गैस सप्लाई के लिए बनेगा ₹600 करोड़ का ‘वॉर चेस्ट’, सरकार का बड़ा प्लान; LNG सप्लाई 50% घटने का डर
सरकार फर्टिलाइजर प्लांट्स के लिए LNG सप्लाई सुनिश्चित करने हेतु ₹600 करोड़ का फंड (वॉर चेस्ट) तैयार कर रही है. पश्चिम एशिया संकट से गैस सप्लाई घटने की आशंका है. स्पॉट मार्केट से खरीद बढ़ाई जाएगी ताकि उत्पादन प्रभावित न हो और खरीफ सीजन में उर्वरकों की उपलब्धता बनी रहे.
पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बीच भारत सरकार ने फर्टिलाइजर प्लांट्स की गैस जरूरतों को पूरा करने के लिए बड़ा कदम उठाया है. LNG (लिक्विफाइड नेचुरल गैस) की कमी से उत्पादन प्रभावित न हो इसके लिए सरकार ₹600 करोड़ से अधिक का ‘वार चेस्ट’ (फंड) तैयार कर रही है जिससे स्पॉट मार्केट से तुरंत गैस खरीदी जा सके.
गैस की कमी का खतरा
‘बिजनेस स्टैंडर्स’ ने सोर्सेज के हवाले से बताया है कि फर्टिलाइजर प्लांट्स के लिए LNG की अतिरिक्त खरीद इसलिए जरूरी हो गई है क्योंकि सप्लाई में गिरावट की आशंका है. यदि ईरान संकट लंबा खिंचता है, तो गैस सप्लाई 70% से घटकर 60% या यहां तक कि 50% तक आ सकती है. ऐसे में सरकार तुरंत वैकल्पिक इंतजाम कर रही है.
40% तक बढ़ सकती है LNG की कीमतें
ईरान और इजराइल के बीच जारी तनाव और हॉर्मुज स्ट्रेट में अनिश्चितता के कारण LNG सप्लाई पर असर पड़ रहा है. यह समुद्री रास्ता वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति के लिए बेहद अहम माना जाता है. नॉर्वे की रिसर्च फर्म Rystad Energy का मानना है कि अगर यह संकट लंबा चलता है, तो एशिया में LNG की कीमतों में 40% तक बढ़ोतरी हो सकती है.
फर्टिलाइजर प्लांट्स की सप्लाई बनाए रखना लक्ष्य
मौजूदा व्यवस्था के तहत यूरिया संयंत्र अपनी LNG जरूरत का करीब 65% लंबी अवधि के अनुबंधों से और 15% स्पॉट मार्केट से पूरा करते हैं. बाकी कमी को मेंटेनेंस के जरिए संतुलित किया जाता है. सरकार अब स्पॉट LNG की खरीद बढ़ाकर यह सुनिश्चित करना चाहती है कि मेंटेनेंस के बाद उत्पादन में ज्यादा गिरावट न आए और प्लांट लगातार चलते रहें.
खरीफ सीजन में बढ़ती मांग बड़ी चुनौती
भारत में खरीफ सीजन के दौरान उर्वरक की मांग काफी बढ़ जाती है, जो करीब 32-33 मिलियन टन तक पहुंचती है. देश में लगभग 37 यूरिया प्लांट्स LNG पर निर्भर हैं और उनकी लागत का 80% हिस्सा गैस से जुड़ा होता है. इस वित्त वर्ष में भारत करीब 40 मिलियन टन यूरिया की खपत कर सकता है, जिसमें से करीब 10 मिलियन टन आयात किया जाता है. ऐसे में गैस सप्लाई बनाए रखना सरकार के लिए बेहद अहम चुनौती बन गया है.
एक्सपर्ट्स के अनुसार, औसत आकार के यूरिया प्लांट में निर्धारित मेंटेनेंस बंदी 15-25 दिन तक चल सकती है, जो प्लांट के आकार पर निर्भर करती है. भारत हर महीने औसतन 22-25 लाख टन यूरिया का उत्पादन करता है.
दुनिया के टॉप 5 LNG एक्सपोर्टर
| देश | LNG निर्यात (बिलियन क्यूबिक मीटर) |
|---|---|
| अमेरिका (US) | 115.2 |
| कतर (Qatar) | 106.9 |
| ऑस्ट्रेलिया (Australia) | 106.8 |
| रूस (Russia) | 44.3 |
| मलेशिया (Malaysia) | 36.0 |
| कुल (Total) | 544.1 |
Latest Stories
Gold-Silver Rate Today: सोने-चांदी की तेजी पर ब्रेक, फेड के फैसले से पहले बाजार सतर्क, गोल्ड 1.55 लाख पर पहुंचा, सिल्वर 0.76% टूटा
जब हर महीने मिलेंगे 29 टैंकर तब होगी LPG की सप्लाई नॉर्मल, देश में अभी 33.37 करोड़ कस्टमर्स, रोजाना 50-60 लाख सिलेंडर की बुकिंग
कच्चे तेल की कीमतों में उछाल जारी, सिर्फ एक महीने में साल भर जितनी बढ़ोतरी; ब्रेंट $102 पर बरकरार
