Suzlon 2.0 से आएगा ग्रोथ का अगला दौर, FII की दिलचस्पी बरकरार; जानें- अब कहां फोकस कर रही कंपनी?
देश की सबसे बड़ी रिन्यूएबल एनर्जी सॉल्यूशन देने वाली कंपनी में FII की दिलचस्पी लगातार बनी हुई है, जबकि बाजार का आम मूड अभी भी सतर्क है. इंडस्ट्री के लिए अच्छे हालात और मजबूत होते बिजनेस मॉडल की वजह से, इस बदलाव पर ब्रोकरेज और निवेशकों, दोनों का ध्यान तेजी से जा रहा है.

ग्लोबल अस्थिरता और जियो-पॉलिटिकल तनाव के बीच विदेशी संस्थागत निवेशक (FIIs) भारतीय इक्विटी से अरबों डॉलर निकाल रहे हैं, फिर भी मार्केट के कुछ खास हिस्सों में लगातार निवेश आ रहा है. ऐसा ही एक स्टॉक सुजलॉन एनर्जी है, जिसमें विदेशी निवेशकों ने लगातार तीसरी तिमाही में अपनी हिस्सेदारी बढ़ाई है.
FII की दिलचस्पी
देश की सबसे बड़ी रिन्यूएबल एनर्जी सॉल्यूशन देने वाली कंपनी में FII की दिलचस्पी लगातार बनी हुई है, जबकि बाजार का आम मूड अभी भी सतर्क है. सुजलॉन के शेयर अभी अपने 52-वीक के 68 रुपये के हाई लेवल से लगभग 15 फीसदी नीचे ट्रेड कर रहे हैं, लेकिन फिर भी 2026 में इनमें 11 फीसदी से अधिक की बढ़त दर्ज की गई है. यह साल टैरिफ से जुड़ी अनिश्चितता और मिडिल ईस्ट में चल रहे टकराव की वजह से बढ़े जियो-पॉलिटिकल तनाव वाला रहा है.
विंड एनर्जी पर फोकस
इस स्टॉक की मजबूती के पीछे एक बड़े बदलाव की कहानी है. सुजलॉन सिर्फ विंड एनर्जी पर फोकस करने वाली कंपनी से बदलकर, रिन्यूएबल एनर्जी से जुड़े सभी तरह के समाधान देने वाली कंपनी बनने की कोशिश कर रही है. इंडस्ट्री के लिए अच्छे हालात और मजबूत होते बिजनेस मॉडल की वजह से, इस बदलाव पर ब्रोकरेज और निवेशकों, दोनों का ध्यान तेजी से जा रहा है.
सुजलॉन 2.0
अपने ‘सुजलॉन 2.0’ रोडमैप के तहत, कंपनी का लक्ष्य सिर्फ विंड OEM (विंड एनर्जी उपकरण बनाने वाली कंपनी) बने रहने के बजाय, एंड-टू-एंड रिन्यूएबल एनर्जी सॉल्यूशन देकर आगे बढ़ना है. इसकी मुख्य रणनीतिक बातों में शामिल हैं. विंड + सोलर + BESS (बैटरी एनर्जी स्टोरेज सिस्टम) जैसे मिले-जुले समाधानों के जरिए ग्राहकों की रिन्यूएबल एनर्जी (नवीकरणीय ऊर्जा) से जुड़ी सभी जरूरतों को एक ही जगह पूरा करना.
रिन्यूएबल एनर्जी एसेट के पूरे लाइफ़साइकल के दौरान लाइफटाइम सर्विस पार्टनर के तौर पर काम करना और वर्ल्ड-क्लास टेक्नोलॉजी, लोकल इंजीनियरिंग क्षमताओं और भारत के किफायती मैन्युफैक्चरिंग बेस को मिलाकर ग्लोबल स्तर पर कॉम्पिटिटिव प्रोडक्ट देना.
ज्यादा लोकलाइजेशन एक रणनीतिक फायदा
भारतीय विंड इंडस्ट्री अभी लगभग 60% लोकलाइजेशन लेवल पर काम कर रही है, जबकि कंपनी ने अपनी पूरी वैल्यू चेन में 80-85% लोकलाइज़ेशन हासिल कर लिया है. इससे सप्लाई-चेन मजबूत होती है, इंपोर्ट पर निर्भरता कम होती है और तेजी से बदलते ग्लोबल ट्रेड और जियो-पॉलिटिकल माहौल में कंपनी की स्थिति बेहतर होती है.
ग्रोथ का अगला दौर
JM Financial का मानना है कि ग्रोथ का अगला दौर ‘Suzlon 2.0’ से आएगा. यह बदलाव कंपनी को विंड टर्बाइन सप्लायर से एक इंटीग्रेटेड रिन्यूएबल एनर्जी डेवलपर के तौर पर आगे बढ़ाएगा. JM Financial ने कहा कि सुजलॉन का अपने AMS पोर्टफोलियो को मौजूदा 18 GW से बढ़ाकर 70 GW करने का लक्ष्य, बिजनेस में सबसे अच्छी क्वालिटी वाली कमाई का जरिया बन सकता है.
डिस्क्लेमर: Money9live किसी स्टॉक, म्यूचुअल फंड, आईपीओ में निवेश की सलाह नहीं देता है. यहां पर केवल स्टॉक्स की जानकारी दी गई है. निवेश से पहले अपने वित्तीय सलाहकार की राय जरूर लें.