फर्जी ट्रेडिंग ऐप से ठगी करने वाले गिरोह का पर्दाफाश, 5 लोगों की हुई गिरफ्तारी, म्यूल बैंक खातों से घुमाया जाता था पैसा
हैदराबाद के मलकाजगिरी कमिश्नरेट की साइबर क्राइम पुलिस ने फर्जी ऑनलाइन ट्रेडिंग ऐप के जरिए करोड़ों रुपये की ठगी करने वाले गिरोह का पर्दाफाश किया है. पुलिस ने विशेष अभियान के दौरान पांच आरोपियों को गिरफ्तार किया. आरोप है कि ये लोग व्हाट्सऐप ग्रुप के माध्यम से निवेश का लालच देकर लोगों से करोड़ों रुपये ठगते थे और म्यूल बैंक खातों के जरिए पैसा घुमाते थे.
Investment Scam: हैदराबाद के मलकाजगिरी कमिश्नरेट की साइबर क्राइम पुलिस ने ऑनलाइन निवेश के नाम पर लोगों से करोड़ों रुपये की ठगी करने वाले गिरोह का पर्दाफाश किया है. पुलिस ने विशेष अभियान चलाकर तीन अलग-अलग मामलों में पांच लोगों को गिरफ्तार किया है. इन मामलों में पीड़ितों से कुल ₹4.2 करोड़ से अधिक की ठगी की गई थी. पुलिस ने जांच के दौरान कुछ पीड़ितों को ₹12.54 लाख की राशि वापस भी दिलाई है.
फर्जी ट्रेडिंग ऐप और व्हाट्सऐप ग्रुप से फंसाते थे शिकार
420 के अनुसार, पुलिस जांच में पता चला कि आरोपी लोगों को फर्जी ऑनलाइन ट्रेडिंग प्लेटफॉर्म और निवेश योजनाओं का लालच देकर अपने जाल में फंसाते थे. इसके लिए वे व्हाट्सऐप ग्रुप और मोबाइल ऐप का इस्तेमाल करते थे. इसमें लोगों को कम समय में ज्यादा मुनाफे का वादा किया जाता था, जिससे कई लोग बड़ी रकम निवेश कर देते थे.
पैसा जमा होने के बाद बंद हो जाता था रास्ता
जब पीड़ित निवेश कर देते थे, तो उन्हें ऐप पर नकली मुनाफा दिखाया जाता था. लेकिन जब वे पैसे निकालने की कोशिश करते थे, तो निकासी संभव नहीं होती थी. तब जाकर उन्हें पता चलता था कि उनके साथ ठगी हो चुकी है.
म्यूल बैंक खातों से घुमाया जाता था पैसा
पुलिस के अनुसार गिरफ्तार आरोपी मुख्य ठगों को बैंक खाते उपलब्ध कराते थे. इन खातों के जरिए ठगी की रकम को अलग-अलग जगहों पर ट्रांसफर किया जाता था, ताकि असली आरोपियों तक पहुंचना मुश्किल हो जाए. ऐसे खातों को आमतौर पर म्यूल अकाउंट कहा जाता है.
सावधानी बरतने की सलाह
पुलिस ने लोगों को सलाह दी है कि सोशल मीडिया या मैसेजिंग ऐप पर आने वाले निवेश के लालच से बचें. किसी भी ट्रेडिंग प्लेटफॉर्म में पैसा लगाने से पहले उसकी जांच भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (SEBI) से जरूर करें. अगर किसी के साथ साइबर ठगी होती है तो तुरंत राष्ट्रीय साइबर क्राइम हेल्पलाइन 1930 या ऑनलाइन पोर्टल पर शिकायत दर्ज कराएं.
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