VI के AGR पेमेंट का सामने आया प्लान; शेयरों में तेजी, 2031 तक हर साल चुकाने होंगे केवल 124 करोड़ रुपये
वोडाफोन आइडिया ने साफ किया है कि उसके पुराने AGR बकाया को लेकर भुगतान का नया शेड्यूल तय कर दिया गया है. इससे कंपनी पर अचानक भारी रकम चुकाने का दबाव नहीं रहेगा. यह फैसला ऐसे समय आया है, जब कंपनी अपने कारोबार को संभालने और ग्राहकों को बनाए रखने की कोशिश कर रही है.
Vodafone idea: देश की टेलीकॉम कंपनी वोडाफोन आइडिया के लिए राहत की खबर आई है. लंबे समय से भारी कर्ज और AGR बकाया के बोझ से जूझ रही कंपनी को सरकार की ओर से बड़ा सहारा मिला है. AGR यानी एडजस्टेड ग्रॉस रेवेन्यू को लेकर कंपनी की मुश्किलें कई सालों से चल रही हैं. इसी वजह से कंपनी की आर्थिक हालत कमजोर होती चली गई और नेटवर्क विस्तार में भी दिक्कतें आईं.
अब वोडाफोन आइडिया ने साफ किया है कि उसके पुराने AGR बकाया को लेकर भुगतान का नया शेड्यूल तय कर दिया गया है. इससे कंपनी पर अचानक भारी रकम चुकाने का दबाव नहीं रहेगा. यह फैसला ऐसे समय आया है, जब कंपनी अपने कारोबार को संभालने और ग्राहकों को बनाए रखने की कोशिश कर रही है.
AGR बकाया पर क्या हुआ फैसला
वोडाफोन आइडिया ने जानकारी दी है कि वित्त वर्ष 2006-07 से लेकर 2018-19 तक के AGR बकाया पर अब 31 दिसंबर 2025 के बाद कोई अतिरिक्त बढ़ोतरी नहीं होगी. यानी इस तारीख के बाद AGR राशि फ्रीज कर दी जाएगी. कंपनी के मुताबिक उसे मार्च 2026 से मार्च 2031 तक अगले छह सालों में हर साल 124 करोड़ रुपये का भुगतान करना होगा.
आगे कैसे होगा भुगतान
वोडाफोन आइडिया ने बताया कि पहले छह साल के बाद भुगतान की राशि कुछ कम हो जाएगी. मार्च 2032 से मार्च 2035 तक कंपनी को हर साल 100 करोड़ रुपये चुकाने होंगे. इसके बाद जो भी AGR बकाया बचेगा, उसका भुगतान मार्च 2036 से मार्च 2041 के बीच छह बराबर सालाना किश्तों में किया जाएगा. इस तरह कंपनी को एक लंबा समय मिल गया है, जिससे वह अपने नकदी प्रवाह को बेहतर तरीके से संभाल सके.
कंपनी ने यह भी कहा है कि दूरसंचार विभाग यानी Dot की ओर से एक समिति बनाई जाएगी. यह समिति AGR बकाया की दोबारा समीक्षा करेगी. समिति जो भी फैसला लेगी, वही अंतिम माना जाएगा. इससे कंपनी को उम्मीद है कि AGR से जुड़ी कुछ पुरानी गड़बड़ियों पर राहत मिल सकती है.
AGR आखिर है क्या
AGR यानी एडजस्टेड ग्रॉस रेवेन्यू वह आय होती है, जिस पर टेलीकॉम कंपनियों को सरकार को लाइसेंस फीस और स्पेक्ट्रम शुल्क देना होता है. इसमें सिर्फ टेलीकॉम सेवाओं से होने वाली कमाई ही नहीं, बल्कि ब्याज, किराया और संपत्ति बिक्री जैसी गैर-टेलीकॉम आय भी शामिल की जाती है. इसी परिभाषा को लेकर पहले विवाद हुआ था, जिसके चलते कंपनियों पर भारी बकाया निकल आया.
क्यों मुश्किल में थी वोडाफोन आइडिया
वोडाफोन आइडिया कई सालों से आर्थिक संकट से गुजर रही है. तेज कीमतों की प्रतिस्पर्धा, भारी AGR बकाया और ऊंचा कर्ज इसकी बड़ी वजह रहे हैं. कंपनी को लगातार घाटा हुआ है. ग्राहकों की संख्या भी घटी है. वहीं दूसरी ओर, दूसरी टेलीकॉम कंपनियों ने तेजी से 4जी और 5जी नेटवर्क का विस्तार किया. पैसों की कमी के कारण वोडाफोन आइडिया नेटवर्क सुधार और विस्तार में उतना निवेश नहीं कर पाई.
शेयरों पर दिखा पॉजिटिव असर
वोडाफोन आइडिया के शेयर में आज हल्की तेजी देखने को मिली. शेयर 2.70 फीसदी की बढ़त के साथ सुबह 09 बजे तक 11.81 रुपये पर ट्रेड कर रहा है. कारोबार के दौरान शेयर ने 11.70 रुपये का निचला स्तर और 12.52 रुपये का ऊपरी स्तर छुआ. पिछले कारोबारी दिन शेयर का बंद भाव 11.50 रुपये था, जबकि आज यह 12.20 रुपये पर खुला.
बीते 52 हफ्तों की बात करें तो वोडाफोन आइडिया का न्यूनतम स्तर 6.12 रुपये और अधिकतम स्तर 12.80 रुपये रहा है. आज शेयर में जबरदस्त कारोबार देखने को मिला. करीब 82 करोड़ 36 लाख शेयरों का लेनदेन हुआ और कुल ट्रेड वैल्यू लगभग 973 करोड़ रुपये रही.

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