ईरान-USA युद्ध से भारत को इनडायरेक्ट फायदा, दुबई-ओमान से शिफ्ट होंगे डेटा सेंटर! Microsoft, Amazon की बड़ी तैयारी
पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बीच बड़ी क्लाउड कंपनियां Amazon Web Services और Microsoft Azure अपने डेटा सेंटर वर्कलोड को दुबई अबू धाबी और ओमान से भारत और सिंगापुर जैसे सुरक्षित देशों में शिफ्ट करने पर विचार कर रही हैं. रिपोर्ट के अनुसार मुंबई चेन्नई हैदराबाद और कोच्चि में तुरंत डेटा सेंटर क्षमता की तलाश की जा रही है.
पश्चिम एशिया में जारी युद्ध से भले ही भारत में तेल और गैस के कीमतों में बढ़ोतरी देखी जा रही है. लेकिन एक सेक्टर ऐसा भी है जहां पर इस युद्ध से भारत को फायदा हो सकता है. दरअसल युद्ध के चलते कई बड़ी क्लाउड कंपनियां जिसमें Amazon Web Services और Microsoft Azure शामिल है अपने कुछ डेटा सेंटर अरब देशों से दूसरे जगह शिफ्ट करने पर विचार कर रही हैं. रिपोर्ट के मुताबिक दुबई, अबू धाबी और ओमान से डेटा वर्कलोड को भारत और सिंगापुर में शिफ्ट किया जा सकता है. कंपनियां खासकर बैंकिंग और जरूरी डिजिटल सर्विस को सुरक्षित रखने के लिए नए विकल्प तलाश रही हैं. इस कारण भारत के कई शहरों में डेटा सेंटर क्षमता की मांग तेजी से बढ़ सकती है.
पश्चिम एशिया तनाव के कारण बढ़ी चिंता
इकोनॉमिक्स टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक, पश्चिम एशिया में हाल के दिनों में तनाव बढ़ने से कई टेक सर्विस प्रभावित हुई हैं. रिपोर्ट के अनुसार यूएई और बहरीन में AWS के कुछ डेटा सेंटर पर ड्रोन हमलों की खबर सामने आई थी. इससे बैंकिंग ऐप एयरपोर्ट ऑपरेशन और शेयर बाजार की सर्विस पर असर पड़ा. कई AWS सर्विस अभी भी प्रभावित या धीमी बताई जा रही हैं. इसी वजह से बड़ी कंपनियां रिस्क कम करने के लिए दूसरे देशों में डेटा शिफ्ट करने पर विचार कर रही हैं.
कई शहर बन सकते हैं नया हब
कंपनियां मुंबई, चेन्नई, हैदराबाद और कोच्चि जैसे शहरों में तुरंत डेटा सेंटर कैपिसिटी तलाश रही हैं. इन शहरों को इसलिए चुना जा रहा है क्योंकि यहां से डेटा प्रोसेसिंग की स्पीड बेहतर रहती है. खासकर बैंकिंग सेक्टर के काम को जल्दी और सुरक्षित तरीके से चलाने के लिए यह जरूरी माना जा रहा है. भारत में पहले से मौजूद डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर भी इसे एक मजबूत विकल्प बनाता है.
भारत में निवेश बढ़ने की संभावना
अगर यह ट्रेंड जारी रहता है तो भारत में डेटा सेंटर सेक्टर में निवेश तेजी से बढ़ सकता है. रिलायंस अडानी टाटा और लार्सन एंड टुब्रो जैसी कंपनियां पहले ही इस सेक्टर में बड़े निवेश का ऐलान कर चुकी हैं. अनुमान है कि अगले पांच से सात साल में भारत की कुल डेटा सेंटर क्षमता 1.4 गीगावाट से बढ़कर लगभग 10 गीगावाट तक पहुंच सकती है. इससे भारत ग्लोबल डेटा सेंटर हब के रूप में उभर सकता है.
भारत को मिल सकता है फायदा
भारत और सिंगापुर के पास मजबूत समुद्री केबल नेटवर्क है जो IT सर्विस को तेजी से सपोर्ट करता है. वर्तमान स्थिति को देखते हुए भारत सुरक्षित और स्थिर देश माना जा रहा है. इसी वजह से कंपनियां अस्थायी तौर पर ही सही लेकिन अपने डेटा वर्कलोड को यहां शिफ्ट करने पर विचार कर रही हैं. इससे भारत को टेक और डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर के क्षेत्र में लॉन्ग टर्म फायदा मिल सकता है.
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