अब डिजिटल रुपये में मिलेगा लाभार्थी को पैसा, वेलफेयर स्कीम से लेकर क्रॉस बॉर्डर पेमेंट तक; RBI का नया प्लान
RBI डिजिटल रुपये (CBDC) के उपयोग को वेलफेयर स्कीम, DBT और क्रॉस बॉर्डर पेमेंट जैसे क्षेत्रों में बढ़ाने की तैयारी कर रहा है. केंद्रीय बैंक ने अपनी वार्षिक रिपोर्ट में डिजिटल रुपये के दायरे को विस्तार देने की योजना का खुलासा किया है. इसके साथ ही RBI ने सिंगापुर के मोनेटरी अथॉरिटी के साथ डिजिटल एसेट्स को लेकर समझौता किया है और UAE के साथ पायलट प्रोजेक्ट्स पर भी चर्चा जारी है.

RBI Digital Rupee: भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) डिजिटल रुपये के इस्तेमाल को और व्यापक बनाने की दिशा में तेजी से काम कर रहा है. केंद्रीय बैंक ने वित्त वर्ष 2025-26 की अपनी वार्षिक रिपोर्ट में बताया है कि वह डिजिटल रुपये (CBDC) का इस्तेमाल वेलफेयर स्कीम, डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर (DBT) और क्रॉस बॉर्डर पेमेंट जैसे क्षेत्रों में बढ़ाने की योजना बना रहा है. इसके साथ ही RBI ने डिजिटल एसेट्स के क्षेत्र में अंतरराष्ट्रीय सहयोग बढ़ाने के लिए सिंगापुर के मोनेटरी अथॉरिटी के साथ एक महत्वपूर्ण समझौता भी किया है.
कई राज्यों में चलाए गए हैं पायलट प्रोजेक्ट
RBI का मानना है कि डिजिटल रुपये के जरिए सरकारी योजनाओं का लाभ अधिक पारदर्शी और प्रभावी तरीके से लाभार्थियों तक पहुंचाया जा सकता है. इसी उद्देश्य से पिछले वित्त वर्ष के दौरान कई राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में पायलट प्रोजेक्ट चलाए गए. गुजरात, पुडुचेरी और चंडीगढ़ जैसे क्षेत्रों में लाभार्थियों को खाद्य सब्सिडी का भुगतान डिजिटल रुपये के माध्यम से किया गया.
DBT स्कीम में बढ़ेगा उपयोग
RBI की रिपोर्ट के अनुसार, कई सरकारी एजेंसियों ने डिजिटल रुपये के प्रोग्रामेबिलिटी फीचर का उपयोग करते हुए विभिन्न DBT स्कीम में पायलट प्रोजेक्ट शुरू किए हैं. इस तकनीक की मदद से यह सुनिश्चित किया जा सकता है कि सरकारी धन का उपयोग केवल निर्धारित उद्देश्य के लिए ही किया जाए.
डिजिटल रुपये की यह विशेषता सरकारी योजनाओं के क्रियान्वयन में पारदर्शिता बढ़ाने के साथ-साथ फंड के दुरुपयोग को भी कम कर सकती है. यही वजह है कि सरकार और RBI दोनों इस तकनीक को आगे बढ़ाने पर जोर दे रहे हैं.
क्रॉस बॉर्डर पेमेंट पर फोकस
रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक, RBI अब डिजिटल रुपये को अंतरराष्ट्रीय भुगतान व्यवस्था का हिस्सा बनाने की दिशा में भी कदम बढ़ा रहा है. इसके लिए केंद्रीय बैंक ने सिंगापुर के मोनेटरी अथॉरिटी के साथ डिजिटल एसेट्स को लेकर एक समझौता किया है. इसके अलावा सिंगापुर और संयुक्त अरब अमीरात (UAE) के साथ संयुक्त पायलट प्रोजेक्ट्स पर भी चर्चा चल रही है.
केंद्रीय बैंक अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चल रही कई बहुपक्षीय पहलों में भी भाग ले रहा है, जिनका नेतृत्व Bank for International Settlements (BIS) कर रहा है. इन पहलों का उद्देश्य विभिन्न देशों की डिजिटल करेंसी को एक-दूसरे के साथ जोड़ना और अंतरराष्ट्रीय लेनदेन को अधिक तेज तथा कम खर्चीला बनाना है.
खुदरा उपयोग में आई कमी
हालांकि RBI डिजिटल रुपये के उपयोग को बढ़ाने की कोशिश कर रहा है, लेकिन खुदरा स्तर पर इसका उपयोग अभी अपेक्षित गति से नहीं बढ़ पाया है. वार्षिक रिपोर्ट के अनुसार, 31 मार्च 2026 तक खुदरा डिजिटल रुपये का प्रचलन घटकर 7.71 अरब रुपये रह गया, जो एक वर्ष पहले 10.16 अरब रुपये था.
IFS Cloud प्लेटफॉर्म भी हुआ लॉन्च
डिजिटल इन्फ्रास्ट्रक्चर को मजबूत बनाने के लिए RBI ने अपने Indian Financial Sector (IFS) Cloud प्लेटफॉर्म को भी बीटा मोड में शुरू कर दिया है. फिलहाल इस प्लेटफॉर्म का उपयोग नौ संस्थाएं कर रही हैं. RBI के अनुसार, IFS Cloud के पहले चरण का काम अंतिम दौर में है. पहले चरण में बेसिक सर्विस उपलब्ध कराई जाएंगी, जबकि दूसरे चरण में एडवांस्ड सर्विस जोड़ी जाएंगी. माना जा रहा है कि यह प्लेटफॉर्म भारतीय वित्तीय संस्थानों को सुरक्षित और आधुनिक क्लाउड सुविधाएं उपलब्ध कराने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा.
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