ONGC-OIL के शेयरों में बड़ी गिरावट, 4% तक टूटे स्टॉक, जानें क्या हैं ट्रिगर प्वाइंट्स
अमेरिका और ईरान के बीच वार्ता में प्रगति के संकेतों के बीच अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में नरमी देखी गई, जिससे अपस्ट्रीम तेल कंपनियों के शेयरों पर दबाव बढ़ गया. तेल की कीमतों में गिरावट से उत्पादक कंपनियों की आय और मुनाफे पर असर पड़ता है, जबकि रिफाइनिंग कंपनियों को इससे कुछ राहत मिल सकती है.
Upstream Oil Stocks Plunged upto 4%: कच्चे तेल (Crude Oil) की कीमतों में हल्की गिरावट के बाद बुधवार को अपस्ट्रीम ऑयल कंपनियों के शेयरों में दबाव देखने को मिला. अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत में प्रगति की खबर से मध्य-पूर्व से सप्लाई बाधित होने का खतरा कम हुआ है, जिससे अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल की कीमतें नरम पड़ीं. इसका सीधा असर तेल उत्पादक कंपनियों के शेयरों पर पड़ा.
कच्चे तेल की कीमतों में नरमी
अंतरराष्ट्रीय बाजार में ब्रेंट क्रूड (Brent) 0.04% गिरकर 67.39 डॉलर प्रति बैरल पर आ गया, जबकि अमेरिकी WTI क्रूड 0.08% फिसलकर 62.28 डॉलर प्रति बैरल पर रहा. दोनों बेंचमार्क दो सप्ताह के निचले स्तर के आसपास कारोबार करते दिखे. तेल की कीमतों में यह गिरावट अमेरिका-ईरान परमाणु वार्ता में सकारात्मक संकेत मिलने के बाद आई है. निवेशकों को उम्मीद है कि अगर समझौता आगे बढ़ता है तो ईरान से तेल सप्लाई बढ़ सकती है, जिससे वैश्विक बाजार में उपलब्धता सुधरेगी.
अपस्ट्रीम कंपनियों पर दबाव
तेल की कीमतों में गिरावट अपस्ट्रीम कंपनियों के लिए नकारात्मक मानी जाती है, क्योंकि उनकी कमाई सीधे कच्चे तेल के दाम पर निर्भर करती है. कम कीमत का मतलब प्रति बैरल कम राजस्व और घटता मुनाफा. बाजार में इसका असर दिखा. Oil and Natural Gas Corporation (ONGC), Oil India Limited और Seamec Limited के शेयरों में दबाव दिखा. बुधवार को इंट्राडे में इनके शेयर 4 फीसदी तक टूटे हैं.
दोपहर 2 बजे तक इसके शेयर में इतनी गिरावट आई है.
- ONGC के शेयर में 0.6 फीसदी
- Oil India Limited के शेयर 1.5 फीसदी
- Seamec Limited के शेयर 1.3 फीसदी टूटकर कारोबार कर रहे हैं.
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डाउनस्ट्रीम कंपनियों को राहत
जहां अपस्ट्रीम कंपनियों पर दबाव है, वहीं कच्चा तेल के दाम घटना रिफाइनिंग और मार्केटिंग कंपनियों के लिए फायदेमंद होते हैं, क्योंकि उनकी इनपुट लागत घटती है और मार्जिन बेहतर हो सकते हैं. तेल की कीमतों में मौजूदा गिरावट ने अपस्ट्रीम कंपनियों के शेयरों पर दबाव बढ़ाया है, जबकि डाउनस्ट्रीम कंपनियों को इससे राहत मिल सकती है. अब बाजार की नजर अमेरिका-ईरान वार्ता और वैश्विक सप्लाई संकेतों पर टिकी रहेगी.
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