Tata Group के इस मल्टीबैगर स्टॉक में 40% गिरावट की क्या है वजह, क्या खरीदारी का अब है सही समय?

टाटा ग्रुप की रिटेल कंपनी ट्रेंट लिमिटेड जो जूडियो और वेस्टसाइड जैसे ब्रांड्स का संचालन करती है, का शेयर अपने ऑल-टाइम हाई ₹5,563 से 40% से ज्यादा टूट चुका है. ऐसे में सवाल है कि क्या शेयर में गिरावट का दौर खत्म हो चुका है या अभी और दबाव बाकी है?

ट्रेंट के शेयरों में भारी गिरावट देखी गई है. Image Credit: TV9 Bharatvarsh

फैशन, फुटवियर और लाइफस्टाइल प्रोडक्ट्स बेचने वाली टाटा ग्रुप की दिग्गज कंपनी ट्रेंट लिमिटेड (Trent Ltd) के शेयर इन दिनों बाजार में भारी चर्चा में हैं. कभी निवेशकों को छप्परफाड़ रिटर्न देने वाला यह स्टॉक अपने ऑल-टाइम हाई ₹5,563.35 से 40% से भी ज्यादा टूट चुका है. हालांकि, भारी गिरावट के बाद निचले स्तरों पर थोड़ी रिकवरी देखी गई और कंपनी का शेयर करीब 6.8% की बढ़त के साथ ₹3,095.20 पर पहुंच गया. इस समय कंपनी का मार्केट कैप ₹1,64,986.62 करोड़ है. आइए समझते हैं कि इस बड़े क्रैश के पीछे असली वजहें क्या हैं और क्या अब बुरा वक्त बीत चुका है.

  1. रेवेन्यू ग्रोथ की रफ्तार हुई धीमी

कंपनी का सालाना रेवेन्यू भले ही वित्त वर्ष 2023 के ₹8,242 करोड़ से बढ़कर वित्त वर्ष 2026 में ₹20,074 करोड़ पर पहुंच गया हो, लेकिन इसकी रफ्तार अब सुस्त पड़ गई है. जहां वित्त वर्ष 2023 में कंपनी की सेल्स ग्रोथ रिकॉर्ड 83.24% थी, वहीं वित्त वर्ष 2026 में यह घटकर महज 17.16% रह गई. ट्रेडब्रेन ने अपनी रिपोर्ट में इसे साफ कंपनी के मैच्योर फेज में जाने का साफ संकेत बताया है.

  1. आसमान छू रहा था वैल्यूएशन

जब यह शेयर अपने शिखर पर था, तब इसका वैल्यूएशन बेहद महंगा हो चुका था. साल 2024 के दौरान इसका प्राइस-टू-अर्निंग (P/E) रेशियो लगभग 231.6 गुना और प्राइस-टू-बुक (P/B) रेशियो 62.5 गुना तक पहुंच गया था. रिटेल सेक्टर की दूसरी कंपनियों के मुकाबले यह बहुत ज्यादा था. निवेशकों की उम्मीदें इतनी ज्यादा बढ़ चुकी थीं कि जरा सी सुस्ती आते ही मुनाफावसूली का दौर शुरू हो गया और शेयर क्रैश हो गया.

  1. ‘जूडियो’ के आउटलेट्स में आपस में ही कॉम्पिटिशन

भारतीय फैशन बाजार में कॉम्पिटिशन बहुत तेजी से बढ़ा है. रिपोर्ट के मुताबिक, ई-कॉमर्स कंपनियों और लोकल ब्रांड्स से तो टक्कर मिल ही रही है, साथ ही ट्रेंट के अपने ही ब्रांड ‘जूडियो’ (Zudio) के तेजी से खुलते स्टोर्स के कारण अब ‘कैनिबलाइजेशन’ (एक ही कंपनी के स्टोर्स का आपस में कॉम्पिटिशन) होने लगा है. एक ही इलाके में ज्यादा स्टोर होने से प्रति स्टोर कमाई और मुनाफे पर दबाव देखा जा रहा है.

  1. मांग में सुस्ती और महंगे विस्तार का असर

देश में लोग अब कपड़ों और लाइफस्टाइल जैसी चीजों पर सोच-समझकर खर्च कर रहे हैं, जिससे पुराने स्टोर्स की सेल्स ग्रोथ (Same-Store Sales Growth) प्रभावित हुई है. इसके अलावा, कंपनी छोटे शहरों में नए स्टोर्स तो खोल रही है, लेकिन उन नए आउटलेट्स से पूरा मुनाफा आने में समय लगता है. इस वजह से शॉर्ट-टर्म में कंपनी की कमाई और ग्रोथ पर असर पड़ा है.

डिस्क्लेमर: Money9live किसी स्टॉक, म्यूचुअल फंड, आईपीओ में निवेश की सलाह नहीं देता है. यहां पर केवल स्टॉक्स की जानकारी दी गई है. निवेश से पहले अपने वित्तीय सलाहकार की राय जरूर लें.