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ट्रंप प्रशासन को झटका! सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद कंपनियों को टैरिफ की रकम वापस करने का आदेश

अमेरिका में ट्रंप प्रशासन के दौरान लगाए गए आयात शुल्क को लेकर अदालत का बड़ा फैसला आया है. सुप्रीम कोर्ट के बाद अब न्यूयॉर्क की ट्रेड कोर्ट ने कंपनियों को टैरिफ रिफंड का हकदार बताया है, जिससे अरबों डॉलर की वापसी का रास्ता खुल सकता है.

Trump Tariff Refund Image Credit: AI Generated

Trump Tarriff Refund: अमेरिका में राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के लगाए गए टैरिफ को लेकर बड़ा अपडेट सामने आया है जो व्यापारियों के लिए राहत की खबर है. न्यूयॉर्क की एक फेडरल अदालत ने फैसला दिया है कि जिन कंपनियों ने ट्रंप प्रशासन के दौरान लगाए गए टैरिफ का भुगतान किया था, वे अब उसके रिफंड की हकदार हैं. इस फैसले के साथ ही अमेरिकी सरकार पर अरबों डॉलर लौटाने की जिम्मेदारी आ गई है. सुप्रीम कोर्ट पहले ही इन टैरिफ को असंवैधानिक बता चुका है, और अब अदालत का नया आदेश रिफंड प्रक्रिया को आगे बढ़ाने का रास्ता साफ कर रहा है.

सुप्रीम कोर्ट ने टैरिफ को बताया असंवैधानिक

अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने पिछले महीने ट्रंप प्रशासन द्वारा लगाए गए कई आयात शुल्क को असंवैधानिक करार दिया था. ये टैरिफ 1977 के International Emergency Economic Powers Act (IEEPA) के तहत लगाए गए थे. ट्रंप ने इस कानून का इस्तेमाल करते हुए कई देशों पर दो अंकों तक के आयात शुल्क लगा दिए थे, जिनमें तथाकथित “reciprocal tariffs” भी शामिल थे.

सुप्रीम कोर्ट के बहुमत ने कहा कि राष्ट्रपति को अकेले टैरिफ तय करने या बदलने का अधिकार नहीं है, क्योंकि टैक्स लगाने का अधिकार संविधान के अनुसार अमेरिकी कांग्रेस के पास है.

न्यूयॉर्क अदालत का अहम आदेश

अमेरिका की US Court of International Trade के जज रिचर्ड ईटन ने बुधवार को अपने फैसले में कहा कि जिन आयातकों ने ये शुल्क चुकाया है, वे सुप्रीम कोर्ट के फैसले का लाभ लेने के हकदार हैं. उन्होंने कहा कि ऐसे मामलों की सुनवाई अब इसी अदालत में होगी और रिफंड से जुड़े विवाद यहीं तय किए जाएंगे.

यह फैसला खास तौर पर Atmus Filtration नाम की एक कंपनी के मामले में दिया गया, जो टेनेसी के नैशविल में फिल्टर और अन्य फिल्ट्रेशन प्रोडक्ट बनाती है. कंपनी ने दावा किया था कि उसे टैरिफ का रिफंड मिलना चाहिए.

175 अरब डॉलर तक पहुंच सकता है रिफंड

रिपोर्ट्स के अनुसार अमेरिकी सरकार ने दिसंबर के मध्य तक इन टैरिफ के जरिए 130 अरब डॉलर से ज्यादा की रकम वसूल की थी. पेन व्हार्टन बजट मॉडल के अनुमान के मुताबिक कुल रिफंड की रकम 175 अरब डॉलर तक पहुंच सकती है. कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि सरकार इस फैसले के खिलाफ अपील कर सकती है या प्रक्रिया को रोकने के लिए समय मांग सकती है.

यह भी पढ़ें: फिर पड़ेगी टैरिफ की मार! ट्रंप प्रशासन इसे 15% तक बढ़ाने की कर रहा तैयारी, अमेरिकी ट्रेजरी सेक्रेटरी ने दिए संकेत

कस्टम विभाग के सामने बड़ी चुनौती

पीटीआई की रिपोर्ट के मुताबिक, अदालत ने अमेरिकी कस्टम और बॉर्डर प्रोटेक्शन एजेंसी को निर्देश दिया है कि जिन मामलों की “लिक्विडेशन” प्रक्रिया चल रही है, उनमें इन टैरिफ की वसूली तुरंत रोक दी जाए. अगर किसी आयात का अंतिम हिसाब पहले ही हो चुका है, तो उसे बिना टैरिफ के दोबारा गणना करनी होगी.

विशेषज्ञों के अनुसार कस्टम विभाग आम तौर पर गलती होने पर टैरिफ रिफंड करता है, लेकिन इतने बड़े पैमाने पर रिफंड देने की व्यवस्था उसके सिस्टम में पहले से मौजूद नहीं है. ऐसे में आने वाले समय में प्रशासनिक प्रक्रिया और कानूनी विवाद इस मामले को और जटिल बना सकते हैं.