मंदी के मुहाने पर अमेरिका! मशीन लर्निंग ने बताया अगले 12 महीने बेहद जोखिम भरे, मूडीज के अर्थशास्त्री का अलर्ट

अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव के कारण कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल ने वैश्विक अर्थव्यवस्था को चिंता में डाल दिया है. मूडीज के मुख्य अर्थशास्त्री मार्क जांडी ने चेतावनी दी है कि अगर तेल की कीमतें ऊंची बनी रहीं, तो अमेरिका अगले 12 महीनों में मंदी की ओर बढ़ सकता है, क्योंकि आर्थिक संकेत पहले से ही कमजोर हैं.

USA towards recession in West Asia Image Credit: Canva/ Money9

USA towards recession: अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते संघर्ष के चलते कच्चे तेल की कीमतों में भारी उछाल आया है, जिससे अमेरिकी अर्थव्यवस्था पर गंभीर दबाव बन रहा है. अर्थशास्त्रियों का मानना है कि महंगे तेल का असर उपभोक्ताओं और बाजार दोनों पर पड़ेगा और अगर यही स्थिति बनी रही तो अगले एक साल में अमेरिका मंदी की ओर बढ़ सकता है. हाल के आर्थिक आंकड़े भी धीमी होती वृद्धि और बढ़ती चिंता की ओर इशारा कर रहे हैं.

तेल की कीमतों में रिकॉर्ड उछाल

पश्चिम एशिया में तनाव बढ़ने के बाद ब्रेंट क्रूड की कीमतों में मार्च महीने में अब तक करीब 42% की बढ़ोतरी हो चुकी है. इस महीने की शुरुआत में कीमतें $119.50 प्रति बैरल तक पहुंच गईं, जो पिछले चार वर्षों का उच्चतम स्तर है. तेल की कीमतों में लगातार बढ़ोतरी से निवेशकों में सावधानी बढ़ गई है, क्योंकि इसका असर वैश्विक अर्थव्यवस्था पर पड़ सकता है.

मूडीज के मार्क जांडी ने दी मंदी की चेतावनी

मूडीज के मुख्य अर्थशास्त्री मार्क जांडी ने कहा कि अमेरिका में अगले 12 महीनों में मंदी की आशंका तेजी से बढ़ रही है. उन्होंने बताया कि उनकी मशीन लर्निंग आधारित आर्थिक संकेतक मॉडल के अनुसार मंदी की संभावना पहले ही 49% तक पहुंच चुकी थी. उन्होंने कहा कि लेबर मार्केट के कमजोर आंकड़े और पिछले साल के अंत से लगातार नरम पड़ते आर्थिक संकेत इस जोखिम को बढ़ा रहे हैं.

जांडी के अनुसार, ईरान संघर्ष और तेल की कीमतों में उछाल इस संभावना को 50% से ऊपर ले जा सकता है. उन्होंने यह भी कहा कि द्वितीय विश्व युद्ध के बाद लगभग हर मंदी से पहले तेल की कीमतों में उछाल देखा गया है. हालांकि अब अमेरिका जितना तेल पैदा करता है उतना ही उपभोग भी करता है, फिर भी महंगा तेल उपभोक्ताओं पर तुरंत असर डालता है, और पहले से ही लोग खर्च को लेकर सतर्क हो चुके हैं.

अमेरिकी अर्थव्यवस्था की रफ्तार धीमी पड़ी

2025 की चौथी तिमाही में अमेरिकी अर्थव्यवस्था की वृद्धि दर सिर्फ 0.7% रही, जो पहले अनुमान से काफी कम है और 2025 की पहली तिमाही में आई गिरावट के बाद सबसे कमजोर प्रदर्शन है. कमजोर उपभोक्ता मांग और सरकारी खर्च में कमी इसकी मुख्य वजह रही. पूरे साल 2025 में GDP वृद्धि दर 2.1% रही, जो पहले के अनुमान से 0.1% कम है. इसके मुकाबले 2024 में अर्थव्यवस्था 2.8% की दर से बढ़ी थी, यानी साफ तौर पर रफ्तार धीमी हुई है.

संघर्ष से तेल सप्लाई पर बड़ा असर

28 फरवरी को अमेरिका और इजरायल द्वारा ईरान पर हमलों के बाद शुरू हुए संघर्ष ने तेल आपूर्ति को गंभीर रूप से प्रभावित किया है. स्ट्रेट ऑफ होर्मुज, जहां से रोजाना करीब 2 करोड़ बैरल (20 मिलियन) तेल गुजरता है और जो दुनिया के लगभग 20-25% समुद्री तेल व्यापार का हिस्सा है, वहां से टैंकरों की आवाजाही लगभग रुक गई है. इस बीच इराक, कुवैत और संयुक्त अरब अमीरात जैसे बड़े उत्पादक देशों ने भी उत्पादन कम कर दिया है क्योंकि उनके पास भंडारण की कमी हो रही है. ईरान, इजरायल और अमेरिका द्वारा तेल और गैस इंफ्रास्ट्रक्चर पर हमलों ने स्थिति को और बिगाड़ दिया है. इस कारण बाजार में आपूर्ति को लेकर भारी चिंता है और कीमतों में रोजाना बड़े उतार-चढ़ाव देखने को मिल रहे हैं.

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