पहले 18%, फिर 10% और अब 15%… Trump के टैरिफ के बाद कौन से शेयर और सेक्टर सेफ? जानें इन 15 कंपनियों में कहां मौका

अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के टैरिफ फैसलों ने ग्लोबल बाजार में हलचल बढ़ा दी है. पहले 10 प्रतिशत टैरिफ लगाया गया और कुछ ही घंटों में इसे बढ़ाकर 15 प्रतिशत कर दिया गया. ऐसे में निवेशकों के मन में सवाल है कि आगे क्या होगा. यही वह समय है जब जल्दबाजी में फैसले लेने के बजाय रुककर स्थिति को समझना ज्यादा जरूरी होता है.

Trump Tariff Image Credit: Money9 live

Safest stocks after Trump Tariff: शेयर बाजार में निवेश करते समय सबसे जरूरी बात होती है धैर्य रखना. खासकर तब, जब बाजार में अनिश्चितता ज्यादा हो. हाल ही में अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के टैरिफ फैसलों ने ग्लोबल बाजार में हलचल बढ़ा दी है. पहले 10 प्रतिशत टैरिफ लगाया गया और कुछ ही घंटों में इसे बढ़ाकर 15 प्रतिशत कर दिया गया. ऐसे में निवेशकों के मन में सवाल है कि आगे क्या होगा. यही वह समय है जब जल्दबाजी में फैसले लेने के बजाय रुककर स्थिति को समझना ज्यादा जरूरी होता है.

ऐसा इसलिए क्योंकि बाजार में हर खबर का असर अलग-अलग सेक्टर और कंपनियों पर अलग तरीके से पड़ता है. भारत के लिए यह स्थिति एक मौके की तरह दिख सकती है, लेकिन पूरी तस्वीर साफ होने तक इंतजार करना ही समझदारी है. ऐसे में आइए विस्तार से समझते हैं कि इस टैरिफ के असर से कौन से सेक्टर प्रभावित हो सकते हैं और निवेशकों को क्या करना चाहिए.

टैरिफ बढ़ने से क्यों बढ़ी चिंता

अमेरिका ने आयात होने वाले सामान पर टैरिफ बढ़ा दिया है. इसका मतलब है कि अब वहां सामान बेचना महंगा हो जाएगा. इससे कई देशों के निर्यात पर असर पड़ सकता है. हालांकि, यह बदलाव भारत के लिए कुछ मामलों में फायदेमंद भी हो सकता है, लेकिन अभी स्थिति पूरी तरह साफ नहीं है.

बाजार पर दो तरह का असर

टैरिफ का असर दो तरह से होता है. पहला असर बाजार की सेंटीमेंट पर पड़ता है. जैसे ही कोई बड़ी खबर आती है, शेयर बाजार में उतार-चढ़ाव शुरू हो जाता है. दूसरा असर कंपनियों के असली कारोबार पर पड़ता है. भारत में भी पहले बाजार में गिरावट देखने को मिली. लेकिन असल में हर कंपनी पर इसका असर नहीं पड़ा. सिर्फ कुछ सेक्टर जैसे टेक्सटाइल, राइस और मरीन प्रोडक्ट्स प्रभावित हुए.

निर्यात करने वाली कंपनियों की रणनीति

अलग-अलग सेक्टर ने इस टैरिफ से निपटने के लिए अलग तरीके अपनाए.

  • पहला तरीका था जल्दी शिपमेंट करना. टेक्सटाइल जैसे सेक्टर में कंपनियों ने टैरिफ लागू होने से पहले ही ज्यादा माल अमेरिका भेज दिया. इससे उन्हें कुछ समय तक नुकसान से बचाव मिला.
  • दूसरा तरीका ऑटो एंसिलरी सेक्टर में देखा गया. यहां कंपनियों का प्रोडक्शन पहले से प्लान होता है, इसलिए उन्होंने पहले ही माल भेज दिया और ज्यादा स्टॉक रख लिया.
  • तीसरा तरीका फूड और मरीन सेक्टर में देखा गया. यहां माल ज्यादा समय तक स्टोर नहीं किया जा सकता, इसलिए कंपनियां ज्यादा एडवांस शिपमेंट नहीं कर सकीं. इससे इन पर ज्यादा असर पड़ा.
कंपनी का नामइंस्टिट्यूशनल होल्डिंग (%)कंपनी का साइजमार्केट कैप (₹ करोड़)
Garware Technical Fibres14.9Mid6,534
Arvind Ltd32.2Mid9,637
Trident Ltd2.4Mid13,015
Avanti Feeds7.8Mid18,394
KPR Mill20.9Large31,855
Welspun Living13.8Mid13,150
Indo Count13.5Mid5,831
Vardhman Textiles18.8Mid15,522
KRBL4.3Mid8,318
Chaman Lal Setia4.3Small1,344
Venky’s India1.0Small1,939
Kohinoor Foods0.0Micro93
Coastal Corp0.0Micro326
Apex Frozen Foods0.0Small1,367
Waterbase0.0Micro251
सोर्स: ET

राइस सेक्टर की अलग स्थिति

चावल के मामले में स्थिति थोड़ी अलग है. अमेरिका में भारतीय चावल की मांग बनी रहती है. इसलिए टैरिफ बढ़ने के बावजूद निर्यात पूरी तरह नहीं रुका. लेकिन खरीदारों ने ज्यादा कीमत देकर स्टॉक जमा कर लिया. अब अगर टैरिफ कम होता है, तो तुरंत मांग बढ़ेगी ऐसा जरूरी नहीं है, क्योंकि पहले से ही स्टॉक मौजूद है.

कंपनीFY23FY24FY25
Garware134513751591
Arvind842777788394
Trident635968787062
Avanti517955055777
KPR Mill624861266462
Welspun8215982510697
Indo Count304336004195
Vardhman10329983010120
KRBL545754815674
कुल कमाई (Total Income ₹ करोड़)

टेक्सटाइल सेक्टर में क्या हो रहा है

टेक्सटाइल सेक्टर में अभी मांग कमजोर दिख रही है. इसका कारण सिर्फ टैरिफ नहीं है, बल्कि सीजनल फैक्टर भी है. फैशन और डिजाइन हर सीजन बदलते हैं, इसलिए कंपनियां ज्यादा स्टॉक नहीं रख सकतीं. इसलिए तुरंत मांग बढ़ने की संभावना कम है. लेकिन अगर स्थिति स्थिर रहती है, तो आने वाले महीनों में सुधार हो सकता है.

कंपनीFY23FY24FY25
Garware13211861
Arvind140313251376
Trident137420601575
Avanti01313
KPR Mill13481158466
Welspun235025202468
Indo Count8409141217
Vardhman167717911238
KRBL201507376
कर्ज (Debt ₹ करोड़)

किन कंपनियों पर नजर

टेक्सटाइल, राइस और मरीन सेक्टर की कई कंपनियां इस स्थिति से जुड़ी हैं. इनमें Garware Technical Fibres, Arvind, Trident, KPR Mill, Welspun Living, Indo Count, Vardhman Textiles जैसी टेक्सटाइल कंपनियां शामिल हैं. राइस सेक्टर में KRBL और Chaman Lal Setia Exports जैसी कंपनियां हैं. वहीं मरीन और फिशरीज सेक्टर में Avanti Feeds, Apex Frozen Foods, Coastal Corporation और Waterbase जैसी कंपनियां काम करती हैं.

सोर्स: ET, Trendlyne

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