Bonus देने के नाम पर गोला दे रहे साइबर ठग, बुजुर्ग बन रहे निशाना, सरकार ने जारी की चेतावनी, ऐसे रहें सेफ
देश में साइबर ठग अब रिटायर्ड बुजुर्गों को निशाना बना रहे हैं. खुद को बैंक या सरकारी अधिकारी बताकर पेंशन ‘बोनस’ का लालच दिया जा रहा है और ओटीपी के जरिए खाते खाली किए जा रहे हैं. बढ़ते मामलों के बीच साइबर एजेंसियों ने सतर्क रहने की सख्त चेतावनी जारी की है.
Cyber Fraud: देशभर में साइबर अपराधियों ने अब रिटायर्ड बुजुर्गों को अपना निशाना बनाना शुरू कर दिया है. ये ठग सरकारी अधिकारी या बैंक कर्मचारी बनकर पेंशनधारकों को ‘बोनस’ देने का लालच देते हैं, लेकिन असल में उनका मकसद बैंक खातों से पेंशन की रकम साफ करना होता है. भारतीय साइबरक्राइम कोऑर्डिनेशन सेंटर (I4C) की ओर से जारी एक हालिया चेतावनी में इस घोटाले की जानकारी दी गई है, जहां ठग ओटीपी मांगकर लाखों रुपये की ठगी कर रहे हैं. स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (SBI) जैसी संस्थाओं ने भी पेंशनर्स को ऐसे फ्रॉड से सावधान रहने की सलाह दी है. हाल के महीनों में ऐसे कई मामले सामने आए हैं, जहां डेटा लीक का फायदा उठाकर ठग बुजुर्गों का विश्वास जीतते हैं और फिर ओटीपी के जरिए उनके खाते खाली कर देते हैं. सरकार और साइबर विशेषज्ञों का कहना है कि जागरूकता ही इससे बचाव का सबसे बड़ा हथियार है.
ये ठगी कैसे होती है
साइबर ठग आमतौर पर फोन कॉल या मैसेज के जरिए संपर्क करते हैं. वे खुद को सरकारी पेंशन विभाग या बैंक अधिकारी बताते हैं और कहते हैं कि आपको विशेष बोनस या पेंशन अपडेट का लाभ मिल रहा है. इस लाभ को आपके खाते में क्रेडिट करने के लिए वेरिफिकेशन की जरूरत बताकर ओटीपी, बैंक डिटेल्स या मोबाइल नंबर चेंज का बहाना बनाते हैं. जैसे ही बुजुर्ग ओटीपी शेयर करते हैं, ठग तुरंत बैंक ऐप या नेट बैंकिंग के जरिए खाते से पैसे ट्रांसफर कर लेते हैं. कई मामलों में, ठग जीवन प्रमाण पत्र (लाइफ सर्टिफिकेट) या PPO (पेंशन पेमेंट ऑर्डर) अपडेट के नाम पर भी ठगी करते हैं, जहां वे पेंशन रोकने की धमकी देकर संवेदनशील जानकारी मांगते हैं. हाल के एक मामले में, केरल में डेटा लीक के बाद ठगों ने पेंशन डिटेल्स पढ़कर विश्वास जीता और फिर ओटीपी लेकर लाखों रुपये उड़ा लिए.
बचाव के तरीके
इस तरह की ठगी से बचने के लिए सबसे महत्वपूर्ण है कि कभी भी अनजान व्यक्ति से ओटीपी, पिन या बैंक डिटेल्स शेयर न करें. सरकारी योजनाओं या पेंशन से जुड़ी कोई भी जानकारी केवल आधिकारिक स्रोतों से ही लें. पेंशन संबंधी पूछताछ के लिए आधिकारिक हेल्पलाइन 1800-11-1960 पर संपर्क करें. अनजान कॉल्स पर भरोसा न करें. कॉलर की पहचान जांचें और बैंक या सरकारी वेबसाइट पर जाकर खुद वेरिफाई करें. इसके अलावा, सोशल मीडिया पर आने वाले लिंक्स या मैसेज पर क्लिक करने से बचें, क्योंकि ये अक्सर फेक होते हैं. बुजुर्गों को सलाह है कि वे परिवार के सदस्यों से सलाह लें और टू-फैक्टर ऑथेंटिकेशन को मजबूत रखें. सरकार की ओर से जारी अलर्ट्स, जैसे साइबरदोस्त के पोस्टर्स, को फॉलो करें ताकि नए घोटालों से अवगत रहें.
कहां करें शिकायत
यदि आप या आपके जानने वाले इस तरह की ठगी के शिकार हो गए हैं, तो तुरंत साइबरक्राइम हेल्पलाइन 1930 पर कॉल करें. ऑनलाइन शिकायत के लिए www.cybercrime.gov.in वेबसाइट पर जाएं और डिटेल्स दर्ज करें. इसके अलावा, लोकल पुलिस स्टेशन में FIR दर्ज कराएं. जितनी जल्दी शिकायत करेंगे, उतनी ही जल्दी रकम रिकवर करने की संभावना बढ़ेगी. साइबर विशेषज्ञों का कहना है कि समय पर रिपोर्टिंग से ठगों को ट्रैक करना आसान होता है.