ट्रंप की दुश्मनी में बुरा फंसा पाकिस्तान, 25% ईरान टैरिफ से खलबली, डूब जाएंगे 27000 करोड़ रुपये!

ईरान के साथ व्यापार करने वाले देशों पर 25% टैरिफ की ट्रंप की चेतावनी से पाकिस्तान की मुश्किलें बढ़ गई हैं. अमेरिका को निर्यात पर खतरे के साथ-साथ ईरान से ऊर्जा और व्यापार घटने का दबाव भी है. किसी भी रास्ते में पाकिस्तान को आर्थिक नुकसान झेलना पड़ सकता है.

ट्रंप ईरान टैरिफ Image Credit: tv9

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ऐलान किया है कि जो भी देश ईरान के साथ व्यापार करेगा उस पर अमेरिका 25 प्रतिशत अतिरिक्त शुल्क (टैरिफ) लगाएगा. इस घोषणा ने पाकिस्तान की मुश्किलें बढ़ा दी हैं. इस फैसले ने इस्लामाबाद को ऐसे मोड़ पर ला खड़ा किया है जहां हर विकल्प के साथ जोखिम जुड़ा हुआ है. एक तरफ अमेरिका का दबाव है तो दूसरी ओर पड़ोसी ईरान के साथ बढ़ते व्यापार और ऊर्जा जरूरतें. पाकिस्तान ने पिछले कुछ महीनों मे ट्रंप का भरोसा जीतने के लिए काफी कोशिश की है लेकिन उसे भी ईरान के मामले में ट्रंप की नीतियों की खामियाजा उठाना पड़ सकता है. पाकिस्तान और ईरान में 3 अरब डॉलर (27000 करोड़ रुपये) का सालाना कारोबार होता है. अमेरिका से दुश्मनी करने पर ये भारी फंड डूब सकता है. इसी वजह से पाकिस्तान सरकार फिलहाल बेहद सतर्क रुख अपनाए हुए है. प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ की सरकार ने इस मुद्दे पर कोई आधिकारिक बयान देने से बचते हुए हालात पर नजर बनाए रखी है.

पाक के पास विकल्प सीमित

ट्रंप की घोषणा के मुताबिक, ईरान के साथ किसी भी तरह का कारोबारी रिश्ता रखने वाला देश को होने वाले उसके निर्यात पर दंडात्मक टैरिफ का सामना करना पडे़गा. चाहे व्यापार का स्तर या सेक्टर कुछ भी हो. यह पारंपरिक प्रतिबंधों से अलग है, क्योंकि इसमें किसी खास कंपनी या वित्तीय चैनल को नहीं, बल्कि सीधे तीसरे देशों को निशाना बनाया गया है.

पाकिस्तानी अखबार Dawn में प्रकाशित एक ओपिनियन आर्टिकल के मुताबिक, पाकिस्तान के पास इन संभावित अमेरिकी टैरिफ से बचने के “बहुत सीमित विकल्प” हैं और उनमें से कोई भी बिना नुकसान के नहीं है. लेख में कहा गया है कि मौजूदा हालात में पाकिस्तान अगर ईरान से व्यापार जारी रखता है, तो उसे अमेरिकी बाजार में अपने निर्यात पर भारी कीमत चुकानी पड़ सकती है.

एक-दूसरे से क्या लेते हैं दोनों देश

दरअसल, हाल के वर्षों में पाकिस्तान और ईरान के बीच द्विपक्षीय व्यापार तेजी से बढ़ा है और यह करीब 3 अरब डॉलर सालाना तक पहुंच चुका है. इसमें ईरान से पाकिस्तान को पेट्रोलियम प्रोडक्ट्स, केमिकल्स और मशीनरी का निर्यात शामिल है जबकि पाकिस्तान की ओर से चावल, टेक्सटाइल, फल और अनौपचारिक सीमा व्यापार ईरान जाता है. दोनों देशों ने 2025 में इस व्यापार को 2028 तक 10 अरब डॉलर तक ले जाने का लक्ष्य भी रखा था. खासकर एग्रीकल्चर, एनर्जी और पेट्रोकेमिकल्स सेक्टर के लिए यह प्लानिंग की गई थी.

क्या होगा नुकसान

ऐसे में अगर अमेरिकी टैरिफ लागू होते हैं तो यह पाकिस्तान के लिए दोहरी मार साबित हो सकती है. एक ओर अमेरिका को होने वाला निर्यात महंगा होने से घट सकता है. वहीं दूसरी ओर ईरान के साथ व्यापार कम करने पर पाकिस्तान की ऊर्जा आपूर्ति, बॉर्डर इकोनॉमी और रीजनल कनेक्टिविटी पर असर पड़ सकता है. डॉन के मुताबिक, ईरान से दूरी बनाना घरेलू स्तर पर भी गंभीर आर्थिक और रणनीतिक लागत लेकर आएगा.

रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि पाकिस्तान अनौपचारिक रास्तों जैसे बार्टर सिस्टम या लोकल करेंसी में लेन-देन के जरिए ईरान के साथ कारोबार जारी रखने की कोशिश कर सकता है लेकिन ट्रंप की चेतावनी इतनी व्यापक है कि डॉलर के बिना होने वाला या मामूली व्यापार भी अमेरिका की ओर से दंडात्मक कार्रवाई को न्योता दे सकता है.