लैंडिंग और टेकऑफ पर ही क्यों होते हैं ज्यादा विमान हादसे? जानें वो पल जब जरा सी चूक बन जाती है जानलेवा

अधिकांश विमान हादसे टेकऑफ और लैंडिंग के दौरान होते हैं क्योंकि इस समय विमान कम ऊंचाई और कम रफ्तार पर होता है. पायलट के पास गलती सुधारने का समय बेहद कम होता है. इसके अलावा इंजन पर ज्यादा दबाव, मौसम की चुनौती और मानवीय चूक मिलकर इन स्टेज को सबसे जोखिम भरा बना देते हैं.

प्लेन क्रैश Image Credit: AI

महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री और राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (NCP) के वरिष्ठ नेता अजित पवार का विमान हादसे में निधन हो गया. यह दुर्घटना उस वक्त हुई जब उनका विमान बारामती में लैंडिंग कर रहा था. इससे पहले 12 जून को गुजरात के अहमदाबाद में एयर इंडिया का विमान टेकऑफ के कुछ ही देर बाद क्रैश हो गया था, जिसमें 242 लोगों की मौत हो गई. ये दोनों हादसे एक बार फिर उस सवाल को सामने ले आते हैं, जो हर बड़े विमान हादसे के बाद उठता है, आखिर ज्यादातर प्लेन क्रैश टेकऑफ या लैंडिंग के दौरान ही क्यों होते हैं? जबकि उड़ान से पहले हर तरह की तकनीकी जांच होती है. आइए, आसान भाषा में इसे आंकड़ों और कारणों के जरिए समझते हैं.

क्या कहते हैं आंकड़े?

इंटरनेशनल एयर ट्रांसपोर्ट एसोसिएशन (IATA) के आंकड़ों के मुताबिक, सभी विमान हादसों में आधे से ज्यादा हादसे तब होते हैं, जब प्लेन जमीन पर उतर रहा होता है. वहीं टेकऑफ के दौरान होने वाले हादसे दूसरे नंबर पर हैं, जिनकी हिस्सेदारी 8.5 फीसदी है.

टेकऑफ और लैंडिंग सबसे खतरनाक क्यों?

किसी भी उड़ान की शुरुआत और अंत सबसे ज्यादा जोखिम भरे होते हैं. इसकी सबसे बड़ी वजह ये है कि इन दोनों चरणों में विमान कम ऊंचाई और कम रफ्तार पर होता है. एविएशन की भाषा में इसे “लो एंड स्लो” कहा जाता है. अगर इस दौरान कोई तकनीकी खराबी, मौसम की समस्या या पक्षी टकराने जैसी घटना हो जाए, तो पायलट के पास प्रतिक्रिया देने के लिए बहुत कम वक्त होता है. जब विमान 36,000 फीट की ऊंचाई पर क्रूज कर रहा होता है, तब पायलट के पास समय और जगह दोनों होती हैं. यहां तक कि अगर दोनों इंजन बंद हो जाएं, तब भी विमान अचानक नीचे नहीं गिरता, बल्कि ग्लाइड करने लगता है.

जब विमान के इंजन काम नहीं करते, तब भी वह एका-एक सीधे नीचे नहीं गिरता, बल्कि धीरे-धीरे गिरता है. आम तौर पर ऐसे हालात में विमान हर 10 मील आगे जाने पर लगभग 1 मील नीचे आता है. इससे पायलट को करीब 8 मिनट से थोड़ा ज्यादा समय मिल जाता है कि वह कहीं सुरक्षित लैंडिंग की जगह खोज सके. लेकिन अगर जमीन पर भी कोई दिक्कत हो जाए जैसे कि रनवे न मिले या रास्ते में रुकावट हो, तो यह समय और भी कम हो जाता है यानी खतरा तेजी से बढ़ जाता है.

इंजन और पायलट—दोनों पर सबसे ज्यादा प्रेशर

टेकऑफ के वक्त विमान के इंजन पर सबसे ज्यादा दबाव होता है. सैकड़ों टन वजनी विमान को गुरुत्वाकर्षण के खिलाफ ऊपर उठाना आसान काम नहीं है. इस दौरान इंजन फेल होने का जोखिम भी बढ़ जाता है. वहीं लैंडिंग के समय पायलट पर मानसिक दबाव सबसे ज्यादा होता है. लैंडिंग को उड़ान का सबसे तकनीकी और चुनौतीपूर्ण हिस्सा माना जाता है. हवा की दिशा, स्पीड, विमान का वजन, रनवे की स्थिति—हर सेकेंड कई फैसले लेने होते हैं. यही वजह है कि लैंडिंग के दौरान पायलट एरर से जुड़े हादसे ज्यादा होते हैं.

इसके अलावा अक्सर सवाल उठता है कि जब विमान उड़ान से पहले सभी जांच पास कर लेता है, तो फिर टेकऑफ के बाद इतनी बड़ी दुर्घटना कैसे हो जाती है. इसके पीछे कई ऐसे कारण होते हैं, जो अचानक सामने आते हैं, इनमें

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