फर्जी लोन के नाम पर ठगी, सरकार ने जारी की चेतावनी, सेफ रहने के लिए अपनाएं ये तरीके
देश में फेक लोन ऐप्स की ठगी का कहर बढ़ता जा रहा है. इंस्टेंट लोन के नाम पर स्कैमर्स लोगों को फंसाकर लाखों रुपये लूट रहे हैं. फर्जी ऐप्स, एडवांस फीस की मांग और ब्लैकमेलिंग के जरिए हजारों परिवार प्रभावित हुए हैं. 2025-26 में ऐसे मामलों में 30% की वृद्धि दर्ज हुई. जानिए ठगी कैसे होती है, बचाव के आसान तरीके और शिकायत दर्ज करने की सही प्रक्रिया.
Cyber Fraud: देशभर में डिजिटल लोन की बढ़ती लोकप्रियता के बीच फेक लोन ऐप्स और स्कैमर्स की ठगी तेजी से बढ़ रही है. हाल के महीनों में, हजारों लोग इन जालसाजों के शिकार हो चुके हैं, जहां इंस्टेंट लोन के नाम पर पर्सनल डेटा चोरी, एडवांस फीस की मांग और यहां तक कि ब्लैकमेलिंग तक की घटनाएं सामने आई हैं. विशेषज्ञों का कहना है कि 2025-2026 में ऐसे स्कैम्स में 30% की वृद्धि दर्ज की गई है, खासकर ग्रामीण और कम आय वाले लोगों को टारगेट करके. इस रिपोर्ट में हम बताते हैं कि ये ठगी कैसे होती है, बचाव के तरीके और ठगी होने पर शिकायत कहां दर्ज कराएं.
ठगी कैसे होती है?
- फेक लोन स्कैम्स आमतौर पर सोशल मीडिया, एसएमएस या अनजान कॉल्स से शुरू होते हैं. स्कैमर्स खुद को बैंक या एनबीएफसी के प्रतिनिधि बताते हैं और ‘इंस्टेंट लोन’ का लालच देते हैं – बिना डॉक्यूमेंट्स, कम ब्याज दर और तुरंत अप्रूवल का वादा.
- फेक ऐप्स डाउनलोड करवाना: स्कैमर्स फर्जी लोन ऐप्स बनाते हैं जो गूगल प्ले स्टोर पर भी उपलब्ध दिखते हैं. ऐप इंस्टॉल करने पर ये फोन की कॉन्टैक्ट्स, फोटोज और बैंक डिटेल्स तक एक्सेस मांगते हैं. डेटा चुराने के बाद, वे ब्लैकमेल करते हैं या आइडेंटिटी थेफ्ट के लिए इस्तेमाल करते हैं.
- एडवांस फी की मांग: लोन अप्रूव करने के नाम पर प्रोसेसिंग फी, टैक्स या डॉक्यूमेंट फी मांगी जाती है. पैसे ट्रांसफर करने के बाद स्कैमर्स गायब हो जाते हैं.
- फिशिंग और आइडेंटिटी थेफ्ट: ईमेल या मैसेज से पर्सनल डिटेल्स जैसे PAN, आधार या बैंक अकाउंट मांगे जाते हैं. इनका इस्तेमाल करके आपके नाम पर फर्जी लोन ले लिए जाते हैं, जिससे आपका क्रेडिट स्कोर खराब होता है.
- डीपफेक टेक्नोलॉजी: नए ट्रेंड में AI से फेक वॉइस या वीडियो बनाकर लोगों को धोखा दिया जाता है.
बचाव के तरीके
विशेषज्ञों के मुताबिक, थोड़ी सावधानी से इन स्कैम्स से बचा जा सकता है. यहां कुछ जरूरी टिप्स:
- लेंडर को वेरिफाई करें: हमेशा RBI-रजिस्टर्ड बैंक या एनबीएफसी से लोन लें. RBI की वेबसाइट पर चेक करें कि ऐप या कंपनी वैध है या नहीं. फेक ऐप्स में अक्सर स्पेलिंग मिस्टेक्स या कम रिव्यूज होते हैं.
- एडवांस फी न दें: कोई भी वैध लेंडर लोन देने से पहले फी नहीं मांगता. अगर मांगे, तो तुरंत रिजेक्ट करें.
- पर्सनल डेटा शेयर न करें: अनजान कॉल्स या मैसेज पर आधार, PAN या OTP कभी न दें. ऐप की अनुमति सीमित रखें.
- रिव्यूज और रेटिंग्स चेक करें: ऐप डाउनलोड करने से पहले गूगल प्ले स्टोर पर रिव्यूज पढ़ें. अगर नेगेटिव फीडबैक ज्यादा है, तो इससे बचें.
ठगी होने पर शिकायत कहां करें?
यदि आप साइबर ठगी का शिकार हो जाते हैं, तो तुरंत कार्रवाई करें. सबसे पहले बैंक अकाउंट फ्रीज करवाएं और पुलिस में FIR दर्ज कराएं. साइबर क्राइम की शिकायत के लिए राष्ट्रीय हेल्पलाइन 1930 पर कॉल करें या cybercrime.gov.in पर ऑनलाइन कंप्लेंट दर्ज करें. यह पोर्टल I4C (Indian Cyber Crime Coordination Centre) द्वारा चलाया जाता है. यदि आधार या PAN से जुड़ी जानकारी चोरी हुई है, तो संबंधित सर्विसेज को लॉक करवाएं. कई बैंक अपने ऐप में फ्रॉड रिपोर्टिंग का विकल्प देते हैं. जितनी जल्दी रिपोर्ट करेंगे, रिकवरी की संभावना उतनी ही बढ़ेगी.