74% और 62% का मार्जिन, फिर भी चर्चा से दूर थे ये शेयर! स्ट्रेट ऑफ होर्मुज खुलते ही बढ़ी हलचल
इस साल अमेरिका, इजरायल और ईरान के बीच बढ़े तनाव के कारण इस मार्ग पर असर पड़ा था, जिससे कच्चे तेल की कीमतों में तेजी देखने को मिली. इसका असर भारत जैसे देशों पर भी पड़ा, क्योंकि भारत अपनी जरूरत का अधिकांश तेल विदेशों से खरीदता है. अब अमेरिका और ईरान के बीच समझौता होने के बाद यह रास्ता फिर से खुल गया है. इससे तेल की सप्लाई सामान्य होने की उम्मीद बढ़ी है.

Oil Stocks: दुनिया की तेल सप्लाई के लिए स्ट्रेट ऑफ होर्मुज बेहद अहम रास्ता माना जाता है. दुनिया के करीब 20 फीसदी तेल और गैस की सप्लाई इसी समुद्री रास्ते से होती है. इस साल अमेरिका, इजरायल और ईरान के बीच बढ़े तनाव के कारण इस मार्ग पर असर पड़ा था, जिससे कच्चे तेल की कीमतों में तेजी देखने को मिली. इसका असर भारत जैसे देशों पर भी पड़ा, क्योंकि भारत अपनी जरूरत का अधिकांश तेल विदेशों से खरीदता है.
अब अमेरिका और ईरान के बीच समझौता होने के बाद यह रास्ता फिर से खुल गया है. इससे तेल की सप्लाई सामान्य होने की उम्मीद बढ़ी है. ऐसे माहौल में तेल और गैस सेक्टर से जुड़ी कुछ भारतीय कंपनियां चर्चा में हैं. खास बात यह है कि इन कंपनियों का ऑपरेटिंग मार्जिन 60 फीसदी से भी ज्यादा है. इनमें Aegis Vopak Terminals और Dolphin Offshore Enterprises प्रमुख नाम हैं.
| Aegis Vopak Terminals Aegis Vopak Terminals तेल, गैस, केमिकल और अन्य तरल उत्पादों के स्टोरेज का काम करती है. कंपनी खुद तेल नहीं खरीदती या बेचती, बल्कि स्टोरेज की सुविधा देकर कमाई करती है. भारत में इसके LPG और लिक्विड टर्मिनल कई बंदरगाहों पर मौजूद हैं. कंपनी का कारोबार तेल की बढ़ती आवाजाही से सीधे जुड़ा हुआ है. स्ट्रेट ऑफ होर्मुज खुलने के बाद भारत में तेल और LPG की सप्लाई बढ़ सकती है, जिससे कंपनी को फायदा मिल सकता है. कैसे हैं कंपनी के आंकड़े? FY23 में कंपनी की बिक्री 353 करोड़ रुपये थी, जो FY26 में बढ़कर 923 करोड़ रुपये पहुंच गई. इसी दौरान EBITDA 229 करोड़ रुपये से बढ़कर 686 करोड़ रुपये हो गया. FY26 में कंपनी का नेट प्रॉफिट 342 करोड़ रुपये रहा. कंपनी का ऑपरेटिंग मार्जिन करीब 74 फीसदी है, जो इसे इस सेक्टर की मजबूत कंपनियों में शामिल करता है. हालांकि कंपनी पर करीब 3,731 करोड़ रुपये का कर्ज भी है, जिस पर निवेशकों को नजर रखनी चाहिए. |
| Dolphin Offshore Dolphin Offshore समुद्र में तेल और गैस खोजने तथा उससे जुड़े तकनीकी काम करती है. कंपनी कई साल तक कमजोर स्थिति में रही, लेकिन अब दोबारा कारोबार बढ़ाने की कोशिश कर रही है. कंपनी के ग्राहकों में HPCL, IOCL, L&T और अन्य बड़ी कंपनियां शामिल हैं. कंपनी की वापसी कितनी मजबूत? FY24 में कंपनी की बिक्री सिर्फ 6 करोड़ रुपये थी, जो FY26 में बढ़कर 116 करोड़ रुपये पहुंच गई. वहीं नेट प्रॉफिट 69 करोड़ रुपये रहा. कंपनी का ऑपरेटिंग मार्जिन FY25 में करीब 62 फीसदी रहा. हालांकि इसके कारोबार में उतार-चढ़ाव ज्यादा देखने को मिलता है. |
निवेशकों को किन बातों का ध्यान रखना चाहिए?
Aegis Vopak को अपेक्षाकृत स्थिर कारोबार वाली कंपनी माना जा रहा है, क्योंकि इसकी कमाई स्टोरेज सेवाओं से आती है. वहीं Dolphin Offshore का कारोबार परियोजनाओं पर आधारित है, इसलिए इसमें जोखिम ज्यादा माना जाता है.
इसके अलावा अगर तेल की कीमतें बहुत ज्यादा गिरती हैं, तो तेल कंपनियां नए प्रोजेक्ट्स पर खर्च कम कर सकती हैं. इसका असर Dolphin Offshore जैसी कंपनियों पर पड़ सकता है.
क्या है बड़ा संकेत?
स्ट्रेट ऑफ होर्मुज का दोबारा खुलना भारत के ऊर्जा क्षेत्र के लिए राहत की खबर है. इससे तेल और गैस की सप्लाई बेहतर हो सकती है. ऐसे में Aegis Vopak Terminals और Dolphin Offshore जैसी कंपनियां निवेशकों की नजर में बनी रह सकती हैं. हालांकि निवेश से पहले कंपनी के कारोबार, कर्ज और जोखिम को समझना जरूरी है.
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