गणतंत्र दिवस पर ट्रंप का संदेश, बोले ‘भारत-अमेरिका दोस्ती का इतिहास पुराना’, विदेश मंत्री मार्को रूबियो ने भी दी बधाई

राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि अमेरिकी जनता की ओर से वह भारत सरकार और लोगों को 77वें गणतंत्र दिवस की हार्दिक शुभकामनाएं देते हैं. उन्होंने यह भी कहा कि दोनों देश लोकतंत्र की साझा विरासत रखते हैं और उनके बीच ऐतिहासिक रिश्ता है.

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप Image Credit: money9live/Canva

Donald Trump: भारत के गणतंत्र दिवस पर दुनियाभर से शुभकामनाएं आती हैं. इस बार अमेरिका से आए संदेश ने खास ध्यान खींचा. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भारत को 77वें गणतंत्र दिवस की बधाई देते हुए दोनों देशों के रिश्तों को ऐतिहासिक बताया. उन्होंने कहा कि अमेरिका और भारत दुनिया के सबसे पुराने और सबसे बड़े लोकतंत्र हैं और उनके बीच मजबूत संबंध रहे हैं.

यह संदेश ऐसे समय आया है जब व्यापार और टैरिफ जैसे मुद्दों को लेकर दोनों देशों के रिश्तों में कुछ तनाव भी देखा जा रहा है. फिर भी अमेरिकी नेतृत्व की ओर से भारत के लोकतांत्रिक मूल्यों और साझेदारी की सराहना की गई. सोशल मीडिया पर जारी इस संदेश को नई दिल्ली स्थित अमेरिकी दूतावास ने साझा किया.

राष्ट्रपति ट्रंप का संदेश

राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि अमेरिकी जनता की ओर से वह भारत सरकार और लोगों को 77वें गणतंत्र दिवस की हार्दिक शुभकामनाएं देते हैं. उन्होंने यह भी कहा कि दोनों देश लोकतंत्र की साझा विरासत रखते हैं और उनके बीच ऐतिहासिक रिश्ता है.

अमेरिका के विदेश मंत्री मार्को रूबियो ने भी भारत को गणतंत्र दिवस की बधाई दी. उन्होंने कहा कि रक्षा, ऊर्जा, अहम खनिजों और नई तकनीकों के क्षेत्र में दोनों देशों का सहयोग मजबूत हो रहा है. उन्होंने क्वाड मंच के जरिए भारत अमेरिका की साझेदारी का भी जिक्र किया और कहा कि आने वाले समय में दोनों देश मिलकर साझा लक्ष्यों पर काम करेंगे.

गणतंत्र दिवस परेड में अमेरिकी मौजूदगी

भारत में अमेरिका के राजदूत सर्जियो गोर ने भी कर्तव्य पथ पर आयोजित गणतंत्र दिवस परेड में हिस्सा लिया. उन्होंने कहा कि पहली बार इस परेड में शामिल होकर उन्हें गर्व महसूस हुआ. उन्होंने भारतीय आसमान में उड़ते अमेरिकी विमान और हेलीकॉप्टर देखकर खुशी जताई.

रिश्तों में तनाव के मुद्दे भी मौजूद

हाल के समय में भारत और अमेरिका के रिश्तों में कुछ कठिनाइयां भी आई हैं. अमेरिका ने भारतीय सामान पर भारी टैरिफ लगाया था, जिसमें रूस से तेल खरीद को लेकर अतिरिक्त टैक्स भी शामिल था. दोनों देशों के बीच व्यापार समझौते को लेकर कई दौर की बातचीत हुई, लेकिन भारत के कृषि और डेयरी क्षेत्र को खोलने की मांग के चलते अब तक कोई अंतिम समझौता नहीं हो सका है.

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