विजय केडिया और FIIs टाटा के इस शेयर से बना रहें दूरी, 831% दिया रिटर्न, फिर क्यों टूटा निवेशकों का भरोसा
टाटा ग्रुप की कंपनी तेजस नेवकर्स एक समय निवेशकों की फेवरेट थी. इसने मल्टीबैगर रिटर्न भी दिया, लेकिन कुछ समय से कंपनी के शेयरों में गिरावट देखने को मिल रही है. इस कंपनी से जुड़े दिग्गज निवेशक विजय केडिया समेत विदेशी निवेशक इस स्टॉक से दूरी बना रहे हैं, तो क्या है इसके पीछे वजह, आइए जानते हैं.
Tejas Networks share price: टाटा ग्रुप की कंपनी तेजस नेटवर्कस जिसने कभी निवेशकों को मल्टीबैगर रिटर्न देकर सुर्खियां बटोरी थीं, आज मुश्किल दौर से गुजर रही है. कंपनी का शेयर मंगलवार, 26 अगस्त 2025 को 2.08% टूटकर 608.20 रुपये पर आ गया, जो पिछले बंद भाव 621.15 रुपये से कम है. बीते एक साल में शेयर ने 51.6% का नकारात्मक रिटर्न दिया है. 10973 करोड़ रुपये के मार्केट कैप वाली इस कंपनी से दिग्गज निवेशक विजय केडिया समेत विदेशी निवेशकों की हिस्सेदारी थी, लेकिन धीरे-धीरे इस स्टॉक से उनका मोहभंग हो रहा है, तो आखिर क्या वजह है जिससे निवेशक इस कंपनी से बना रहें दूरियां, आइए समझते हैं.
आसमान छू रही थी कंपनी
साल 2020 में Tejas Networks की तिमाही आय सिर्फ 50-100 करोड़ रुपये थी. लेकिन BSNL जैसे बड़े क्लाइंट्स से ऑर्डर मिलने के बाद कंपनी की किस्मत पलट गई. 2023 के अंत तक तिमाही बिक्री 500 करोड़ रुपये को पार कर गई, और दिसंबर 2024 की तिमाही में यह 2,500 करोड़ रुपये तक पहुंच गई. इस शानदार उछाल ने निवेशकों में जोश भरा, जिससे शेयर आसमान छूने लगा, लेकिन FY25 के अंत तक तस्वीर बदलने लगी.
शेयरों ने दिया था धांसू रिटर्न
Tejas Networks के शेयरों की कीमत अभी 609.40 रुपये है. एक हफ्ते से इसमें 5 फीसदी से ज्यादा तेजी देखने को मिली. मगर 3 साल में इसने 15 फीसदी से ज्यादा और 5 साल में 823 फीसदी तक का रिटर्न दिया है. हालांकि एक महीने से इसमें गिरावट देखने को मिली है.
निवेशकों का मोहभंग
तेजस नेटवर्कस के शेयरों ने लॉन्ग टर्म में भले ही मल्टीबैगर रिटर्न दिया हो और ये निवेशकों का फेवरेट भी रहा है, लेकिन पिछले दो साल में FIIs ने इसमें अपनी हिस्सेदारी घटाई है. ट्रेडब्रेन्स के मुताबिक विदेशी निवेशकों ने तेजस नेटवर्कस में अपनी हिस्सेदारी 11% से घटाकर 6% कर दी है. इतना ही नहीं मशहूर निवेशक विजय केडिया ने भी अपनी ज्यादातर हिस्सेदारी बेच दी है. ट्रेंडलाइन के मुताबिक मार्च 2025 तक कंपनी में विजय केडिया की 1 फीसदी हिस्सेदारी थी, लेकिन जून 2025 में पहली बार उनकी हिस्सेदारी 1 फीसदी से घटकर नीचे आ गई है.
क्यों शेयरों पर बढ़ा दबाव?
जानकारों के मुताबिक कंपनी का भले ही मुनाफा बढ़ा हो, लेकिन कैश फ्लो कमजोर रहा है. इसके अलावा बढ़ते इन्वेंट्री लेवल ने कंपनी के कैश कन्वर्जन साइकिल को दबाव में डाला है. इसके अलावा ऑर्डर बुक में ठहराव ने भी भविष्य की ग्रोथ पर सवाल उठाए हैं. मार्च 2025 की तिमाही में कंपनी फिर से घाटे में चली गई. 100 करोड़ रुपये से ज्यादा की पुरानी इन्वेंट्री को राइट-ऑफ करना पड़ा, जिसके चलते 62 करोड़ रुपये का स्टैंडअलोन नुकसान हुआ. रेवेन्यू भले ही 38% बढ़कर 1,800 करोड़ रुपये रहा, लेकिन बाकी चीजें कमजोर होने की वजह से कंपनी के शेयर लुढ़कते जा रहे हैं.
डिस्क्लेमर: Money9live किसी स्टॉक, म्यूचुअल फंड, आईपीओ में निवेश की सलाह नहीं देता है. यहां पर केवल स्टॉक्स की जानकारी दी गई है. निवेश से पहले अपने वित्तीय सलाहकार की राय जरूर लें.
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