ट्रंप टैरिफ पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले से झूमा बाजार, वॉल स्ट्रीट में तेजी; Dow-Nasdaq-S&P-Gift Nifty हरे निशान में
डोनाल्ड ट्रंप के “लिबरेशन डे” टैरिफ को अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट द्वारा अवैध ठहराए जाने के बाद वॉल स्ट्रीट में खरीदारी लौटी. प्रमुख इंडेक्स बढ़त के साथ कारोबार करते दिखे, जबकि कमजोर जीडीपी आंकड़ों और अमेरिका-ईरान तनाव के बावजूद बाजार को राहत मिली.
Trump Tariff Supreme Court and US Share Market: ट्रंप टैरिफ को लेकर अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट के अहम फैसले के बाद वॉल स्ट्रीट में हरियाली देखने को मिला और शुक्रवार को अमेरिकी शेयर बाजार बढ़त के साथ कारोबार करते हुए नजर आए. अदालत ने राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा लगाए गए व्यापक “लिबरेशन डे” टैरिफ को अवैध करार देते हुए कहा कि आपातकालीन शक्तियों का उपयोग करके इतने बड़े पैमाने पर आयात शुल्क लगाना उनके अधिकार क्षेत्र से बाहर था. इस फैसले ने वैश्विक व्यापार तनाव कम होने की उम्मीद जगाई, जिससे निवेशकों का भरोसा बढ़ा और बाजार में खरीदारी लौटी.
प्रमुख इंडेक्स में आई हरियाली
प्रमुख अमेरिकी इंडेक्स में मजबूती दर्ज की गई. Dow Jones इंडेक्स 131.88 अंक यानी 0.27 फीसदी बढ़कर 49,527.04 पर पहुंच गया. S&P 500 इंडेक्स 49.38 अंक या 0.72 फीसदी चढ़कर 6,911.02 के स्तर पर ट्रेड कर रहा है. वहीं टेक शेयरों पर आधारित Nasdaq इंडेक्स में सबसे ज्यादा तेजी रही और यह 266.14 अंक यानी 1.17 फीसदी उछलकर 22,948.08 पर पहुंच गया. इन आंकड़ों से स्पष्ट है कि टेक्नोलॉजी कंपनियों में निवेशकों की दिलचस्पी सबसे अधिक रही. इससे इतर, Gift Nifty में भी तेजी दर्ज की गई. गिफ्ट निफ्टी 183.50 अंक यानी 0.72 फीसदी बढ़कर 25,749.50 पर पहुंच गया.
शुरू में दबाव में था अमेरिकी बाजार
हालांकि कारोबार की शुरुआत में बाजार दबाव में था, क्योंकि निवेशक ताजा आर्थिक आंकड़ों और जियो पॉलिटिकल घटनाक्रम पर नजर रखे हुए थे. अमेरिका की चौथी तिमाही की जीडीपी वृद्धि दर उम्मीद से कमजोर रही और केवल 1.4 फीसदी दर्ज की गई, जो पूर्वानुमानों से काफी कम है. इसके साथ ही फेडरल रिजर्व द्वारा महंगाई का प्रमुख पैमाना माने जाने वाला “कोर पर्सनल कंजप्शन एक्सपेंडिचर (PCE)” इंडेक्स भी अपेक्षा से अधिक बढ़ा, जिससे ब्याज दरों को लेकर अनिश्चितता बनी रही.
अमेरिका-ईरान ने भी बढ़ा रखी थी टेंशन
जियो पॉलिटिकल मोर्चे पर अमेरिका-ईरान तनाव भी निवेशकों के लिए चिंता का विषय बना हुआ है. इन सभी कारकों के बावजूद सुप्रीम कोर्ट के फैसले ने बाजार को राहत दी, क्योंकि इससे वैश्विक व्यापार युद्ध के खतरे में कमी आने की उम्मीद पैदा हुई है. निवेशकों को लगता है कि यदि टैरिफ में ढील मिलती है, तो अंतरराष्ट्रीय व्यापार और कॉर्पोरेट मुनाफे दोनों को समर्थन मिल सकता है. यानी आर्थिक आंकड़ों की कमजोरी और वित्तीय क्षेत्र की चिंताओं के बावजूद न्यायालय के फैसले ने बाजार की दिशा सकारात्मक बनाए रखी. आने वाले दिनों में निवेशकों की नजर महंगाई, ब्याज दरों के संकेत, वैश्विक तनाव और कॉर्पोरेट नतीजों पर बनी रहेगी, जो वॉल स्ट्रीट की अगली चाल तय करेंगे.
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