भारत के पास रिजर्व में कितना कच्चा तेल? जानिए कितने लीटर का है देश का तेल भंडार; 40 देशों से आता है कच्चा तेल

एक सरकारी रिपोर्ट के अनुसार भारत के पास कच्चे तेल और पेट्रोलियम उत्पादों का बहुत बड़ा भंडार मौजूद है. रिपोर्ट में बताया गया है कि देश के पास 250 मिलियन बैरल से ज्यादा तेल का बफर स्टॉक है. इसे अगर लीटर में देखें तो यह करीब 4000 करोड़ लीटर के बराबर होता है.

तेल भंडार

Crude OIL: दुनिया में बढ़ते तनाव और तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव के बीच भारत की ऊर्जा सुरक्षा को लेकर एक अहम जानकारी सामने आई है. एक सरकारी रिपोर्ट के अनुसार भारत के पास कच्चे तेल और पेट्रोलियम उत्पादों का बहुत बड़ा भंडार मौजूद है. रिपोर्ट में बताया गया है कि देश के पास 250 मिलियन बैरल से ज्यादा तेल का बफर स्टॉक है. इसे अगर लीटर में देखें तो यह करीब 4000 करोड़ लीटर के बराबर होता है.

इतना बड़ा भंडार देश की जरूरत के हिसाब से करीब सात से आठ हफ्तों तक ईंधन की सप्लाई बनाए रखने के लिए पर्याप्त माना जाता है. खास बात यह है कि भारत अब तेल खरीदने के लिए केवल एक या दो देशों पर निर्भर नहीं है. पिछले दस साल में भारत ने अपने तेल आयात को 27 देशों से बढ़ाकर 40 देशों तक कर दिया है. इससे किसी एक क्षेत्र में संकट होने पर भी देश की ईंधन सप्लाई पर ज्यादा असर नहीं पड़ता.

4000 करोड़ लीटर तेल का बफर

ET की एक रिपोर्ट के हवाले से सरकारी रिपोर्ट के अनुसार भारत के पास 250 मिलियन बैरल से ज्यादा कच्चे तेल और पेट्रोलियम उत्पादों का भंडार है. यह मात्रा लगभग 4000 करोड़ लीटर के बराबर बताई गई है. यह स्टॉक देश की जरूरत के हिसाब से सात से आठ हफ्तों तक ईंधन की सप्लाई बनाए रखने में मदद कर सकता है.

कई जगहों पर रखा गया है तेल

तेल का यह भंडार देश के अलग-अलग स्थानों पर सुरक्षित रखा गया है. इसमें कर्नाटक के मंगलुरु और पडूर तथा आंध्र प्रदेश के विशाखापत्तनम में बने भूमिगत भंडारण शामिल हैं. इसके अलावा जमीन के ऊपर बने टैंक, पाइपलाइन और समुद्र में मौजूद जहाजों में भी तेल रखा गया है. रिपोर्ट में बताया गया है कि भारत अब 40 देशों से कच्चा तेल आयात करता है. करीब दस साल पहले यह संख्या 27 देशों के आसपास थी. इससे भारत किसी एक देश या समुद्री रास्ते पर पूरी तरह निर्भर नहीं रहता.

रूस सबसे बड़ा सप्लायर

फरवरी 2026 तक रूस भारत को कच्चा तेल सप्लाई करने वाला सबसे बड़ा देश बना हुआ है. रिपोर्ट में कहा गया है कि भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों के फैसले राष्ट्रीय हित के आधार पर लेता है. भारत ने रूस से तेल खरीदते समय G7 के प्राइस कैप नियमों का भी पालन किया है.

एथेनॉल और रिफाइनिंग से भी मजबूती

भारत में 20 प्रतिशत एथेनॉल ब्लेंडिंग कार्यक्रम भी ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत बना रहा है. इससे हर साल करीब 44 मिलियन बैरल कच्चे तेल की जरूरत कम हो रही है. देश की रिफाइनिंग क्षमता अब 258 मिलियन मीट्रिक टन प्रति वर्ष हो चुकी है.
यह देश की कुल खपत से ज्यादा है.

कई साल से स्थिर हैं पेट्रोल के दाम

रिपोर्ट के अनुसार फरवरी 2022 से फरवरी 2026 के बीच दिल्ली में पेट्रोल की कीमत में 0.67 प्रतिशत की गिरावट आई है. जबकि इसी समय पाकिस्तान में पेट्रोल 55 प्रतिशत और जर्मनी में 22 प्रतिशत महंगा हुआ है. सरकारी तेल कंपनियों ने कीमतें स्थिर रखने के लिए हजारों करोड़ रुपये का नुकसान भी उठाया है. रिपोर्ट में कहा गया है कि पिछले 12 साल में देश के किसी भी पेट्रोल पंप पर ईंधन खत्म होने की स्थिति नहीं बनी है.

यह भी पढ़ें: वेस्ट एशिया तनाव के डर से विदेशी निवेशकों भागे, चार दिनों में ₹21,000 करोड़ की बिकवाली, गहरा रहा संकट