बाजार में तबाही! सेंसेक्स 1100 अंकों से ज्यादा टूटा, डूबे 8 लाख करोड़; इन 5 वजहों से बिकवाली को मजबूर निवेशक
BSE Midcap Index और BSE Smallcap Index में 1 प्रतिशत से ज्यादा की गिरावट आई. इस भारी गिरावट से निवेशकों की कुल संपत्ति में करीब 8 लाख करोड़ रुपये की कमी आई, क्योंकि BSE लिस्टेड कंपनियों का मार्केट कैप 468 लाख करोड़ रुपये से घटकर करीब 460 लाख करोड़ रुपये रह गया.

बुधवार को बाजार में शानदार तेजी रही थी. सेंसेक्स 1000 अंकों से ज्यादा चढ़ गया था. अब गुरुवार, 30 अप्रैल को भारतीय शेयर बाजार में तेज बिकवाली देखने को मिली, जिससे सेंसेक्स और निफ्टी 50 दोनों ही दबाव में आ गए. सेंसेक्स करीब 1,150 अंक यानी 1.5 प्रतिशत टूटकर 76,349 के इंट्राडे लो तक पहुंच गया, जबकि Nifty 50 350 अंक से ज्यादा गिरकर 23,801 के स्तर तक फिसल गया. मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों में भी दबाव रहा, जहां BSE Midcap Index और BSE Smallcap Index में 1 प्रतिशत से ज्यादा की गिरावट आई. इस भारी गिरावट से निवेशकों की कुल संपत्ति में करीब 8 लाख करोड़ रुपये की कमी आई, क्योंकि BSE लिस्टेड कंपनियों का मार्केट कैप 468 लाख करोड़ रुपये से घटकर करीब 460 लाख करोड़ रुपये रह गया.
अमेरिका-ईरान तनाव बढ़ना
ग्लोबल लेवल पर अमेरिका और ईरान के बीच तनाव बढ़ने से बाजार पर दबाव आया है. रिपोर्ट्स के मुताबिक अमेरिका ने ईरान पर आर्थिक दबाव बढ़ाते हुए उससे जुड़े क्रिप्टो एसेट्स फ्रीज किए हैं. वहीं, मिडिल ईस्ट में सैन्य गतिविधियों को लेकर भी चिंता बढ़ी है. इससे निवेशकों में डर का माहौल बना और उन्होंने जोखिम वाले एसेट्स से दूरी बनाने की शुरुआत कर दी.
कच्चे तेल की कीमतों में उछाल
ग्लोबल मार्केट में ब्रेंट क्रूड 123 डॉलर प्रति बैरल के ऊपर पहुंच गया है, जो 2022 के बाद का उच्च स्तर है. भारत जैसे बड़े आयात करने वाले देश के लिए यह चिंता की बात है, क्योंकि इससे महंगाई बढ़ सकती है और इकोनॉमिक ग्रोथ पर असर पड़ सकता है.
रुपया रिकॉर्ड निचले स्तर पर
भारतीय रुपया डॉलर के मुकाबले 95.20 के ऑल टाइम लो पर पहुंच गया है. कमजोर रुपया विदेशी निवेशकों के लिए जोखिम बढ़ाता है और इससे पूंजी निकासी तेज हो सकती है, जिससे बाजार पर दबाव बढ़ता है.
US Fed का सख्त रुख
अमेरिकी फेडरल रिजर्व ने ब्याज दरों में बदलाव नहीं किया, लेकिन चेयरमैन जेरोम पावेल का बयान थोड़ा सख्त रहा. उन्होंने महंगाई को लेकर चिंता जताई, जिससे यह संकेत मिला कि ब्याज दरें लंबे समय तक ऊंचे स्तर पर रह सकती हैं. इससे ग्लोबल मार्केट में नेगेटिव सेंटीमेंट बना.
FIIs की लगातार बिकवाली
Foreign Institutional Investors (FIIs) लगातार भारतीय बाजार में बिकवाली कर रहे हैं. पिछले कुछ दिनों की खरीदारी के बाद अब FIIs फिर से सेलिंग मोड में आ गए हैं और लगातार आठ सत्रों से कैश मार्केट में बिकवाली कर रहे हैं.
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