ईरान पर हमले की तैयारी! 50+ लड़ाकू विमान, 40 हजार सैनिक तैनात और B-2 बॉम्बर भी रेडी, लेकिन UK से ट्रंप को झटका
अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव ने मध्य पूर्व को फिर से युद्ध जैसी स्थिति के करीब ला दिया है. राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने क्षेत्र में बड़े पैमाने पर सैन्य तैनाती की है, जबकि ब्रिटेन के प्रधानमंत्री कीर स्टारमर ने अमेरिकी हमलों के लिए RAF बेस इस्तेमाल करने से इनकार कर दिया है. कूटनीति और सैन्य दबाव साथ-साथ चल रहे हैं. अमेरिका ने इस क्षेत्र में 50 से अधिक लड़ाकू विमान और ड्रोन की तैनाती की है.
USA-Iran Conflict: मध्य पूर्व में अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव ने हालात गंभीर कर दिए हैं. एक ओर राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान पर दबाव बनाने के लिए 2003 के इराक युद्ध के बाद का सबसे बड़ा अमेरिकी सैन्य जमावड़ा खड़ा कर दिया है, जिसमें विमानवाहक पोत, लड़ाकू जेट, लंबी दूरी के बमवर्षक और मिसाइल रक्षा प्रणाली शामिल हैं. वहीं दूसरी ओर, ब्रिटेन के प्रधानमंत्री कीर स्टारमर ने ट्रंप को ईरान पर संभावित हमले के लिए ब्रिटिश RAF ठिकानों के इस्तेमाल की अनुमति देने से इनकार कर दिया है. इस कदम ने कूटनीतिक और सैन्य समीकरणों को और जटिल बना दिया है, जबकि ट्रंप ने चेतावनी दी है कि अगर परमाणु समझौते पर सहमति नहीं बनी तो अगले 10–15 दिनों में बड़ा फैसला लिया जा सकता है.
दो विमानवाहक पोतों की तैनाती
तैनाती के केंद्र में विमानवाहक पोत USS Abraham Lincoln है, जो ओमान के पास तैनात है. इसके साथ टॉमहॉक मिसाइलों से लैस तीन युद्धपोत मौजूद हैं. इस पोत पर तैनात F-35 स्टील्थ फाइटर और F/A-18 लड़ाकू विमान ईरान के कई ठिकानों तक पहुंच सकते हैं. दूसरा विमानवाहक पोत USS Gerald R. Ford भूमध्य सागर में प्रवेश कर रहा है. दोनों पोत मिलकर अमेरिका को बिना खाड़ी देशों के एयरबेस पर निर्भर हुए लंबे समय तक हवाई अभियान चलाने की क्षमता देते हैं. क्षेत्र में कुल 13 अमेरिकी डिस्ट्रॉयर तैनात हैं. फारस की खाड़ी, लाल सागर और उत्तरी अरब सागर में इनकी मौजूदगी अमेरिका को सीमित हमले से लेकर बड़े अभियान तक की तैयारी देती है. एक परमाणु पनडुब्बी भी भूमध्य सागर में तैनात है.
UK से ट्रंप को झटका
इकॉनोमिक टाइम्स के अनुसार, यूके के प्रधान मंत्री कीर स्टारमर ने डोनाल्ड ट्रंप को ईरान पर हमला करने के लिए RAF (रॉयल एयर फोर्स) अड्डों के उपयोग की अनुमति देने से मना कर दिया है. ट्रंप प्रशासन ईरान के खिलाफ सैन्य कार्रवाई की योजना बना रहा है और उसने लंबी दूरी के विमानों और रिफ्यूलिंग प्लेन को मध्य पूर्व में तैनात है, लेकिन ब्रिटिश बेस से संचालन की अनुमति न मिलने पर ट्रंप को झटका लगा है.
50 से अधिक लड़ाकू विमान और ड्रोन की तैनाती
TOI की रिपोर्ट के अनुसार, हालिया 24 घंटों में 50 से अधिक लड़ाकू विमान मध्य पूर्व भेजे गए हैं. इनमें F-22, F-35 और F-16 जैसे आधुनिक जेट शामिल हैं. इनके साथ कई एयर-टैंकर विमान भी भेजे गए हैं ताकि हवा में ही ईंधन भरकर लंबी दूरी तक ऑपरेशन किया जा सके. जॉर्डन के एयर बेस पर करीब 30 अमेरिकी हमलावर विमान पहुंचे हैं. यहां इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर विमान भी तैनात किए गए हैं, जो दुश्मन के रडार और संचार प्रणाली को बाधित कर सकते हैं. साथ ही MQ-9 रीपर ड्रोन भी तैनात हैं.
40 हजार सैनिकों की तैनाती
संभावित जवाबी हमले से बचाव के लिए अमेरिका ने पैट्रियट और THAAD मिसाइल डिफेंस सिस्टम भी तैनात की है. फिलहाल 30,000 से 40,000 अमेरिकी सैनिक पहले से ही इस क्षेत्र में मौजूद हैं. हिंद महासागर स्थित डिएगो गार्सिया बेस पर भी गतिविधियां बढ़ी हैं, जहां B-2 स्टील्थ बॉम्बर विमानों के लिए तैयारी की गई है.
तस्वीर में दिखी हवाई तैनाती
TOI की एक रिपोर्ट के अनुसार 22 जनवरी के बाद कई जगहों पर विमान तैनात किए गए हैं. इन तैनातियों से साफ है कि अमेरिका ने निगरानी, हमले और संचार तीनों मोर्चों पर तैयारी मजबूत की है.
- ग्रीस – RC-135V टोही विमान
- जॉर्डन – F-15 ईगल, E/A-18G ग्रोलर, A-10 वॉरथॉग
- सऊदी अरब – F-16, P-8 पोसीडॉन, E-3
- बहरीन – P-8 पोसीडॉन
- यूएई – MQ-4C ट्राइटन ड्रोन
इजराइल की भूमिका और तेल बाजार पर असर
अमेरिका के विदेश मंत्री जल्द ही इजराइल का दौरा कर सकते हैं. इजराइली नेतृत्व ईरान के खिलाफ सख्त रुख अपनाने की वकालत कर रहा है. इस पूरे घटनाक्रम का असर वैश्विक तेल बाजार पर भी पड़ सकता है. दुनिया के करीब 20% तेल का व्यापार होर्मुज जलडमरूमध्य से होता है. हालांकि ईरान ने पहले भी इसे बंद करने की धमकी दी है, लेकिन अब तक ऐसा कदम नहीं उठाया है.
