Google ने कोर्ट में दी EU के फैसलों को चुनौती, प्राइवेसी का दिया हवाला!

गूगल ने EU के उन ऑर्डर को चुनौती दी है, जिनमें उसे कॉम्पिटिटर के साथ एनॉनिमाइज्ड सर्च डेटा शेयर करने और कॉम्पिटिटर के लिए कुछ Android फीचर्स ओपन करने की जरूरत है. कंपनी प्राइवेसी और सिक्योरिटी रिस्क की चेतावनी देती है, जबकि EU रेगुलेटर का कहना है कि डिजिटल मार्केट एक्ट के तहत सेफगार्ड मौजूद है.

गूगल Image Credit: Stanislav Kogiku/SOPA Images/LightRocket via Getty Images

Highlights

  • गूगल ने EU के आदेश को चुनौती दी.
  • यूजर प्राइवेसी का दिया हवाला.
  • सर्च डेटा शेयर करने पर छिड़ा विवाद.

Google ने यूरोपियन यूनियन के दो ऑर्डर को चुनौती दी है जिसमें कंपनी की सर्विसेज़ के कुछ हिस्से कॉम्पिटिटर जैसे कि AI डेवलपर्स और कॉम्पिटिटर सर्च इंजन के लिए ओपन करने की बात कही गई थी. 28 सितंबर 2026 को अल्फाबेट की मालिकी हक वाली कंपनी ने लक्जमबर्ग में जनरल कोर्ट में इन उपायों के खिलाफ अपील की, यह तर्क देते हुए कि इनसे यूरोपियन यूजर्स की प्राइवेसी और सिक्योरिटी से समझौता हो सकता है.

यह विवाद EU के डिजिटल मार्केट्स एक्ट (DMA) पर है. जुलाई में, यूरोपियन कमीशन ने गूगल को कुछ Android फीचर्स को कॉम्पिटिटर के लिए एक्सेसिबल बनाने और एलिजिबल कॉम्पिटिटर सर्च प्रोवाइडर को एनॉनिमाइज्ड Google Search डेटा देने का आदेश दिया था. सर्च डेटा-शेयरिंग की जरूरतें जनवरी 2027 में लागू होने वाली हैं, जबकि एंड्रॉयड इंटरऑपरेबिलिटी उपाय जुलाई 2027 में लागू होने वाले हैं.

क्यों गूगल दे रहा EU के ऑर्डर को चुनौती?

गूगल का तर्क है कि जिस सर्च डेटा को शेयर करने का आदेश उसे दिया गया है, अगर उसे ठीक से एनॉनिमाइज्ड नहीं किया गया तो वह सेंसिटिव जानकारी को सामने ला सकता है. 29 सितंबर को गूगल के सीनियर डायरेक्टर ऑफ कॉम्पिटिशन, ओलिवर बेथेल ने चिंता जताई कि इन उपायों के कारण कंपनी को बिना किसी जरूरी सुरक्षा उपायों के प्राइवेट सर्च डेटा शेयर करना पड़ सकता है. गूगल का यह भी दावा है कि एंड्रॉयड इंटरऑपरेबिलिटी की जरूरतें सिक्योरिटी प्रोटेक्शन को कमजोर कर सकती हैं.

सर्च क्वेरीज बहुत ज्यादा पर्सनल जानकारी दिखा सकती हैं, जिसमें यूजर्स की हेल्थ, रिलेशन और दूसरे प्राइवेट मामलों की डिटेल्स शामिल हैं. गूगल का तर्क है कि इसलिए, ठीक से एनॉनिमाइजेशन न होने से लंबे समय तक चलने वाले प्राइवेसी रिस्क पैदा हो सकते हैं.

कॉम्पिटिटर्स को कौन सा सर्च डेटा मिल सकता है?

लाइव मिंट के मुताबिक, यूरोपियन कमीशन ने 16 जुलाई को फैसला सुनाया है कि गूगल को एलिजिबल सर्च कॉम्पिटिटर्स को क्वेरीज़, रैंकिंग, क्लिक्स और व्यूज़ के बारे में एनॉनिमाइज़्ड जानकारी देनी होगी. डेटा का मकसद कॉम्पिटिटर्स को अपनी सर्च सर्विसेज को बेहतर बनाने और गूगल सर्च के साथ कॉम्पिटिशन करने में मदद करना है.

EU का कहना है कि गूगल यूजर्स के अकाउंट डिटेल्स या पूरी सर्च हिस्ट्री देने के लिए नहीं कहता है. इसके प्रोटेक्शन में सही टाइमिंग को हटाना, बहुत लंबी या असामान्य क्वेरीज़ को फ़िल्टर करने की क्षमता, लोकेशन डेटा का जनरलाइजेशन और इसके डिस्क्लोजर से पहले इंटरैक्शन डेटा में बदलाव शामिल हैं. EU का कहना है कि सिस्टम में सुरक्षा के उपाय पहले से मौजूद है.

यूरोपियन कमीशन का कहना है कि डेटा-शेयरिंग सिस्टम को प्राइवेसी और सिक्योरिटी प्रोटेक्शन के साथ डिजाइन किया गया था. इसमें यह भी कहा गया है कि डेटासेट तक एक्सेस कुछ शर्तों के अधीन होना चाहिए, जिसमें डेटा प्रोटेक्शन और विदेश में डेटा ट्रांसफर शामिल है.

ये भी पढ़ें- इन iPhone यूजर्स की परेशानी हुई दूर! iOS 27.0.1 अपडेट के साथ ठीक होंगी ये 2 बड़ी दिक्कतें