H-1B वीजा पर भारतीयों को बड़ी राहत! अमेरिकी कोर्ट ने रद्द की 1 लाख डॉलर फीस की मांग, बताया गैरकानूनी
अमेरिका में काम करने का सपना देख रहे हजारों भारतीय आईटी पेशेवरों और छात्रों के लिए बड़ी राहत की खबर आई है. मैसाचुसेट्स की एक फेडरल कोर्ट ने ट्रंप प्रशासन द्वारा H-1B वीजा आवेदनों पर लगाई गई 1 लाख डॉलर की अतिरिक्त फीस को गैरकानूनी करार देते हुए रद्द कर दिया है.
अमेरिका में नौकरी का सपना देखने वाले भारतीय आईटी पेशेवरों और टेक कंपनियों के लिए एक बहुत बड़ी और राहत भरी खबर आई है. मैसाचुसेट्स की एक फेडरल कोर्ट ने ट्रंप प्रशासन द्वारा H-1B वीजा आवेदनों पर लगाई गई 100,000 डॉलर (करीब 95 लाख रुपये) की भारी-भरकम फीस को पूरी तरह खारिज कर दिया है. अदालत ने इस फैसले को ‘गैरकानूनी’ करार देते हुए कहा कि इसके लिए अमेरिकी संसद (कांग्रेस) की मंजूरी नहीं ली गई थी. अमेरिका में सक्रिय भारतीय प्रवासियों और टेक संगठनों ने इस फैसले का जोरदार स्वागत किया है.
फैसले से भारतीय प्रवासियों को बड़ी राहत
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने पिछले साल सितंबर में एक घोषणापत्र जारी कर नए H-1B वीजा आवेदनों के लिए 1 लाख डॉलर की यह मोटी फीस अनिवार्य कर दी थी. इस मनमाने फैसले के खिलाफ चौतरफा विरोध हो रहा था.
अब कोर्ट के इस फैसले पर खुशी जताते हुए ‘फाउंडेशन फॉर इंडिया एंड इंडियन डायस्पोरा स्टडीज’ (FIIDS) के नीति प्रमुख खंडेराव कंद ने कहा, “हम अदालत के इस कदम का स्वागत करते हैं. इससे रोजगार आधारित अप्रवासन प्रणाली (Immigration System) में एक बार फिर निष्पक्षता और स्थिरता लौट आएगी.” उन्होंने आगे कहा कि इनोवेशन, रिसर्च और बिजनेस के क्षेत्र में अमेरिका की बढ़त बनाए रखने के लिए यह फैसला बेहद जरूरी था.
टेक और हेल्थकेयर सेक्टर को मिलेगी मजबूती
विशेषज्ञों का मानना है कि अमेरिका की बड़ी तकनीकी कंपनियों, हेल्थकेयर और मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर्स को आगे बढ़ाने के लिए दुनिया भर की बेहतरीन प्रतिभाओं की जरूरत हमेशा बनी रहती है. इतनी भारी फीस लगाने से टैलेंटेड लोगों का अमेरिका आना मुश्किल हो रहा था. कोर्ट के इस आदेश के बाद अब टेक कंपनियों और वीजा आवेदकों ने राहत की सांस ली है.
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राहत के बीच सावधानी भी जरूरी
हालांकि, भारतीय-अमेरिकी समुदाय के कुछ संगठनों ने इस राहत के बीच थोड़ा सतर्क रहने की सलाह भी दी है. ‘इंडियास्पोरा’ के कार्यकारी निदेशक संजीव जोशीपुरा ने कहा कि भले ही कोर्ट का यह फैसला बड़ी जीत है, लेकिन यह मामला यहीं खत्म नहीं हो जाता. अगर अमेरिकी प्रशासन H-1B वीजा धारकों के लिए मुश्किलें खड़ी करना चाहता है, तो वह कानून को तोड़े बिना भी कुछ नए प्रक्रियात्मक नियम या अड़चनें ला सकता है. इसलिए आगे भी नजर बनाए रखनी होगी.
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