Israel-Iran War: किसकी सेना ज्यादा ताकतवर, किसके पास अधिक फाइटर प्लेन, टैंक और मिसाइलें?
मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव के बीच अमेरिका और इजराइल के ईरान पर हमले ने हालात को गंभीर बना दिया है. ऐसे में यह जानना अहम है कि ईरान और इजराइल के पास कौन-कौन से हथियार और सैन्य क्षमताएं मौजूद हैं. साथ ही क्षेत्र में अमेरिका की तैनाती इस टकराव को किस दिशा में ले जा सकती है.
Israel-USA Attacks Iran: मध्य पूर्व में बढ़ते सैन्य तनाव ने वैश्विक चिंता को और गहरा कर दिया है. अमेरिका और इजराइल द्वारा ईरान पर हमले की खबरों के बीच अब सबकी नजर इस बात पर है कि इस संभावित संघर्ष में कौन-कौन सी सैन्य ताकत और हथियार इस्तेमाल किए जा सकते हैं. इजराइल और ईरान दोनों ही मिसाइल, ड्रोन, लड़ाकू विमान, आर्टिलरी और साइबर क्षमता जैसे आधुनिक हथियारों से लैस हैं, जो किसी भी टकराव को व्यापक रूप दे सकते हैं. दूसरी ओर, अमेरिका ने भी क्षेत्र में अपने विमानवाहक पोत, अत्याधुनिक फाइटर जेट, मिसाइल डिफेंस सिस्टम और हजारों सैनिकों की तैनाती कर अपनी मौजूदगी मजबूत कर दी है. ऐसे में यह समझना अहम हो जाता है कि तीनों देशों के पास कौन-कौन सी सैन्य क्षमताएं हैं और संघर्ष की स्थिति में उनका इस्तेमाल किस तरह किया जा सकता है.
हवाई हमले में कौन कितना ताकतवर?
मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव के बीच ईरान और इजराइल की हवाई ताकत की तुलना पर नजर डालें तो आंकड़े बताते हैं कि एयरपावर के मामले में इजराइल बढ़त बनाए हुए है. उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, कुल सैन्य विमानों की संख्या में इजराइल के पास 597 विमान हैं, जबकि ईरान के पास 551 विमान मौजूद हैं. वैश्विक रैंकिंग में भी इजराइल 17वें स्थान पर है, जबकि ईरान 21वें स्थान पर आता है. लड़ाकू विमानों (फाइटर एयरक्राफ्ट) की बात करें तो अंतर और स्पष्ट हो जाता है. इजराइल के पास 239 फाइटर जेट हैं, जबकि ईरान के पास 188 लड़ाकू विमान हैं. फाइटर एयरक्राफ्ट रैंकिंग में इजराइल 11वें और ईरान 15वें स्थान पर है.
ईरान और इजराइल की हवाई ताकत की तुलना में हेलीकॉप्टर बेड़े के आंकड़े मिले-जुले तस्वीर पेश करते हैं. कुल हेलीकॉप्टरों की संख्या में ईरान मामूली बढ़त बनाए हुए है. Fire Power Index के अनुसार, ईरान के पास 129 हेलीकॉप्टर हैं और वह वैश्विक रैंकिंग में 32वें स्थान पर है, जबकि इजराइल के पास 127 हेलीकॉप्टर हैं और उसकी रैंकिंग 33वीं है. कुल संख्या के लिहाज से दोनों देशों के बीच बहुत कम अंतर है.
हालांकि, अटैक हेलीकॉप्टरों की बात करें तो तस्वीर पूरी तरह बदल जाती है. इजराइल के पास 48 अटैक हेलीकॉप्टर हैं और वह इस कैटेगरी में 15वें स्थान पर है. इसके मुकाबले ईरान के पास केवल 13 अटैक हेलीकॉप्टर हैं और उसकी रैंकिंग 32वीं है. यह अंतर दर्शाता है कि आक्रामक हवाई अभियानों में इजराइल की क्षमता अधिक मजबूत मानी जा सकती है.
टैंक-बख्तरबंद वाहनों में ईरान की स्पष्ट बढ़त
ईरान और इजराइल की जमीनी सैन्य ताकत (लैंड पावर) की तुलना में उपलब्ध आंकड़े ईरान को संख्यात्मक रूप से मजबूत स्थिति में दिखाते हैं. टैंक क्षमता की बात करें तो ईरान के पास कुल 2,675 टैंक हैं और इजराइल के पास 1,300 टैंक हैं. यानी टैंक संख्या में ईरान को 1,375 टैंकों की बढ़त हासिल है.
बख्तरबंद वाहनों (Armored Vehicles) के मामले में भी ईरान आगे दिखाई देता है. ईरान के पास 75,939 बख्तरबंद वाहन हैं, जिससे वह 11वें स्थान पर है. वहीं इजराइल के पास 62,380 बख्तरबंद वाहन हैं और उसकी रैंकिंग 13वीं है. इस श्रेणी में भी ईरान को 13,559 वाहनों की बढ़त प्राप्त है.
आर्टिलरी क्षमता में ईरान की मजबूत बढ़त
ईरान और इजराइल की जमीनी फायरपावर की तुलना में आर्टिलरी के आंकड़े ईरान को स्पष्ट बढ़त में दिखाते हैं. सेल्फ-प्रोपेल्ड आर्टिलरी की बात करें तो ईरान के पास 424 यूनिट हैं और वह वैश्विक रैंकिंग में 16वें स्थान पर है, जबकि इजराइल के पास 323 यूनिट हैं और उसकी रैंकिंग 19वीं है. टोव्ड आर्टिलरी (खींचकर ले जाई जाने वाली तोपें) में अंतर और भी बड़ा है. ईरान के पास 1,803 टोव्ड आर्टिलरी सिस्टम हैं और वह 7वें स्थान पर है. इसके मुकाबले इजराइल के पास 171 यूनिट हैं और उसकी रैंकिंग 52वीं है.
मोबाइल रॉकेट प्रोजेक्टर की बात करें तो ईरान के पास 1,550 सिस्टम हैं और वह वैश्विक स्तर पर 4वें स्थान पर है, जबकि इजराइल के पास 228 सिस्टम हैं और उसकी रैंकिंग 23वीं है. यह आंकड़े दर्शाते हैं कि रॉकेट और लंबी दूरी की जमीनी मारक क्षमता में भी ईरान संख्यात्मक रूप से काफी आगे है.
नौसैनिक शक्ति में ईरान की बढ़त
ईरान और इजराइल की नौसैनिक क्षमता (नेवल पावर) की तुलना में उपलब्ध आंकड़े ईरान को मजबूत स्थिति में दिखाते हैं. कुल फ्लीट स्ट्रेंथ के मामले में ईरान के पास 109 युद्धपोत और नौसैनिक प्लेटफॉर्म हैं. वहीं इजराइल के पास 82 नौसैनिक प्लेटफॉर्म हैं और उसकी रैंकिंग 41वीं है. दोनों देशों के बीच कुल 27 पोतों का अंतर है, जो समुद्री उपस्थिति और तटीय सुरक्षा के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा सकता है.
मध्य-पूर्व में अमेरिकी सैन्य तैनाती
ईरान पर हमले की तैयारी के लिए अमेरिका ने पहले ही मध्य पूर्व में व्यापक सैन्य तैनाती की है. ओमान के पास तैनात विमानवाहक पोत USS Abraham Lincoln के साथ टॉमहॉक मिसाइलों से लैस तीन युद्धपोत मौजूद हैं, जबकि दूसरा विमानवाहक पोत USS Gerald R. Ford भूमध्य सागर में प्रवेश कर चुका है. इन पोतों पर तैनात F-35 और F/A-18 लड़ाकू विमान ईरान के भीतर गहरे लक्ष्यों तक मार करने में सक्षम हैं. इसके अतिरिक्त हालिया तैनाती में F-22, F-35 और F-16 जैसे आधुनिक जेट, एयर-टैंकर विमान, इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर प्लेटफॉर्म तथा MQ-9 रीपर ड्रोन शामिल हैं.
TOI की एक रिपोर्ट के अनुसार, जॉर्डन, सऊदी अरब, बहरीन और यूएई के ठिकानों पर F-15 ईगल, E/A-18G ग्रोलर, A-10 वॉरथॉग, P-8 पोसीडॉन, E-3 एईडब्ल्यूएंडसी और MQ-4C ट्राइटन ड्रोन तैनात किए गए हैं. अमेरिका ने पैट्रियट और THAAD मिसाइल डिफेंस सिस्टम भी सक्रिय किए हैं. क्षेत्र में 30 से 40 हजार अमेरिकी सैनिक, 13 डिस्ट्रॉयर युद्धपोत, एक परमाणु पनडुब्बी तथा हिंद महासागर स्थित डिएगो गार्सिया बेस पर B-2 स्टील्थ बॉम्बर की तैयारी इस बात का संकेत देती है कि अमेरिका ने निगरानी, हवाई हमले, समुद्री शक्ति और मिसाइल रक्षा-चारों स्तरों पर अपनी सैन्य क्षमता मजबूत कर ली है.
