NIA अफसर बता ठगों ने बनाया रिटायर्ड बैंकर को शिकार, 3 दिन तक वीडियो कॉल पर रख लूटे 50 लाख रुपये
मुंबई में एक रिटायर्ड बैंकर दंपती तीन दिन तक साइबर ठगों की वीडियो कॉल पर फंसे रहे. ठगों ने खुद को पुलिस और NIA अधिकारी बताकर दंपती को धमकाया और “जांच” के नाम पर उनके बैंक अकाउंट से 50.5 लाख रुपये निकलवा लिए. पुलिस ने दो आरोपियों को गिरफ्तार किया है.
Cyber Fraud News: मुंबई में एक रिटायर्ड बैंकर और उनकी पत्नी के साथ हुआ एक हैरान कर देने वाला साइबर फ्रॉड लोगों को सावधान कर देने वाला है. ठगों ने खुद को पुलिस अधिकारी बताकर दंपती को तीन दिन तक वीडियो कॉल पर “डिजिटली अरेस्ट” रखा और डर व धमकी के जरिए उनकी पूरी जमा पूंजी, करीब 50.5 लाख रुपये अपने खातों में ट्रांसफर करवा लिए. यह पूरा खेल न तो किसी गैंग के फिजिकल अटैक का था और न ही किसी टेक्निकल हैकिंग का, बल्कि दिमाग को काबू में कर उस पर दबाव और फर्जी पहचान का जाल था.
फर्जी FIR और पुलिस का डर
इंडिया टुडे की रिपोर्ट के मुताबिक, यह घटना सितंबर 11 से 24 के बीच हुई. उत्तर मुंबई के एक रिटायर्ड बैंकर को व्हाट्सएप पर कॉल आई, जिसमें सामने वाला खुद को नासिक पुलिस का अधिकारी बता रहा था. उसने दावा किया कि उनका नाम मनी लॉन्ड्रिंग केस में सामने आया है. भरोसा दिलाने के लिए ठगों ने एक फर्जी FIR भी दिखाई जिसमें पीड़ित का नाम लिखा था.
इसके बाद एक दूसरा व्यक्ति वीडियो कॉल पर जुड़ा, जिसने खुद को एनआईए (NIA) का IPS अधिकारी बताया. उसने दंपती से कहा कि जांच पूरी होने तक वे लगातार वीडियो कॉल पर बने रहें, ताकि उनकी गतिविधियों पर नजर रखी जा सके. डर और धमकी के माहौल में दंपती तीन दिन तक उसी वीडियो कॉल पर रहे, बिना किसी से संपर्क किए.
‘वेरिफिकेशन’ के नाम पर हुई लूट
इस दौरान ठगों ने “पूछताछ” के बहाने उनके बैंक अकाउंट और फिक्स्ड डिपॉजिट की जानकारी हासिल कर ली. फिर कहा कि जांच के लिए पैसे को अस्थायी रूप से एक सरकारी खाते में भेजना होगा. भरोसा कर चुके दंपती ने 50.5 लाख रुपये उस खाते में ट्रांसफर कर दिए. पैसे भेजने के कुछ देर बाद ही वीडियो कॉल बंद हो गई और ठगों ने संपर्क तोड़ लिया.
दो आरोपी गिरफ्तार, जांच जारी
रिपोर्ट के मुताबिक, शिकायत मिलने के बाद नॉर्थ रीजन साइबर पुलिस ने जांच शुरू की. ट्रांजैक्शन ट्रेस करते हुए पुलिस ने 29.5 लाख रुपये एक “म्यूल अकाउंट” में पाए जो ठाणे जिले के उल्हासनगर निवासी रवि आनंदा अंबोरे के नाम पर था. उसे 25 अक्टूबर को गिरफ्तार किया गया. पूछताछ में पता चला कि उसने कमीशन के बदले अपना खाता साइबर ठगों को किराए पर दिया था. उसकी जानकारी के आधार पर पुलिस ने एक और आरोपी विश्वपाल चंद्रकांत जाधव को पकड़ा, जिसके खाते का इस्तेमाल कई राज्यों में कम से कम सात साइबर फ्रॉड में किया गया था.
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‘डिजिटल अरेस्ट’ के बढ़ते खतरे
पुलिस का कहना है कि अब ऐसे “डिजिटल अरेस्ट” केस तेजी से बढ़ रहे हैं, जिनमें ठग खुद को कानून-व्यवस्था का अधिकारी बताकर डर का माहौल बनाते हैं. अधिकारी ने चेतावनी दी, “कोई भी पुलिस या NIA अधिकारी कभी भी किसी नागरिक से पैसे ट्रांसफर करने या लगातार वीडियो कॉल पर रहने को नहीं कहेगा.” लोगों से अपील की गई है कि ऐसे किसी कॉल पर यकीन न करें और तुरंत राष्ट्रीय साइबरक्राइम हेल्पलाइन 1930 पर शिकायत दर्ज कराएं.
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