वेस्ट एशिया तनाव के डर से विदेशी निवेशक भागे, चार दिनों में ₹21,000 करोड़ की बिकवाली, गहरा रहा संकट
वेस्ट एशिया में बढ़ते तनाव और वैश्विक अनिश्चितता के बीच विदेशी निवेशकों ने भारतीय शेयर बाजार से तेजी से पैसा निकालना शुरू कर दिया है. पिछले चार कारोबारी दिनों में FPI ने करीब 21,000 करोड़ रुपये की बिकवाली की है, जिससे बाजार में दबाव बढ़ा है, हालांकि घरेलू निवेशकों की खरीदारी से कुछ संतुलन बना हुआ है.
वैश्विक अनिश्चितता और वेस्ट एशिया में बढ़ते तनाव का असर अब भारतीय शेयर बाजार में विदेशी निवेश पर भी दिखने लगा है. बीते चार कारोबारी दिनों में विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (FPI) ने भारतीय इक्विटी बाजार से करीब ₹21,000 करोड़ निकाल लिए हैं. विशेषज्ञों का मानना है कि भू-राजनीतिक तनाव, रुपये की कमजोरी और अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में बढ़ोतरी जैसे कारणों से विदेशी निवेशक फिलहाल सतर्क रुख अपना रहे हैं.
चार दिनों में भारी बिकवाली
डिपॉजिटरी के आंकड़ों के अनुसार 2 से 6 मार्च के बीच विदेशी निवेशकों ने कैश मार्केट में करीब ₹21,000 करोड़ के शेयर बेचे. इस अवधि में 3 मार्च को होली के कारण बाजार बंद रहा था. यह बिकवाली ऐसे समय हुई है जब फरवरी में विदेशी निवेशकों ने भारतीय शेयर बाजार में करीब ₹22,615 करोड़ का निवेश किया था. यह पिछले 17 महीनों में सबसे बड़ा मासिक निवेश था.
फरवरी के निवेश से पहले विदेशी निवेशक लगातार तीन महीनों तक भारतीय बाजार में बिकवाली कर रहे थे. जनवरी में उन्होंने ₹35,962 करोड़, दिसंबर में ₹22,611 करोड़ और नवंबर में ₹3,765 करोड़ की निकासी की थी. इससे साफ है कि हाल के महीनों में विदेशी निवेश का रुख काफी उतार-चढ़ाव भरा रहा है.
वेस्ट एशिया तनाव बना बड़ा कारण
बाजार विशेषज्ञों के मुताबिक वेस्ट एशिया में बढ़ता तनाव विदेशी निवेशकों के फैसलों को प्रभावित कर रहा है. फरवरी के अंत में अमेरिका और इजरायल की ओर से ईरान के ठिकानों पर किए गए हमलों के बाद क्षेत्र में संघर्ष बढ़ गया, जिससे वैश्विक बाजारों में जोखिम की भावना बढ़ी है.
रुपये की कमजोरी और बॉन्ड यील्ड का असर
विदेशी निवेशकों की बिकवाली के पीछे अन्य आर्थिक कारण भी हैं. रुपया 92 प्रति डॉलर के स्तर से नीचे चला गया है, जिससे विदेशी निवेशकों के लिए निवेश का जोखिम बढ़ जाता है. इसके अलावा अमेरिका के ट्रेजरी बॉन्ड की यील्ड में बढ़ोतरी ने निवेशकों को सुरक्षित परिसंपत्तियों की ओर आकर्षित किया है.
यह भी पढ़ें: 150 डॉलर तक पहुंच सकता है कच्चा तेल! एविएशन, लॉजिस्टिक्स और केमिकल सेक्टर पर बढ़ेगा दबाव, निवेशक रहें सतर्क
घरेलू निवेशकों से मिल रहा सहारा
हालांकि विदेशी निवेशकों की बिकवाली के बावजूद भारतीय बाजार को घरेलू निवेशकों का सहारा मिल रहा है. घरेलू संस्थागत निवेशक (DII) और म्यूचुअल फंड के जरिए आने वाला नियमित SIP निवेश बाजार में स्थिरता बनाए रखने में मदद कर रहा है. विशेषज्ञों का कहना है कि यही कारण है कि विदेशी निकासी के बावजूद बाजार पूरी तरह कमजोर नहीं हुआ है.
Latest Stories
रेवेन्यू से ज्यादा ऑर्डर बुक, 3 साल में 3300 फीसदी तक का रिटर्न, इन 3 शेयरों पर रखें नजर
ईरान-इसराइल तनाव ने बाजार पर ढाया कहर, टॉप कंपनियों ने गवाएं ₹2.81 लाख करोड़, बैंक स्टॉक सबसे ज्यादा टूटे
1 महीने में 5% गिरे ICICI Bank के शेयर, क्रूड ऑयल के साथ इन फैक्टर्स का असर, जानें आगे क्या है उम्मीद
