गलत UPI ट्रांसफर हो गया? पैसा वापस मिलेगा या नहीं, जानें नियम
UPI से गलत अकाउंट या गलत UPI ID पर पैसा भेज देना आज के समय की सबसे आम डिजिटल गलतियों में से एक है. एक बार ट्रांजैक्शन सफल हो जाने के बाद पैसा तुरंत रिसीवर के बैंक अकाउंट में चला जाता है और उसे अपने आप वापस लाने का कोई सीधा तरीका नहीं होता. ऐसे में आइए जानते हैं पैसा वापस लाने के क्या उपाय है.
UPI से पेमेंट करते वक्त एक छोटी सी गलती कई बार बड़ा तनाव बन जाती है. आप पेमेंट करते हैं, स्क्रीन पर सक्सेसफुल लिखा आता है और तभी ध्यान जाता है कि पैसा गलत UPI ID पर चला गया. रकम छोटी हो या बड़ी, डर तुरंत लगने लगता है क्योंकि UPI बहुत तेज चलता है और पैसे वापस खींचने का कोई सीधा बटन नहीं होता. लोगों को लगता है कि अब सब खत्म, लेकिन असलियत न तो इतनी डरावनी है और न ही बहुत दिलासा देने वाली.
सफल UPI पेमेंट वापस करना इतना मुश्किल क्यों है?
UPI को ही इस तरह बनाया गया है कि पैसा तुरंत और फाइनल तरीके से ट्रांसफर हो जाए. जैसे ही ट्रांजैक्शन “सक्सेस” दिखाता है, पैसा आपके बैंक अकाउंट से निकलकर सामने वाले के अकाउंट में पहुंच चुका होता है. इसमें कोई कूलिंग पीरियड नहीं होता और न ही ऑटोमैटिक रिवर्सल का ऑप्शन. यही बात लोगों को सबसे ज्यादा चुभती है. भले ही गलती आपकी हो, बैंक अपने आप पैसा वापस नहीं ले सकता. तकनीकी और कानूनी तौर पर वो पैसा अब रिसीवर का होता है. अगर पैसा वापस आना है तो उसकी सहमति जरूरी होती है. ऐसे में UPI की पूरी सोच स्पीड और भरोसे पर टिकी है, माफी या दूसरी मौके पर नहीं. यहां डिटेल चेक करने की पूरी जिम्मेदारी भेजने वाले की होती है.
बैंक और UPI ऐप असल में क्या करते हैं?
गलत ट्रांसफर होने पर सबसे पहला कदम होता है उसी UPI ऐप में शिकायत दर्ज करना जिससे आपने पेमेंट किया है. हर ट्रांजैक्शन में डिस्प्यूट या रॉन्ग ट्रांसफर का ऑप्शन होता है। इससे पैसा तुरंत वापस नहीं आता, लेकिन मामला रिकॉर्ड में आ जाता है. इसके बाद आपका बैंक रिसीवर के बैंक से संपर्क करता है। रिसीवर को बताया जाता है कि गलती से पैसा उसके अकाउंट में आया है और पूछा जाता है कि क्या वह पैसा लौटाने को तैयार है। अगर सामने वाला मान जाता है तो कुछ वर्किंग डेज में पैसा वापस आ सकता है.
लेकिन अगर रिसीवर मना कर दे या जवाब ही न दे, तो बैंक ज्यादा कुछ नहीं कर सकता। बिना इजाजत किसी के अकाउंट से पैसा काटना कानूनन संभव नहीं है, चाहे ट्रांसफर गलती से ही क्यों न हुआ हो। ऐसे मामलों में कभी-कभी लिखित शिकायत या पुलिस में जानकारी देने की सलाह दी जाती है, लेकिन इससे भी पैसा वापस मिलने की कोई गारंटी नहीं होती.
कब अपने आप वापस आ जाता है पैसा?
एक स्थिति ऐसी है जहां लोग थोड़े लकी हो जाते हैं. अगर आपने जिस UPI ID पर पैसा भेजा वो मौजूद ही नहीं है, तो ट्रांजैक्शन फेल हो जाता है और पैसा अपने आप आपके अकाउंट में लौट आता है. इसीलिए ये देखना बहुत जरूरी होता है कि ट्रांजैक्शन फेल हुआ है या सक्सेसफुल. अगर सक्सेस हो गया, तो फिर सब कुछ सामने वाले व्यक्ति पर निर्भर करता है.
जल्दी शिकायत करने से क्या फायदा होता है जितनी जल्दी आप शिकायत दर्ज करते हैं, उतना बेहतर रहता है. इससे रिसीवर तक जल्दी मैसेज पहुंचता है और ये भी साफ होता है कि ट्रांसफर जानबूझकर नहीं बल्कि गलती से हुआ है. लेकिन जल्दी शिकायत करने से नियम नहीं बदलता. ऐसा कोई टाइम लिमिट नहीं है जिसके अंदर बैंक जबरदस्ती पैसा वापस करा दे.
UPI फ्रॉड में भी क्यों नहीं मिलती आसान रिकवरी
यही वजह है कि UPI फ्रॉड के केस भी लोगों की सोच से ज्यादा मुश्किल होते हैं. अगर पैसा आपकी तरफ से भेजा गया है, चाहे धोखे में ही क्यों न हो, तो उसकी रिकवरी अपने आप नहीं होती. फ्रॉड साबित होने पर अकाउंट फ्रीज हो सकता है, लेकिन इससे ये जरूरी नहीं कि पैसा वापस ही मिल जाए.
UPI की कड़वी लेकिन सच्ची हकीकत
गलत UPI ट्रांसफर इतना सख्त इसलिए लगता है क्योंकि जब सब सही चलता है तो सिस्टम बेहद आसान और तेज है. लेकिन इंसानी गलती के लिए इसमें बहुत कम जगह है. पेमेंट कन्फर्म करने से पहले जो कुछ सेकंड के लिए रिसीवर का नाम स्क्रीन पर दिखता है, वो औपचारिकता नहीं है. वही आपकी सबसे बड़ी सुरक्षा है.
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