनाने वाली वैश्विक कंपनी है. कंपनी किसी सामान के डिजाइन और उसका सांचा बनाने से लेकर उसमें इस्तेमाल होने वाली सामग्री, आगे की फिनिशिंग, जोड़ने और पैक करने तक का काम कर सकती है. कंपनी के पास दुनिया में Metal Injection Molding यानी MIM की सबसे बड़ी स्थापित क्षमता है. CY25 में वैश्विक MIM बाजार में कंपनी की हिस्सेदारी 6.8% थी.कंपनी के पुर्जों का इस्तेमाल वाहन, मेडिकल, विमानन, रक्षा, उपभोक्ता सामान और औद्योगिक क्षेत्र में होता है.
सिर्फ एक तरह के पुर्जे नहीं बना रही कंपनी
INDO-MIM अब अपने कारोबार को दूसरी तकनीकों में भी बढ़ा रही है. इसमें सिरेमिक से छोटे पुर्जे बनाना, बारीकी से धातु ढालना, मशीन से सटीक पुर्जे तैयार करना, 3D प्रिंटिंग और पाउडर बनाना शामिल है. कंपनी के दुनिया भर में 15 कारखाने हैं. इनमें 6 भारत, 6 अमेरिका, 2 ब्रिटेन और 1 मैक्सिको में हैं. इसके अलावा कर्नाटक के Gowribidanur में एक नया Iron Powder Manufacturing Facility भी बनाया जा रहा है.
सेमीकंडक्टर कारोबार बढ़ने से INDO-MIM को कैसे फायदा?
INDO-MIM का कारोबार कई क्षेत्रों में फैला हुआ है. कंपनी के कुल रेवेन्यू में Automotive की हिस्सेदारी 24.6%, Defence की 18.7%, Medical की 18.1%, Consumer Products की 10.8% और Aerospace की 11.9% है. सेमीकंडक्टर कारोबार में कंपनी ऐसे जरूरी पुर्जे बनाती है, जो चिप और दूसरे हिस्सों को सुरक्षित रखने और गर्मी कम करने में काम आते हैं.
इसके अलावा कंपनी इलेक्ट्रॉनिक सामान के पुर्जे और उनकी असेंबली का काम भी करती है. कंपनी का मानना है कि सरकार के ISM 1.0 और ISM 2.0 से उसके लिए कारोबार बढ़ाने के मौके बन सकते हैं.इलेक्ट्रॉनिक सामान में भी कंपनी की मौजूदगी
INDO-MIM सेमीकंडक्टर के अलावा इलेक्ट्रॉनिक सामान के लिए भी कई तरह के पुर्जे बनाती है. इसके प्रोडक्ट में कनेक्टर, इंटरफेस शेल, कूलिंग फैन के पुर्जे, कैमरा स्टैंड और स्मार्टफोन के हिंज शामिल हैं. इनका इस्तेमाल कंप्यूटर और पहनने वाले इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों में किया जाता है.
कंपनी के शेयर का हाल?
Indo-MIM Ltd का शेयर 25 सितंबर को 1276 रुपये के भाव पर बंद हुआ. इस दौरान शेयर में 2.68% की गिरावट रही. दिन के कारोबार में शेयर ने 1349 रुपये का ऊपरी स्तर और 1265 रुपये का निचला स्तर बनाया. 52 हफ्तों में शेयर का हाई 1356 और लो लेवल 700 रुपये रहा. कंपनी का मार्केट कैप करीब 63093 करोड़ रुपये है. कंपनी के शेयर ने सिर्फ एक हफ्ते में 18 फीसदी का रिटर्न दिया है. 3 महीने में 82 फीसदी का रिटर्न दिया है.
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