अमेरिका के 126% टैरिफ का असर नहीं पड़ेगा Waaree Energies पर, Nuvama-Emkay ने कहा अभी 56% तक उछलेगा स्टॉक
अमेरिका की ओर से भारतीय सोलर कंपनियों पर 126% टैरिफ की खबर से बाजार में हलचल मची, लेकिन ब्रोकरेज फर्मों का कहना है कि Waaree Energies पर इसका असर नहीं पड़ेगा. diversified sourcing, अमेरिका में बढ़ती मैन्युफैक्चरिंग और ग्रीन हाइड्रोजन जैसे नए बिजनेस इसे लंबे समय के लिए एक सुरक्षित दांव बनाते हैं.
Waaree Energies Target Price: अमेरिका की ओर से भारतीय सोलर कंपनियों पर 126% काउंटरवेलिंग ड्यूटी (CVD) की खबर सामने आते ही बाजार में घबराहट दिखी और कई ग्रीन एनर्जी शेयरों में तेज करेक्शन आया. Waaree Energies भी इससे अछूता नहीं रहा. लेकिन देश की दो बड़ी ब्रोकरेज फर्म- Nuvama Equities और Emkay Global का कहना है कि यह डर जरूरत से ज्यादा था और Waaree Energies पर इस टैरिफ का वास्तविक असर लगभग न के बराबर होगा. दोनों फर्मों का मानना है कि Waaree का बिजनेस मॉडल, सप्लाई चेन और अमेरिका में बढ़ती मौजूदगी इसे आने वाले वर्षों के लिए एक सुरक्षित और मजबूत ग्रीन एनर्जी कंपनी बनाती है.
126% टैरिफ की असल सच्चाई क्या है
अमेरिका ने भारत, इंडोनेशिया और लाओस से आने वाले सोलर पीवी प्रोडक्ट्स पर 126% की प्रारंभिक CVD लगाने की घोषणा की है. पहली नजर में यह बहुत बड़ा झटका लगता है, लेकिन Waaree का कहना है कि यह ड्यूटी सोलर मॉड्यूल पर नहीं, बल्कि सोलर सेल के देशीय मूल (origin) पर आधारित है. Waaree अमेरिका को सप्लाई किए जाने वाले मॉड्यूल्स में भारतीय सेल का इस्तेमाल नहीं करता. कंपनी ऐसे देशों से सेल खरीदती है, जहां अमेरिकी ड्यूटी करीब 10% ही है. इसी वजह से 126% की भारी-भरकम ड्यूटी Waaree के ऑर्डर बुक या ऑपरेशंस को प्रभावित नहीं करती.
अमेरिका में मजबूत मौजूदगी बनी सुरक्षा कवच
Waaree सिर्फ भारत से एक्सपोर्ट पर निर्भर नहीं है. ब्रोकरेज फर्म का कहना है कि अमेरिका में कंपनी की म मैन्युफैक्चरिंग यूनिट पहले से मौजूद है और वह इनकी क्षमता तेजी से बढ़ा रही है. फिलहाल उसकी US क्षमता 2.6GW है, जिसे मिड-2026 तक 4.2GW तक ले जाने की योजना है. एरिजोना में 1GW की यूनिट और टेक्सास में 1.6GW का विस्तार Waaree को लोकल मैन्युफैक्चरर की ताकत देता है. इससे न केवल टैरिफ रिस्क घटता है, बल्कि अमेरिका के सख्त FEOC और नॉन-चाइना नियमों का पालन भी आसान हो जाता है.
सिर्फ सोलर मॉड्यूल नहीं, ग्रीन हाइड्रोजन में पहली बड़ी एंट्री
ब्रोकरेज रिपोर्ट्स में एक अहम बात यह भी है कि Waaree अब केवल सोलर मॉड्यूल या सेल कंपनी नहीं रही. कंपनी खुद को पूरी तरह इंटीग्रेटेड ग्रीन एनर्जी प्लेयर में बदल रही है. Polysilicon से लेकर मॉड्यूल तक, इनवर्टर, ट्रांसफॉर्मर, बैटरी एनर्जी स्टोरेज सिस्टम और इलेक्ट्रोलाइज़र, हर सेगमेंट में निवेश किया जा रहा है. ओमान में polysilicon कंपनी में USD 30 मिलियन का निवेश इसका उदाहरण है, जिससे Waaree को ट्रेसेबल और नॉन-चाइनीज सप्लाई चेन मिलेगी.
Waaree ने ग्रीन हाइड्रोजन और इलेक्ट्रोलाइजर बिजनेस में भी कदम रख दिया है. कंपनी को उत्तर प्रदेश में 2.5MW अल्कलाइन इलेक्ट्रोलाइजर का 15 साल का EaaS ऑर्डर मिला है. इसके अलावा 50MW के और ऑर्डर को लेकर MoU भी साइन किया गया है. ब्रोकरेज का मानना है कि अगले 3-5 साल में ये नए बिजनेस Waaree की कमाई में बड़ा योगदान दे सकते हैं.
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मजबूत बैलेंस शीट और ब्रोकरेज का भरोसा
Nuvama और Emkay दोनों का कहना है कि Waaree की फाइनेंशियल स्थिति मजबूत है. IPO से मिले अप्रयुक्त फंड, बेहतर ऑपरेटिंग कैश फ्लो और हर साल मजबूत EBITDA कंपनी को बड़े कैपेक्स प्लान संभालने में मदद करेंगे. इसी भरोसे के साथ Nuvama ने Waaree पर BUY रेटिंग बरकरार रखते हुए करीब ₹3,867 का टारगेट प्राइस दिया है, जबकि Emkay ने इसे और ऊंचा, करीब ₹4,260 तक आंका है. इससे ये साफ है कि 126% टैरिफ को लेकर बाजार में वॉरी एनर्जी को लेकर घबराने की जरूरत नहीं है.
क्या है शेयरों का हाल?
बुधवार को कंपनी के शेयरों में 15 फीसदी की तेज गिरावट देखने को मिली थी लेकिन आज इसमें रिकवरी देखने को मिल रही है. सुबह 11.35 बजे कंपनी के शेयर 1.2 फीसदी के साथ 2,735 रुपये पर ट्रेड कर रहे थे. मौजूदा मार्केट कैप 77,909 करोड़ रुपये है. बीते एक वर्ष में कंपनी के शेयरों में 20 फीसदी की तेजी देखने को मिली है. ब्रोकरेज फर्म के टारगेट प्राइस के मुताबिक, कंपनी के शेयरों में अभी 56 फीसदी के करीब तेजी बाकी है.
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