RIL के शेयरों में करेक्शन खत्म? JM Financial ब्रोकरेज का दावा अब खरीदारी का मौका, जानें क्यों मिली BUY रेटिंग

रिलायंस इंडस्ट्रीज के शेयरों में हालिया गिरावट के बाद अब ब्रोकरेज फर्मों को इसमें नया मौका नजर आ रहा है. मोतीलाल ओसवाल का मानना है कि शेयर की गिरावट जरूरत से ज्यादा हो चुकी है और कंपनी के बिजनेस मॉडल के चलते आगे इसमें तेजी देखने को मिल सकती है.

RIL Target Price Image Credit: AI Generated

RIL Target Price: पिछले कुछ समय से रिलायंस इंडस्ट्रीज (RIL) के शेयरों में गिरावट देखने को मिली है. वेस्ट एशिया में बढ़ते तनाव और विदेशी निवेशकों की बिकवाली के कारण स्टॉक पर दबाव बना रहा है. हालांकि अब कई ब्रोकरेज हाउस मानते हैं कि यह गिरावट जरूरत से ज्यादा हो गई है और मौजूदा स्तर पर शेयर आकर्षक वैल्यूएशन पर मिल रहा है. इसी वजह से ब्रोकरेज फर्म Motilal Oswal ने RIL पर फिर से भरोसा जताते हुए निवेशकों को इसे खरीदने की सलाह दी है. ब्रोकरेज का मानना है कि कंपनी के मजबूत बिजनेस मॉडल और आने वाले ट्रिगर्स के कारण आने वाले वर्षों में इसकी कमाई में अच्छी बढ़ोतरी हो सकती है.

क्यों जरूरत से ज्यादा थी गिरावट

हाल के दिनों में मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव के कारण कच्चे तेल और LNG की कीमतों में तेज उछाल देखने को मिला. इसके बाद RIL के शेयर में भी करीब 4 फीसदी की गिरावट एक हफ्ते में और करीब 8 फीसदी की गिरावट एक महीने में दर्ज की गई.

ब्रोकरेज का कहना है कि यह गिरावट कंपनी के बिजनेस के लिहाज से ज्यादा बड़ी है, क्योंकि कच्चे तेल की कीमतों में बढ़ोतरी से कंपनी को नुकसान होने के बजाय कुछ मामलों में फायदा भी हो सकता है.

डीजल मार्जिन बढ़ने से हो सकता है फायदा

विश्लेषकों के अनुसार हाल के दिनों में डीजल क्रैक स्प्रेड में तेज उछाल आया है, जो लगभग 20 डॉलर प्रति बैरल से बढ़कर 35-42 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गया है.

रिलायंस की रिफाइनरी में डीजल का प्रोडक्शन काफी ज्यादा होता है, इसलिए अगर डीजल मार्जिन ऊंचा बना रहता है तो कंपनी की ग्रॉस रिफाइनिंग मार्जिन (GRM) भी बढ़ सकती है. अनुमान है कि अगर डीजल क्रैक करीब 30 डॉलर प्रति बैरल के आसपास रहता है तो कंपनी का GRM 4-5 डॉलर प्रति बैरल तक बढ़ सकता है.

पेट्रोकेमिकल बिजनेस से भी मिल सकता है सहारा

ब्रोकरेज का मानना है कि कच्चे तेल की कीमत बढ़ने पर पेट्रोकेमिकल उत्पादों के दाम भी बढ़ते हैं. लेकिन रिलायंस के पेट्रोकेमिकल बिजनेस की लागत उतनी तेजी से नहीं बढ़ती क्योंकि कंपनी का कच्चे तेल से जुड़ा नाफ्था फीडस्टॉक पर निर्भरता केवल करीब 25 फीसदी है.

कंपनी के फीडस्टॉक का बड़ा हिस्सा इथेन और ऑफ-गैस से आता है, जिससे लागत पर दबाव कम पड़ता है और मार्जिन बेहतर रह सकते हैं.

विदेशी निवेशकों की बिकवाली से आया दबाव

ब्रोकरेज का कहना है कि शेयर में हालिया गिरावट का बड़ा कारण विदेशी संस्थागत निवेशकों (FII) की बिकवाली है. दिसंबर 2025 तक कंपनी में FII की हिस्सेदारी 21.1 फीसदी थी, जबकि मार्च 2021 में यह करीब 28.3 फीसदी के उच्च स्तर पर थी.

चूंकि RIL विदेशी निवेशकों के पोर्टफोलियो में एक बड़ा और लिक्विड स्टॉक है, इसलिए बाजार में अस्थिरता के दौरान इसमें बिकवाली ज्यादा देखने को मिलती है.

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BUY रेटिंग और टारगेट प्राइस

Motilal Oswal ने RIL पर BUY रेटिंग बरकरार रखी है और इसका टारगेट प्राइस 1,730 रुपये तय किया है. ब्रोकरेज का मानना है कि मौजूदा स्तर पर शेयर काफी आकर्षक वैल्यूएशन पर मिल रहा है. विश्लेषकों के अनुसार आने वाले समय में कंपनी के लिए कुछ बड़े ट्रिगर्स हो सकते हैं. इनमें Jio का संभावित IPO, टेलीकॉम सेक्टर में संभावित टैरिफ बढ़ोतरी, और डिजिटल बिजनेस में मजबूत ग्रोथ शामिल हैं.

ब्रोकरेज का अनुमान है कि अगले 3-5 वर्षों में कंपनी की EPS ग्रोथ 14-16 फीसदी तक रह सकती है.

डिस्क्लेमर: Money9live किसी स्टॉक, म्यूचुअल फंड, आईपीओ में निवेश की सलाह नहीं देता है. यहां पर केवल स्टॉक्स की जानकारी दी गई है. निवेश से पहले अपने वित्तीय सलाहकार की राय जरूर लें.