जब हर महीने मिलेंगे 29 टैंकर तब होगी LPG की सप्‍लाई नॉर्मल, देश में अभी 33.37 करोड़ कस्‍टमर्स, रोजाना 50-60 लाख सिलेंडर की बुकिंग

भारत में LPG की बढ़ती मांग के चलते हर महीने 29–34 टैंकर की जरूरत पड़ सकती है, क्‍योंकि घरेलू उत्पादन बढ़ाने के बावजूद सप्लाई गैप बना रहेगा. इसी वजह से भारत की विदेशों पर निर्भरता बढ़ती जा रही है. मगर जियोपॉलिटिकल तनाव से समस्‍याएं बढ़ती जा रही हैं.

भारत में एलपीजी की खपत Image Credit: AI/canva

LPG Crisis: भारत में रसोई गैस यानी LPG की मांग लगातार तेजी से बढ़ रही है. पश्चिम एशिया में बढ़े तनाव के चलते इसकी सप्‍लाई प्रभावित हुई थी. जिसका असर देश में साफ तौर पर देखने को मिला था. मगर अब स्थिति सामान्‍य हो रही है. हालांकि इसके बावजूद भारत में LPG पर विदेशों पर निर्भरता बढ़ रही है. घरेलू प्रोडक्‍शन बढ़ने के बावजूद भारत में LPG की डिमांड पूरी नहीं हो सकती है.

मनी कंट्रोल की रिपोर्ट के मुताबिक, FY27 तक देश की मासिक मांग 2.9 मिलियन टन तक पहुंच सकती है. अगर 46,000 टन क्षमता के आधार पर वेसेल का अनुमान लगाया जाए तो घरेलू उत्पादन बढ़ाने के बावजूद भारत को हर महीने करीब 29 से 34 LPG टैंकर आयात करने की जरूरत पड़ेगी. देश में अभी करीब 33.37 करोड़ एलपीजी कस्‍टमर्स हैं और रोजाना लगभग 50-60 लाख सिलेंडर की बुकिंग होती है.

क्‍या LPG संकट रहेगा बरकरार?

विश्‍लेषण के मुताबिक अगर एलपीजी के उत्पादन में 30% की बढ़ोतरी भी हो जाती है, तब भी हर महीने 1.4 मिलियन टन से ज्यादा की कमी बनी रहेगी. वहीं 50% बढ़ोतरी के बाद भी आयात 1.34 मिलियन टन से ऊपर ही रहेगा. यानी साफ है कि भारत की LPG के लिए विदेशों पर निर्भरता बनी रहेगी.

खपत में उछाल

1998-99 में जहां LPG की मासिक खपत 5.35 लाख टन थी, वहीं अब यह बढ़कर 3.13 मिलियन टन से ज्यादा हो चुकी है. उज्ज्वला योजना और घर-घर गैस कनेक्शन पहुंचना इसका बड़ा कारण है. हालांकि इसके मुकाबले उत्पादन काफी धीमी रफ्तार से बढ़ा है. इसी अवधि में उत्पादन सिर्फ 3.6 लाख टन से बढ़कर करीब 1.28 मिलियन टन तक ही पहुंच पाया है.

इन देशों पर ज्यादा निर्भरता

UAE, कतर, सऊदी अरब और कुवैत जैसे पश्चिम एशियाई देश भारत के लिए LPG के मुख्य सप्लायर हैं. मगर जियोपॉलिटिकल टेंशन बढ़ने से जोखिम बढ़ जाता है. अब भारत को अमेरिका, कनाडा और अल्जीरिया जैसे नए स्रोतों की तलाश करनी होगी.

इन शहरों पर पड़ सकती है ज्‍यादा मार

रिपोर्ट के मुताबिक चंडीगढ़ और दिल्ली में गैस सिलेंडर की रीफिल साइकिल सबसे कम है, जहां लोग औसतन 19 से 21 दिन में सिलेंडर भरवाते हैं. जबकि राष्ट्रीय औसत 30 दिन का है. सरकार ने शहरी क्षेत्रों में 25 दिन और ग्रामीण इलाकों में 45 दिन की सीमा तय कर रखी है.