न्यूक्लियर हथियारों से साफ इनकार, ईरान ने भारत को बताया शांति का अहम साथी
ईरान ने परमाणु हथियारों को लेकर अपना रुख फिर साफ किया है. भारत में प्रतिनिधि ने कहा कि ईरान परमाणु हथियार नहीं चाहता और युद्ध खत्म करने को तैयार है. पाकिस्तान की मध्यस्थता के दावे को भी खारिज किया गया, जबकि भारत की भूमिका को अहम बताया गया.
पश्चिम एशिया में जारी तनाव के बीच ईरान की ओर से राहत भरे संकेत आए हैं. भारत में ईरान के सुप्रीम लीडर मोजतबा खामेनेई के प्रतिनिधि अब्दुल माजिद हकीम इलाही ने साफ कहा है कि ईरान की नीति में परमाणु हथियारों के लिए कोई जगह नहीं है. साथ ही उन्होंने संकेत दिया कि अगर परिस्थितियां अनुकूल हों तो ईरान तुरंत युद्ध खत्म करने को तैयार है.
परमाणु हथियारों पर क्या है ईरान का रुख
टाइम्स ऑफ इंडिया को दिए इंटरव्यू में इलाही ने कहा कि ईरान के सुप्रीम लीडर ने पहले ही फतवा जारी कर दिया है, जिसमें परमाणु हथियारों को हराम बताया गया है. उनके मुताबिक, ईरान न तो ऐसे हथियार चाहता है और न ही उन्हें बनाने की दिशा में काम कर रहा है.
इलाही ने कहा कि वेस्ट एशिया में चल रहे संघर्ष को खत्म करना उन देशों पर निर्भर करता है जिन्होंने इसे शुरू किया. उनका आरोप है कि कुछ देश इस टकराव को खत्म करने में दिलचस्पी नहीं दिखा रहे, क्योंकि उन्हें हथियारों की बिक्री और तेल की बढ़ती कीमतों से फायदा हो रहा है.
पाकिस्तान की भूमिका पर सवाल
बीते दिनों पाकिस्तान के उप प्रधानमंत्री और विदेश मंत्री इशाक डार ने कहा था कि उनका देश अमेरिका और ईरान के बीच 15 बिंदुओं वाली शांति पहल में अहम भूमिका निभा रहा है. उन्होंने यह भी कहा कि बातचीत और कूटनीति ही इस संकट का हल है.
हालांकि इलाही ने पाकिस्तान के अमेरिका और ईरान के बीच मध्यस्थता के दावे को खारिज कर दिया. उन्होंने साफ कहा कि इस तरह की कोई बातचीत पाकिस्तान के जरिए नहीं हो रही है और ईरान ने इस संबंध में कोई वार्ता नहीं की है.
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भारत की भूमिका पर भरोसा
इलाही ने भारत की भूमिका को सकारात्मक बताते हुए कहा कि भारत इस संकट को खत्म करने में अहम भूमिका निभा सकता है. उन्होंने भारत और ईरान के रिश्तों को 5,000 साल पुराना बताते हुए कहा कि दोनों देशों के बीच सांस्कृतिक और वैचारिक जुड़ाव बहुत गहरा है.
